टीएमसी को उम्मीद से ज़्यादा, सीपीएम सिफ़र, बीजेपी का खाता खुला

विशेष रिपोर्ट , प. बंगाल निकाय चुनाव, शुक्रवार , 18-08-2017


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जनचौक संवाददाता

कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी सहित पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने भी नहीं सोचा था कि निकाय चुनाव में पार्टी का इस कदर का प्रदर्शन आएगा, जिसे कहते हैं- उम्मीद से ज्यादा या छप्पर फाड़ के। 

तीन निकायों में क्लीन स्वीप

पश्चिम बर्दवान का 43 वार्डों वाला दुर्गापुर नगर निगम, पूर्वी मिदनापुर के 29 वार्डों वाली हल्दिया नगर पालिका और नदिया के 12 वार्डों वाले कूपर्स कैंप में तृणमूल कांग्रेस ने क्लीन स्वीप किया है। यानी पूरी तरह विपक्ष मुक्त। इन 84 वार्डों में कांग्रेस, सीपीएम और बीजेपी तीनों ही खाता खोलने में नाकाम रही हैं।

साभार : गूगल

सभी सातों नगर निकाय टीएमसी के कब्ज़े में

सभी 7 नगर निकाय तृणमूल कांग्रेस के कब्जे में आ गए हैं। आश्चर्यजनक बात तो यह है की सभी 7 नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस और सीपीएम का कहीं भी खाता तक नहीं खुला। जबकि बीजेपी के खाते में 6 वार्ड दर्ज हुए हैं।

बुनियादपुर और धुपगुड़ी में बीजेपी ही मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी है। बीरभूम के नलहट्टी के 16 वार्डों में से टीएमसी को 14 वार्ड और बागी तृणमूल, कांग्रेस, निर्दलीय और फारवर्ड ब्लॉक को एक-एक वार्ड में कामयाबी मिली है।

दक्षिण दिनाजपुर के बुनियादपुर के 14 वार्डों में तृणमूल कांग्रेस को 13 और बीजेपी को एक वार्ड में जीत मिली है। जलपाईगुड़ी के 16 वार्डों वाली धुपगुड़ी नगर पालिका में टीएमसी 12 और बीजेपी 4 वार्डों में विजयी रही है। 18 वार्डों वाली पासकुड़ा नगर पालिका के 17 वार्डों में टीएमसी और 1 वार्ड में बीजेपी विजयी रही है। इसके अलावा हुगली के चापदानी और झाड़ग्राम नगरपालिका के एक-एक वार्डों में हुए उपचुनाव को भी जीत गई है।

पूर्वी मिदनापुर के 29 वार्डों वाली हल्दिया नगर पालिका में चुनाव के माध्यम से तृणमूल कांग्रेस ने पहली बार कब्ज़ा किया है। ममता बनर्जी के 2011 में सत्ता में आने के बाद भी 2012 में हुए चुनाव में टीएमसी हार गई थी। बाद में दल बदल व विपक्ष में टूट फूट कराकर काबिज़ हुई थी। 

हल्दिया, दुर्गापुर और कूपर्स कैंप जहां तृणमूल कांग्रेस ने क्लीन स्वीप की है, वहां पिछले चुनाव में कैसा प्रदर्शन रहा था, पहले इस पर एक नजर डालते हैं-

2012 के चुनाव में हल्दिया में 26 वार्ड थे और टीएमसी 11 वार्ड जीती थी। इस दफे 29 वार्ड हैं और सभी 29 वार्ड टीएमसी की झोली में गए हैं। पिछली बार की तुलना में 18 सीटें अधिक आई हैं। 

दुर्गापुर के 43 वार्ड में टीएमसी 43 वार्ड जीती है, जबकि पिछली बार 29 सीटें मिली थीं। यानी इस दफे 14 सीटों का इजाफा हुआ है। कूपर्स कैंप के सभी 12 वार्ड टीएमसी के कब्जे में गए  हैं, जबकि पिछले चुनाव में सिर्फ 1 सीट से खाता खुला था। यानी की इस दफे 11 सीटों का जबरदस्त इजाफा है।

अब शेष चार नगर निकाय पर नजर दौड़ाते हैं जहां क्लीन स्वीप नहीं हो पाया है- बुनियादपुर के 14 में 13 जीती हैं, यहां पहली बार चुनाव हुआ है। बुनियादपुर नगरपालिका नया गठित हुआ है। पासकुड़ा की 18 सीटों में से 17 मिली हैं जबकि पिछली बार 12 मिली थीं। नलहटी में 16 वार्डों में 14 वार्ड मिले हैं जबकि पिछली बार मिले थे।

धुपगुड़ी यही एकमात्र जगह है जहां विपक्ष दिखा है और वह भी बीजेपी के रूप में। धुपगुड़ी के 16 वार्ड में 12 पर टीएमसी कामयाब रही है, हालांकि यहां भी एक सीट का मामूली इजाफा हुआ है। पिछले चुनाव में टीएमसी यहां से 11 सीटों पर विजयी रही थी।   

जीत की खुशी। फोटो साभार : गूगल

'ममता की जीत' 

चुनाव परिणाम की गूंज बंगाल विधानसभा में भी सुनायी दी। सत्तारूढ़ दल के सदस्यों ने परिणाम का स्वागत किया तथा इसे ममता बनर्जी के नेतृत्व में चल रही सरकार की जीत करार दिया, जबकि माकपा और भाजपा ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए उम्मीद जतायी कि पंचायत चुनाव में वे बेहतर प्रदर्शन करेंगे। 

राज्य के संसदीय मामलों के मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा कि परिणाम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि राज्य की जनता का मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर पूरा विश्वास है। राज्य में विकास की धारा बह रही है, जिसका जनता ने समर्थन किया। 

शहरी विकास मामलों के मंत्री फिरहाद हकीम ने कहा कि माकपा की असफलता के कारण भाजपा बढ़ रही है। राज्य की जनता सांप्रदायिक शक्ति को नहीं चाहती है। राज्य में इस पार्टी के लिए कोई जगह नहीं है। विपक्षी दल के उम्मीदवार केवल उन सीटों पर जीत पाये हैं, जहां वे लोग अच्छा उम्मीदवार नहीं दे पाए।

वोटों की लूट हुई : माकपा

माकपा विधायक दल के नेता सुजन चक्रवर्ती ने कहा कि पालिका चुनाव पूरी तरह से नाटक था। चुनाव के दौरान केवल मतों की लूट हुई थी। इस कारण ही तृणमूल की जीत हुई। पुलिस को सामने रख कर मतों को लूटा गया है, लेकिन पंचायत चुनाव में स्थिति दूसरी होगी। पंचायत चुनाव में जनता प्रतिरोध करेगी और विपक्ष का चुनाव परिणाम अच्छा होगा।  मंत्री पार्थ चटर्जी ने कटाक्ष किया कि कोलकाता के वार्ड नंबर 100 में चुनाव के दौरान वाम मोर्चा के शासनकाल में वह भी मतदान नहीं कर पाये थे। उन लोगों की आवाज कोई सुनने के लिए तैयार नहीं था, लेकिन वे लोग विपक्ष की बात सुन रहे हैं। 

'भाजपा को स्वीकार किया गया'

प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष व विधायक दिलीप घोष ने कहा कि पंचायत चुनाव के पहले तृणमूल कांग्रेस की कमर टूट जायेगी। ममता बनर्जी सहित तृणमूल के मंत्री व नेता भाजपा को मुख्य शत्रु मानते हैं। आम लोगों ने पालिका चुनाव के माध्यम से इसे साबित कर दिया है। तृणमूल कांग्रेस के मुख्य विरोधी दल के रूप में आम लोगों ने भाजपा को स्वीकार कर लिया है। राज्य में वाम मोर्चा का अब कोई महत्व नहीं है। दुर्गापुर व हल्दिया में मतों की लूट हुई है। लोग मतदान नहीं कर पाए। तृणमूल, माकपा व कांग्रेस एकजुट होकर केंद्र में भाजपा का विरोध कर रहे हैं। राज्य में भी सभी पार्टियां भाजपा के खिलाफ एकजुट हैं।










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