विश्वविद्यालयों की नियुक्तियों में लागू रोस्टर प्रणाली के खिलाफ पिछड़े छात्रों में रोष, कल होगा संसद का घेराव

मुद्दा , , बुधवार , 18-07-2018


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जनचौक ब्यूरो

(संसद में तमाम मुद्दों के अलावा विश्वविद्यालयों में लागू होने वाला रोस्टर मुद्दा भी गरमाने वाला है। इसके लागू होने के साथ ही विश्वविद्यालयों में होने वाली नियुक्तियों में आरक्षण का कोटा बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। अगर साफ शब्दों में कहें तो पिछड़े और दलितों का कोटा पूरी तरह से निष्प्रभावी हो गया है। इसको लेकर सामाजिक न्याय के पक्षधर हिस्से में भीषण आक्रोश है। और ये जगह-जगह कई रूपों में सामने आ रहा है।

दिल्ली में भी कल इसके खिलाफ अपना रोष जाहिर करने के लिए सामाजिक न्याय के आंदोलन से जुड़े छात्रों, नौजवानों और बुद्धिजीवियों ने संसद के सामने प्रदर्शन करने का फैसला किया है। इनकी मांग है कि रोस्टर प्रणाली को पूरी तरह से खत्म किया जाए। अपनी मांगों समेत प्रदर्शन के सिलसिले में कुछ छात्रों ने एक अपील जारी की है। जनचौक ने इस आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे लक्ष्मण यादव की ओर से जारी उस पूरे पर्चे को ही अपने पोर्टल पर देने का फैसला किया है-संपादक)

लोकतंत्र का सबसे बड़ा सत्ता प्रतिष्ठान, आम जन की आवाज़, चुने हुए प्रतिनिधियों की जनता के प्रति जवाबदेह संसद में अब हमें अपनी आवाज़, अपने मुद्दे की गूंज सुनानी है। आज से मानसून सत्र शुरू हो रहा है। हमने दर्जनों सांसदों से अपील की है, कल सूत्रों से पता चला कि 'सर्वदलीय बैठक में ही रोस्टर का मुद्दा उठा और कई दलों के सांसदों ने लोकसभा अध्यक्षा से कहा कि अगर उच्च शिक्षा में सामाजिक न्याय के हत्यारे रोस्टर पर सरकार कोई कदम नहीं उठाती है, तो हम संसद चलने नहीं देंगे। क्योंकि ये बहुत ख़तरनाक रोस्टर है। ये उच्च शिक्षा में सामाजिक न्याय को पूरी तरह बर्बाद कर देगा।' आज कल में संसद से शायद सकारात्मक पहल सुनाई दे।

इस मौके पर जारी पोस्टर।

साथियों! अब हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम संसद की सड़कों को अपने हुजूम से भर दें। सामाजिक न्याय के सवाल पर, उच्च शिक्षा के निजीकरण, ऑटोनामी, फंड-कट, सीट-कट जैसे तमाम मसलों पर हमारी लड़ाई मुल्क को बचाने की लड़ाई है। अगर विश्वविद्यालय बर्बाद हो गए, अगर उनमें वंचितों-शोषितों को मौक़ा नहीं मिला, तो ये इस मुल्क की सबसे भयावह क्षति होगी। क्योंकि विश्वविद्यालयों में ही तो सवाल करने और आलोचना के ज़रिये एक बेहतर मुल्क बनाने का सकारात्मक प्रयास करने की ट्रेनिंग मिलती है। आइये, इस मुल्क को और इसमें सबकी हिस्सेदारी को बचाने के लिए संसद की सड़कों पर अपने अधिकार के लिए घेराव करें। 

तो आइये! कल अपने अधिकारों के लिए हम संसद घेरने चलते हैं। लोहिया ने कहा था कि "जब सड़कें ख़ामोश हो जाती हैं, तो संसद आवारा हो जाती है।" इसलिए कल अगर हम अपनी संख्या से एक दबाव बनाने में कामयाब रहे तो संसद और सरकार को झुकना पड़ेगा। 

आइये! कल जब हमारे चुने हुए सांसद सदन में उच्च शिक्षा में सामाजिक न्याय विरोधी रोस्टर पर सरकार को घेर रहे होंगे, तब हम सड़क को घेरें, संसद घेरें। 

आप सभी से अनुरोध है कि भारी संख्या में अपने साथियों, दोस्तों के साथ ज़रूर पहुंचें। कल यानी 19 जुलाई को दोपहर 12 बजे, संसद मार्ग, नई दिल्ली।

 






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G1 :: - 07-18-2018
मोदी सरकार इस आंदोलन को इग्नोर करे.. युवा नाराज नही होंगे ये हम गँरंटी से कहे हकते है.. क्यो कि ये भक्त गण है कल तक हर हर मोदी करते आए है.. इन भक्तो के पँरेंटस् को भी महेसुस चाहीये के घर के बच्चे को हर हर मोदी कहेने से रोकना कितना जरूरी था वर्ना आज कुछ हजार कि फीस की बजाय लाखो रुपिये फिस नही देनी पडती.. ना पैसै होंगे ना अँडमिशन.. पढाई से छुठ्ठी.. मेहनत मजदुरी कर के पेट पाल लेंगे मगर भाजपा को ही वोट देंगे.. ऊसी के कहेने पर लडाई झगडे करेंगे जेल जाऐंगे.. जेल कोई बुरी जगह थोडे ही है.. कृष्ण का जन्म भी तो कारागृह मे हुवा था.. और संघी राज करेंगे.. हम धर्म और शास्त्रो को मानते है पालन करते है.. सनातनी हमे जिस वर्ण के अनूसार रखना चाहेंगे हम वैसे ही रहेंगे हमारे पास 3000 साल की वर्णव्यवस्था कि गुलामी कि विरासत है और लंबा अनुभव है.. और हमे गुलामी पसंद है.. हर हर मोदी.. नकली ओबीसी मोदी झिंदाबाद