क्या नशे में है उत्तराखंड सरकार?

मुद्दा , , शुक्रवार , 19-05-2017


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अजय ढौंडियाल

-एक राज्य में दोहरी शराब नीति क्यों मंजूर की गई?
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शराब से राजस्व का लक्ष्य करीब दोगुना तक क्यों रखा गया?
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जब सरकार कहती रही है कि शराब से राजस्व कमाना लक्ष्य नहीं है
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प्रदेश में नई डिस्टिलरी खोलने की घोषणा के पीछे क्या है मकसद?

उत्तराखंड सरकार लगता है नशे में है। तभी तो शराब पर इस तरह का फैसला लिया है। जिस शराब को लेकर उत्तराखंड के पहाड़ से लेकर मैदान तक आंदोलन हो रहे हैं, उसी शराब की बिक्री का लक्ष्य सरकार ने करीब दोगुना कर दिया है। ये तब जबकि सरकार यह कहती रही कि उसका मकसद शराब से कमाई करना नहीं है और वो अब धीरे धीरे शराबबंदी की ओर बढ़ रही है। जब जब उत्तराखंड सरकार से शराब से आने वाले राजस्व को लेकर सवाल किए गए तब तब सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत कहते रहे कि आय के दूसरे स्रोतों पर काम किया जाएगा। दूसरे संसाधन विकसित किए जाएंगे और नई शराब नीति में सबकुछ उलटा दिख रहा है। 

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत

एक प्रदेश-दो नीतियां 

धीरे-धीरे शराबबंदी की ओर बढऩे का वादा करने वाली टीएसआर सरकार ने नई शराब नीति में नई डिस्टिलरियां  खोलने का भी फैसला किया है। राज्य में शराब बिक्री के पैमाने भी दोहरे कर दिए गए हैं। एक ही प्रदेश में दो-दो शराब नीतियां। पहाड़ में शराब दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे तक बिकेगी, जबकि मैदानी इलाकों में सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक। इतना ही नहीं ऐसा पहली बार किया गया है कि राज्य के सीमावर्ती इलाकों में शराब रात 11 बजे तक बेची जाएगी। मकसद साफ है कि शराब से ज्यादा से ज्यादा कमाई। उत्तराखंड सरकार ने नई शराब नीति को लागू करने की तरीख 1 जून से रखी है। पिछले साल शराब बिक्री का लक्ष्य 1850 करोड़ रखा गया था तो इस साल 2310  करोड़ रखा गया है। साथ ही ये भी तय किया गया है कि शराब पर दो फीसदी सेस लगाया जाएगा। यानी इस बार शराब कुछ महंगी हो जाएगी। तर्क सरकार के अपने हैं। सेस की यह धनराशि सामाजिक सुरक्षा और सड़क सुरक्षा पर खर्च होगी। इसके अलावा कमाई बढ़ाने के उद्देश्य से इस बार लाइसेंस फीस बढ़ाई गई है। लाइसेंस फीस से मिलने वाले राजस्व का लक्ष्य इस बार 1450 करोड़ रखा गया है, जबकि पिछली बार ये 1187 करोड़ था। 

आपको बता दें कि शराब को लेकर उत्तराखंड सरकार चौतफा घिरी हुई थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जब सरकार ने सभी स्टेट हाईवेज को जिला मार्गों में तब्दील करने की घोषणा की थी तब ही उसकी मंशा पर सवाल खड़े हो गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि पहली अप्रैल से राजमार्गों पर शराब के ठेके नहीं चलेंगे। उत्तराखंड सरकार ने इसका तोड़ निकाल डाला और कैबिनेट मीटिंग में प्रस्ताव पास कर डाला कि अब राज्य में कोई स्टेट हाईवे रहेगा ही नहीं। इसके बाद राज्य में शराब की दुकानों को खोले जाने को लेकर आंदोलन चल पड़ा। ये बाद अलग है कि आज भी राज्य सरकार यही कह रही है कि जल्द ही राज्य की कुल दुकानों का एक तिहाई हिस्सा प्रथम चरण में कम कर दिया जाएगा। ये सिर्फ इसलिए है कि ताकि जनता का गुस्सा फौरी तौर पर थामा जाए।

प्रतीकात्मक तस्वीर

इस शराब नीति में क्या है ख़ास?
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अब उत्तराखंड के सीमावर्ती इलाकों में रात 11 बजे तक खुली रहेंगी शराब की दुकानें
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डीएम ही तय करेंगे जिलों में शराब की दुकानों की संख्या
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शराब पर इस बार 2 फीसदी लगेगा सेस, यानि शराब हो जाएगी महंगी 
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शराब की हर दुकान में लगानी होगी स्वाइप मशीन, ग्राहक ले सकेंगे बिल
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इस बार 2310 करोड़ का रखा गया है लक्ष्य
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पिछले साल से 1850 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया था
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पिछले वित्त वर्ष में 1905 करोड़ की शराब बिक्री हुई थी 

क्या कहते हैं नेता?

राज्य में शराब का जो विरोध हो रहा था वो पुरानी सरकार की नीति को लेकर था। हम नई नीति लाए हैं और इसमें हमने सामाजिक सुरक्षा को सर्वोपरि रखा है। महिलाओं की भावनाओं का आदर किया है। इसीलिए पहाड़ों में शराब बिक्री का वक्त घटाया है। जहां तक राजस्व की बात है तो हमें उम्मीद है कि इस साल आबकारी नीति के तहत हर मद से करीब 46000 करोड़ की आमदनी होगी। 
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प्रकाश पंत, आबकारी मंत्री
 
शराब पर दो फीसदी सेस लगाया गया है। इसमें से एक फीसदी सामाजिक सुरक्षा पर खर्च किया जाएगा और एक फीसदी सड़क सुरक्षा पर। एक जून से नई शराब नीति लागू हो जाएगी। यदि किसी दुकान में ओवर रेट की शिकायत, कंप्यूटर बिलिंग की व्यवस्था नहीं होगी तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसी दुकानों को निरस्त भी किया जा सकता है। साथ ही राज्य में नई डिस्टीलरी भी खोली जाएंगी।
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मदन कौशिक, कैबिनेट मंत्री और सरकार के प्रवक्ता

सरकार शराब पर दोहरी नीति अपना रही है। ये दोहरी नीति प्रदेश में अन्य समस्याओं को जन्म देगी। शराब का काम हमारी पूर्ववर्ती सरकार की तरह मंडी समितियों को दिया जाना उचित था। इससे मंडी समितियों की हालत भी सुधरती।
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प्रीतम सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
 
शराब बिक्री का एक राज्य में अलग अलग वक्त क्यों निर्धारित किया गया है। इससे प्रदेश में शराब की अवैध बिक्री को बढ़ावा मिलेगा। खंडूड़ी सरकार के वक्त भी शराब बिक्री का समय बदला गया था। इसे पूर्ववत किया जाना चाहिए। 
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इंदिरा हृदयेश, नेता प्रतिपक्ष

(लेखक अजय ढौडियाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और इस समय देहरादून में दैनिक जागरण आईनेक्स्ट अख़बार में समाचार संपादक के पद पर कार्यरत हैं।)










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