प्रेम सिंह

लोकतंत्र की राह में कमजोर किंतु समझदार आवाजों को सुनना चाहिए  

मैं पिछले करीब एक महीने से हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में रह रहा हूं। हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से शिमला में… Read More

प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की 167वीं वर्षगांठ: 1857 का विद्रोह, ‘झंडा सलामी गीत’ और राष्ट्रीयता का विचार

ब्रिटिश शासकों, इतिहासकारों, अध्येताओं, लेखकों, लोकगीतकारों ने 10 मई 1857 को मेरठ से शुरू हुए सिपाही विद्रोह को… Read More

किसान आंदोलन: गिरावट का द्योतक है सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन अध्यक्ष का पत्र  

क्या हम एक सजग और संवेदनशील नागरिक समाज न रह कर पार्टियों, नेताओं और सरकारों के भोंपू बन कर रह गए… Read More

‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ के मुकाबले ‘लीला-पुरुष’ की प्राण-प्रतिष्ठा

विश्वास नहीं था भाई लोग ऐसा रंग जमा देंगे। रकम पानी की तरह बहा देंगे। पग-पग पर मोदी की छाप… Read More

इंडिया गठबंधन जनता का वोट तो चाहता है लेकिन उसे सोचने का वक्त नहीं देना चाहता

यह लेख मेरे पिछले तीन लेखों– ‘तीसरे मोर्चे की प्रासंगिकता’ (मई 2014 ), ‘लोकसभा चुनाव 2019: विपक्षी… Read More

फिलिस्तीन-इजराइल संघर्ष: समाधान का गांधीवादी रास्ता

करीब एक शताब्दी पुराने फिलिस्तीन–इजराइल संघर्ष को लेकर पक्ष-पोषण और विश्लेषण का काम पिछले 75 सालों में बहुत हो… Read More