Wednesday, December 7, 2022

संदीप नाईक

अज़मत उल्ला खां: जल, जंगल, जमीन से खेती की लड़ाई तक की अगुआई

मप्र के पिछड़े हुए आदिवासी बहुल और कोयला खदान जिलों की समस्याएं अलग हैं, सूखे की अक्सर मार झेलते रहते हैं और पलायन यहाँ के लोगों का स्थाई भाव है बावजूद इसके कि यहाँ बड़े पैमाने पर खदानें हैं।...

सेहत के सजग प्रहरी विनय विश्वकर्मा

नौरोजाबाद जिला उमरिया, मप्र के रहने वाले विनय विश्वकर्मा जब बारहवीं में अपने गाँव में पढ़ रहे थे तो उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वे अपने क्षेत्र के युवाओं के लिए आदर्श बनेंगे और वे बड़े...

गौरव जायसवाल: परम्परागत काम छोड़कर बदलाव की राह थामी

मप्र और महाराष्ट्र की सीमा पर बसा गाँव कुरई को अंग्रेजों ने बसाया था पूरा गाँव आदिवासी था और मात्र 11 परिवार गैर आदिवासी थे, इनमें ज्यादातर कलार समाज के थे जो शराब बनाने का पुश्तैनी काम करते थे।...

रामप्रसाद काजले: समाज सेवा ही जिसके जीवन का उद्देश्य बन गया

हरदा जिला मप्र के सम्पन्न जिलों में से एक है जहां नर्मदा के पानी की वजह से खेती उन्नत है और अमूमन लोग दो से तीन फसलें ले लेते हैं, घने जंगलों से आच्छादित यह जिला संयुक्त वन प्रबंधन...

मुक्ति कामना का प्रतीक ‘द व्हाइट टाइगर’

एक सफेद शेर है जो पिंजरे में कैद है और उसकी बेचैनी, उसका गुस्सा और उसकी तड़प- सब एक तरफ और दुनिया के झंझट और मुसीबतें एक तरफ,  अरविंद अडिगा के उपन्यास पर आधारित फिल्म "द व्हाइट टाइगर" को...

सामाजिक से लेकर अकादमिक हर मोर्चे पर थी इलीना की दखल

Ilina Sen यानि डॉक्टर इलीना सेन का जाना हम जैसे मित्रों के लिए बड़ा सदमा है और इस वक्त लिखना बेहद मुश्किल।  1990 - 91 की बात होगी, छग में नवा अँजोर की बात चल रही थी, 1990 साक्षरता के...

क्योंकि हम कबीलों में रहने वाले वहशी जानवर हैं!

और हमें लग रहा था कि हम सिर्फ मुस्लिम को मारेंगे 47 के विभाजन में, भिवंडी में, मुजफ्फरपुर में, गोधरा में, बाबरी मस्जिद ढहाने के बाद, और तमाम तरह के लिंचिंग करके - हम सिर्फ सिखों को मारेंगे 1984...

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