Tuesday, October 4, 2022

भास्कर की अडानी ग्रुप पर रिसर्च रिपोर्ट कहां लापता हो गयी?

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दैनिक भास्कर ने 15 सितम्बर को अपने वेबसाइट पर रिसर्च खबर प्रकाशित की कि अडानी ग्रुप के शेयर्स 1100 प्रतिशत बढ़े, मगर … लेकिन पता नहीं सरकार के दबाव में या अडानी समूह के दबाव में यह खबर कल 16 सितम्बर को वेबसाइट से हटा ली है ।

रिपोर्ट में कहा गया था कि अडानी की अमीरी शेयर बाजार के भरोसे: मार्केट कैप में आगे रेवेन्यू में पीछे, दुनिया की टॉप-500 कमाऊ कंपनियों में अडानी की एक भी नहीं। गौतम अडानी चाहें या न चाहें वो चर्चा में लगातार बने रहते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया था कि नेटवर्थ के मामले में वह एलन मस्क और जेफ बेजोस के बाद दुनिया के तीसरे सबसे अमीर व्यक्ति बन चुके हैं। मगर इस खबर के साथ ही उनके ग्रुप पर कुल कर्ज 2.2 लाख करोड़ से बढ़कर 2.6 लाख करोड़ रुपए होने की खबर भी उतनी ही चर्चा में रहती है।

आम आदमी के लिए यह समझना मुश्किल है कि इतने कर्ज के बावजूद गौतम अडानी का नेटवर्थ 12 लाख करोड़ रुपए कैसे है? दरअसल, इस नेटवर्थ को बढ़ाने में सबसे बड़ा हाथ शेयर बाजार का होता है।

लेकिन यह बुलबुला आज फूट भी गया जब अडानी समूह के मालिक गौतम अडानी दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में कुछ देर के लिए दूसरे नंबर पर रहे लेकिन वापस तीसरे नंबर पर लौट गए। यह जानकारी अमीर लोगों की सूची जारी करने वाली मीडिया कंपनी फोर्ब्स ने दी है। फोर्ब्स के मुताबिक अनुसार, गौतम अडानी ने कुछ देर के लिए ऐमजॉन के बॉस जेफ बेजोस और लुई वुइटन के बर्नार्ड अरनॉल्ट को पीछे छोड़ दिया था। लेकिन कुछ ही देर बाद अरनॉल्ट दूसरे नंबर पर वापस आ गए। मौजूदा समय में अडानी की संपत्ति 154.7 बिलियन डॉलर है। उन्हें मौजूदा दौर के अरबपतियों की सूची में कुछ देर के लिए दूसरे नंबर पर दिखाया गया था।

क्रेडिट साइट के अनुसार अडानी कंपनी का कुल कर्ज 2.2 लाख करोड़ था, मगर सीमेंट कंपनी होलसिम के भारतीय ऑपरेशन्स खरीदने में 40 हजार करोड़ के निवेश के बाद यह कर्ज 2.6 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। क्रेडिट साइट ने अपनी एक रिपोर्ट में इस बढ़ते कर्ज पर चिंता जाहिर की है।

क्रेडिटसाइट ने अपनी रिपोर्ट में इस बात की आशंका जाहिर की है कि अगर अडानी ग्रुप ने कर्ज लेकर निवेश करने की अपनी रणनीति को नहीं बदला तो वह कर्ज के जाल में फंस सकती है। अडानी ग्रुप की 7 लिस्टेड कंपनियों में से 6 का मार्केट कैप 1 लाख करोड़ से ज्यादा है। अगर कंपनी को कारोबार में कर्ज की वजह से एक भी झटका लगा तो शेयर बाजार पर इसका असर पड़ना तय है।

अगर गौतम अडानी को अपनी नेटवर्थ बरकरार रखनी है तो जरूरी है कि उनकी कंपनियों के शेयर्स की यह चमत्कारी ग्रोथ भी जारी रहे। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर वे आईएचसी  की तरह और बड़े निवेशक साथ लाने में कामयाब रहे तो ग्लोबल रीच लिस्ट में अपनी पदवी बनाए रख पाएंगे।

जरा अमित टकसाली (Amit Taksali )जी की वाल पर क्या लिखा गया है और जिसे गिरीश मालवीय ने अपने फेसबुक वाल पर शेयर भी किया है पर गौर करें

‘कल ऐसे ही मूड हुआ तो सोचा देखे अडानी की कम्पनीज के P/E रेश्यो क्या चल रहे हैं। मैं देख कर हैरान रह गया अडानी ट्रांसमिशन का P/E दस हज़ार से भी ज्यादा है और वो भी निगेटिव में, अर्थात कंपनी लॉस में है फिर भी उस कंपनी के शेयर का मार्केट रेट आसमान छू रहा है। शेयर मार्केट में काम करने वाले जानते होंगे कि किसी शेयर की वैल्यू देखने का सबसे भरोसेमंद पैरामीटर P/E रेश्यो ही है, वैसे कुछ लोग प्राइस टू बुक वैल्यू को भी भरोसेमंद पैरामीटर मानते है।

जब मैंने अडानी की सारी कम्पनीज के P/E देखे तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए, अगर 2024 में मोदी हारे तो अडानी के शेयर्स धूल चाटेंगे, रिटेल इन्वेस्टर्स बर्बाद हो जायेंगे और शेयर मार्केट क्रेश हो जाएगा, भारत में फाइनेंसियल क्राइसिस भी अडानी की वजह से ही आएगा, बहुत से बैंक बर्बाद हो जायेंगे। नीचे अडानी की सारी लिस्टेड कम्पनीज़ के P/E दिए हुए हैं, आप खुद देख सकते हैं, यह मैंने बीएसई की साईट से लिए हैं। डानी विलमार को लिस्ट हुए अभी एक साल नहीं हुआ है इसलिए उसका P/E नहीं है।यह अनुमानित P/E है।

दरअसल अडानी या किसी भी बड़े उद्योगपति की नेटवर्थ में उसकी कंपनियों के उन शेयर्स की कीमत भी शामिल होती है जो वह अपने पास रखता है। मार्केट में शेयर्स की कीमत यानी मार्केट कैपिटल बढ़े तो अडानी का नेटवर्थ भी बढ़ना तय है।लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ जांचने के लिए मार्केट कैप नहीं बल्कि रेवेन्यू बेहतर पैमाना है। यही वजह है कि फॉर्च्यून मैग्जीन अपनी ग्लोबल 500 लिस्ट में कंपनियों को रैंकिंग उनके रेवेन्यू के आधार पर देती है।

चौंकाने वाली बात ये है कि दुनिया के तीसरे सबसे अमीर व्यक्ति की एक भी कंपनी फॉर्च्यून ग्लोबल 500 लिस्ट में नहीं है। भारत की 9 कंपनियां इस लिस्ट में हैं और इनमें सबसे आगे सरकारी कंपनी एलआईसी है।

स्टॉक मार्केट में लिस्ट होने वाली हर कंपनी अपने कुछ प्रतिशत शेयर्स निवेशकों के लिए जारी करती है। कंपनी के प्रदर्शन और उसकी साख के आधार पर निवेशक इन शेयर्स को खरीदते हैं। निवेशकों की खरीद-फरोख्त ही इन शेयर्स की कीमत तय करती है। सामान्य अर्थों में मार्केट कैपिटल कंपनी के सभी शेयर्स की कुल कीमत होती है। यानी अगर किसी कंपनी ने 2000 शेयर्स जारी किए हुए हैं और एक शेयर की कीमत 500 रुपए है तो सामान्य अर्थों में उसका मार्केट कैप 10 लाख रुपए माना जा सकता है। मार्केट कैप कंपनी की आय में नहीं शामिल होता है, मगर यह लोगों का कंपनी पर भरोसा बताता है।

अडानी एंटरप्राइजेज के एक शेयर की कीमत 14 सितंबर को स्टॉक मार्केट बंद होते समय 3,573 रुपए थी।नेटवर्थ यानी…कुल आय+कुल संपत्ति – कुल कर्ज+कुल लायबिलिटी।

किसी व्यक्ति का नेटवर्थ निकालने के लिए उसकी खुद की आय और उसके अपने नाम पर जो संपत्तियां हैं उनकी कीमत का योग निकाला जाता है। फिर इस राशि में से वह कर्ज या लायबिलिटी घटाई जाती है जो उसके अपने नाम पर है।गौतम अडानी के नेटवर्थ के लिए उन्हें अपनी कंपनी से मिलने वाली तनख्वाह, उनके नाम पर लिए गए घर या अन्य प्रॉपर्टी, गाड़ियां सभी की कीमत जोड़ी जाएगी। साथ ही उन शेयर्स की कीमत भी जोड़ी जाएगी जो उनके नाम पर हैं।हालांकि जब कर्ज और लायबिलिटी की बात आएगी तो सिर्फ वही कर्ज या लायबिलिटी गिने जाएंगे जो उनके खुद के नाम पर हैं। अडानी ग्रुप का कर्ज कंपनी का है, गौतम अडानी का निजी कर्ज नहीं है।

फॉर्च्यून की इस लिस्ट में 9 भारतीय कंपनियां हैं, जिनमें दो टाटा ग्रुप की हैं। रिलायंस की फ्लैगशिप कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज और गोल्ड एक्सपोर्टर राजेश एक्सपोर्ट्स भी लिस्ट में हैं। इसके अलावा इस लिस्ट में सभी भारतीय कंपनियां पब्लिक सेक्टर की हैं। रेवेन्यू के मामले में भारत की सबसे बड़ी कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन यानी एलआईसी है।

अडानी ग्रुप की एक भी कंपनी लिस्ट में नहीं है। मजेदार तथ्य ये है कि एलआईसी ने अडानी ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज के करीब 4% और रिलायंस इंडस्ट्रीज के करीब 7.5% शेयर ले रखे हैं।

ग्लोबल पैमाने पर देखें तो लिस्ट में सबसे ज्यादा 145 कंपनियां चीन की हैं। अमेरिका की 124 और जापान की 47 कंपनियां लिस्ट में शामिल हैं।इस लिस्ट की 500 कंपनियों का कुल रेवेन्यू 37.8 लाख करोड़ डॉलर है जो ग्लोबल GDP के एक-तिहाई से भी ज्यादा है।

अडानी ग्रुप की 7 कंपनियां शेयर मार्केट में लिस्टेड हैं। फरवरी, 2022 में ही सातवीं कंपनी अडानी विल्मर स्टॉक मार्केट में दाखिल हुई है। अब नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज को निफ्टी-50 इंडेक्स में भी शामिल कर लिया है। इस इंडेक्स में पहले ही ग्रुप की एक और कंपनी अडानी पोर्ट एंड सेज लि. शामिल है।

अडानी समूह की कंपनियों के शेयर्स पिछले 2 साल में करीब 1100% की ग्रोथ ले चुके हैं। इसमें अडानी एंटरप्राइजेज 730%, अडानी ट्रांसमिशन 500% से ज्यादा और अडानी पोर्ट 95% से ज्यादा ग्रोथ पा चुके हैं। जबकि इस दौरान BSE सेंसेक्स सिर्फ 40% ही बढ़ा है।शेयर्स में इस ग्रोथ की वजह से कंपनियों का मार्केट कैप कई गुना बढ़ गया है। यह इन कंपनियों के रेवेन्यू से कई गुना ज्यादा है। साथ ही अडानी ग्रुप का निवेश और एक्सपैंशन में खर्च भी कई गुना बढ़ा है।

फ्लैगशिप कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज का कंसॉलिडेटेड कैश फ्लो 14 हजार करोड़ के करीब है जबकि उसका कंसॉलिडेटे कैपिटल खर्च 11650 करोड़ है। यह खर्च ही कंपनी के बढ़ते कर्ज की बड़ी वजह है।

अपनी कंपनियों के आसमान छूते मार्केट कैप के आधार पर ही गौतम अडानी कई निवेशक भी ढूंढने में सफल हो रहे हैं। इसी वर्ष अबू धाबी की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (आईएचसी) ने अडाणी एंटरप्राइजेज में 7700 करोड़ का निवेश किया है।

अडानी समूह पर कर्ज को लेकर इस वक्त का सबसे बड़ा सवाल डिफौल्ट का  है।फिच रेटिंग की सहयोगी क्रेडिटसाइट्स ने एक रिपोर्ट में चेतावनी भी दी है कि हालात बहुत बिगड़े तो कर्ज पर डिफॉल्ट का डर भी हो सकता है। यह खतरा काफी गंभीर लगता है, खासकर यह देखते हुए कि मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज 2020 में ही खुद को नेट डेट फ्री या कर्जमुक्त घोषित कर चुकी है। लेकिन असलियत यह है कि मार्च 22 में भी रिलायंस इंडस्ट्रीज़ पर लगभग तीन लाख करोड़ रुपए का कर्ज था। उधर, अडानी समूह पर कर्ज का आंकड़ा लगभग दो लाख बीस हज़ार करोड़ रुपए का था। क्रेडिटसाइट्स की रिपोर्ट में ज्यादा चिंता इस बात पर दिखती है कि कंपनी में प्रोमोटर ज्यादा पैसा लगाने की बजाय कर्ज के भरोसे कारोबार बढ़ा रहे हैं। अगर अडानी की कम्पनियां डूबीं तो उन लाखों करोड़ों निवेशकों का क्या होगा, जिन्होंने इसके शेयरों में निवेश कर रखा है। 

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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