Monday, August 8, 2022

आंध्र प्रदेश के 5 नौकरशाहों को अवमानना में जेल

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आंध्र प्रदेश में न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच ठनी हुई है। आंध्र प्रदेश के नौकरशाहों को उच्च न्यायालय की ओर से फटकार लगाना आम बात हो गई है। राज्य सरकार की शह पर आन्ध्र प्रदेश के नौकरशाह आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में लापरवाही बरत रहे हैं। आंध्र उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को चार सेवारत आईएएस अधिकारियों और एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी को 10 फरवरी, 2017 के अदालती आदेश की जान बूझकर अवज्ञा’’ करने के लिए अवमानना का दोषी ठहराते हुए अलग-अलग कारावास की सजा सुनायी।

मुख्य सचिव आदित्य नाथ दास सहित तीन अन्य आईएएस अधिकारियों को मामले में छोड़ दिया गया क्योंकि उनके खिलाफ आरोप खारिज कर दिया गया था। इसके पहले आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने जुलाई 21 में दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को अदालत की अवमानना के मामले में एक सप्ताह जेल की सजा सुनाई थी। इससे हड़कंप मच गया था। इसी क्रम में हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए विजयवाड़ा के एसीपी श्रीनिवास राव को उच्च न्यायालय ने एक सप्ताह जेल की सजा सुनाई थी।

दोषी पाए गए आईएएस अधिकारियों में प्रधान वित्त सचिव शमशेर सिंह रावत, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त सचिव रेवू मुत्याला राजू, एसपीएस नेल्लोर जिला कलेक्टर के वी एन चक्रधर बाबू और पूर्व कलेक्टर एम वी शेषगिरि बाबू शामिल हैं। मुत्याला राजू ने पहले एसपीएस नेल्लोर जिले के जिलाधीश के रूप में भी काम किया था। 2017 में तत्कालीन प्रधान सचिव (राजस्व) रहे सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी मनमोहन सिंह को भी मामले में दोषी ठहराया गया।

जस्टिस बट्टू देवानंद ने एसपीएस नेल्लोर जिले की एक किसान तल्लापका सावित्रम्मा द्वारा दायर एक अवमानना याचिका पर यह आदेश सुनाया। रावत और सिंह को एक महीने की कैद की सजा सुनाई गई है जबकि अन्य को दो सप्ताह कैद की सजा सुनाई गई है। इन सभी पर एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। याचिकाकर्ता के वकील सी वाणी रेड्डी के अनुसार, हालांकि जस्टिस देवानंद ने सजा को एक महीने के लिए स्थगित करने का आदेश दिया, ताकि दोषी अपील के लिए जा सकें।

सावित्रम्मा ने 2017 में उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की थी जिसमें कहा गया था कि उनकी तीन एकड़ जमीन राजस्व अधिकारियों ने ले ली और बिना किसी नोटिस या मुआवजे के भुगतान के राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान को आवंटित कर दी। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2016 में राजस्व अधिकारियों ने उन्हें जमीन के लिए मुआवजा देने का वादा किया था और इसकी सूचना लोकायुक्त को भी दी गई थी।

उच्च न्यायालय के जस्टिस ए राजशेखर रेड्डी ने 10 फरवरी, 2017 को याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया था और संबंधित राजस्व अधिकारियों को तीन महीने के भीतर मुआवजा देने का निर्देश दिया था। राजस्व अधिकारियों द्वारा अदालत के आदेश को लागू करने में विफल रहने के बाद 2018 में, सावित्रम्मा ने उच्च न्यायालय में अवमानना का मामला दायर किया।

इसके पहले आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने एसीपी श्रीनिवास राव को एससी और एसटी के एक मामले में चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया था। लेकिन श्रीनिवास राव ने इसका पालन नहीं किया। इस बात से नाराज उच्च न्यायालय ने जुलाई 21 में अदालत की अवमानना मानते हुए एक सप्ताह कारावास की सजा का आदेश जारी किया। हालांकि लोक अभियोजक के अनुरोध पर अदालत ने सजा को एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया।

आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने पिछले सप्ताह दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को अदालत की अवमानना के मामले में एक सप्ताह जेल की सजा सुनाई थी। अधिकारियों ने अप्रैल में 36 कर्मचारियों को नियमित करने के उच्च न्यायालय के आदेश की अनदेखी की थी। दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारी गिरिजा शंकर और चिरंजीवी चौधरी को एक हफ्ते की जेल सुनाई थी। हालांकि, उन्होंने अपनी सेवा की समीक्षा करने और सजा कम करने का अनुरोध किया था। इसके चलते हाईकोर्ट ने दिन भर कोर्ट के हॉल में बैठने का आदेश दिया था।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं।)

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