Wednesday, August 10, 2022

मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों के इस्तीफे बताते हैं बीजेपी की सेहत ठीक नहीं

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आज दोपहर गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया जबकि विधानसभा चुनाव दिसंबर 2022 में होने हैं यानि अभी 15 महीने शेष बचे हैं। विजय रुपानी को साल 2016 में आनंदी बेन पटेल को हटाकर मुख्यमंत्री बनाया गया था। इस्तीफा देने से पहले मुख्यमंत्री विजय रुपानी ने आज शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सदारधाम भवन के वर्चुअल लोकार्पण कार्यक्रम में बतौर मुख्यमंत्री भाग लिया था। 

इससे पहले हाल ही में कर्नाटक में मुख्यमंत्री बीएस येदुरप्पा को मुख्यमंत्री के पद से हटा दिया गया। उन्होंने रोते-रोते इस्तीफा दिया। अब उनकी जगह बसवराज एस बोम्मई को नया मुख्यमंत्री बनाया गया है। इसी तरह उत्तराखंड में छ: महीने में दो मुख्यमंत्री बदले गये। पहले मार्च 2021 में त्रिवेंद्र सिंह रावत को हटाकर तीरथ सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाया गया। फिर 2 जुलाई को तीरथ सिंह रावत को हटाकर पुष्कर सिंह धामी की ताजपोशी कर दी गयी। चुनाव परिणाम आने के बाद सर्बानंद सोनोवाल को असम के मुख्यमंत्री पद से हटाकर उनकी जगह हिमंता विस्वा सरमा को पदासीन कर दिया गया। जबकि विधानसभा चुनाव सर्बानंद सोनोवाल के नेतृत्व में ही लड़ा गया था।

क़ानून व्यवस्था, कोरोना की दूसरी विस्फोटक लहर के बीच सरकार की तानाशाह कार्यशैली, मिसमैनेजमेंट, भाजपा के नाराज़ मंत्रियों का अपने ही सरकार के ख़िलाफ़ विधानसभा में धरने पर बैठने जैसे मामलों के बीच मई-जून महीने में उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की कुर्सी पर भी संकट आया। आरएसएस और भाजपा संगठनों की बैठकों में योगी सरकार के कुछ मंत्रियों को अकेले बुला बुलाकर सरकार का फीडबैक लिया गया। लेकिन पूर्वी उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ और उनके संगठन की मजबूत उपस्थिति और बग़ावत के सुर पकड़ लेने के चलते उनकी कुर्सी बच गयी। यही हाल कमोवेश मध्यप्रदेश का है। वहां भी भाजपा शिवराज सिंह चौहान को हटाना चाहती है लेकिन शिवराज सिंह चौहान माहिर खिलाड़ी हैं। एक समय में वो नरेंद्र मोदी के साथ प्रधानमंत्री के रेस में थे। गुजरात मॉडल के समकक्ष मध्य प्रदेश का कृषि मॉडल भी मीडिया में चर्चा में रहा था।

14 केंद्रीय मंत्रियों की छुट्टी

कोरोना की दूसरी लहर में बुरी तरह नाकाम होने के बाद नरेंद्र मोदी की जगह नितिन गडकरी को प्रधानमंत्री बनाने की मांग सिर्फ़ जनता से ही नहीं विपक्षी दलों की ओर से उठाया गया था। हालांकि अपना गला बचाने के लिये मोदी-शाह की जोड़ी ने 14 केंद्रीय मंत्रियों को बकरा बनाकर कुर्बानी ले लिया। 17 जुलाई को मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुये क़ानून मंत्री रविशकर प्रसाद, आईटी मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक का मोदी मंत्रि मंडल से हटा दिया जाना इस बात की स्वीकारोक्ति थी कि ‘मोदी राज-2’ में देश में क़ानून व्यवस्था, स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से फेल हो चुके हैं।

गौरतलब है कि 5 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने निवास पर गृहमंत्री अमित शाह और संगठन महामंत्री बीएल संतोष के साथ बैठक की थी। उसके बाद से ही तमाम मीडिया चैनलों में भाजपा प्रवक्ताओं द्वारा बयान दिया गया कि प्रधानमंत्री मोदी मंत्रियों के साथ बैठक करके उनके कामकाज की समीक्षा खुद कर रहे हैं, और मंत्रियों से उनके कामकाज का हिसाब किताब ले रहे हैं।

केंद्रीय मंत्रियों के परफार्मेंश के आधार पर उनके बारे में फैसला लेने वाले भाजपा नेताओं और प्रवक्ताओं की उक्त बातों की रोशनी में क़ानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद, स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन और शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल, उर्वरक मंत्री संतोष गंगवार का इस्तीफ़ा इस बात की पुष्टि थी कि मोदी सराकर ने ये मान लिया है कि इन मंत्रियों और इनके मंत्रालयों का परफार्मेंश (प्रदर्शन) निहायत ही खराब रहा है। यानि मोदी के समीक्षा और मूल्यांकन में क़ानून, स्वास्थ, शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण व्यवस्था पूर्व मंत्रियों के नेतृत्व में लगभग फेल हो गया।

कोरोना की दूसरी लहर में जनता को ज़रूरी स्वास्थ्य सेवाओं को प्रदान करने में नाकाम केंद्र सरकार का सारा ठीकरा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन के सिर फोड़ते हुये उनसे स्वास्थ्य मंत्रालय छीन लिया गया। स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे, केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इस्तीफा देने वाले मंत्रियों में सबसे अधिक चौंकाने वाले नामों में क़ानून व आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद और सूचना व प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर का नाम शामिल था। इसके अलावा शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, श्रम मंत्री संतोष गंगवार, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रतनलाल कटारिया, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन राज्य मंत्री प्रताप चंद्र सारंगी, खाद्य एवं आपूर्ति राज्य मंत्री राव साहेब दानवे, केंद्रीय कैबिनेट से शिक्षा राज्य मंत्री संजय धोतरे, महिला और बाल विकास मंत्री देबोश्री चौधरी, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री बाबुल सुप्रियो को जबरिया इस्तीफा दिलवा दिया गया था।

कोरोना की दूसरी लहर में मिला पीड़ा, उपेक्षा और नाउम्मीदी, कमरतोड़ महँगाई, बेरोज़गारी और चीनी मोर्चे पर मुँह छुपा लेने के बीच कहीं नरेंद्र मोदी का मीडिया मेड मैजिक ध्वस्त हो गया है। और मोदी-शाह की राजनीति का बहुत तेजी से पतन हो रहा है। ये मैं नहीं तमाम भाजपा शासित राज्यों में बदले जाते मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों के इस्तीफे से साबित होता है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की टिप्पणी।)

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