Monday, August 8, 2022

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की मौत-6: विमान दुर्घटनाओं में पूरी दुनिया में हुई हैं संदिग्ध मौतें

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तमिलनाडु के नीलगिरि जिले के कुन्नूर में वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों को ले जा रहा भारतीय वायु सेना का एक हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया और ये हेलिकॉप्टर था Mi-17V5। इस हादसे में सीडीएस बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत सहित इसमें मौजूद 11 अन्य लोगों की मौत हो गई। इस हादसे ने उन सभी घटनाओं की यादें ताजा कर दी हैं, जिनमें वैज्ञानिक डॉक्टर होमी जहांगीर भाभा, राजनेता वाई एस राजशेखर रेड्डी, संजय गांधी, माधव राव सिंधिया, जीएमसी बाल योगी, एस मोहन कुमारमंगलम, ओपी जिंदल, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री दोरजी खांडू जैसे लोगों को जान गंवानी पड़ी। लेकिन केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया भर के देशों के राजनेताओं की विमान हादसे में संदिग्ध मौतें हुई हैं और आज भी उनकी मौतों को लेकर विवाद जारी है।

इक्वेडोर के राष्ट्रपति जैमी रॉलडोस अगुलेरा, 24 मई 1981 को उस समय मारे गए जब उनका विमान बीच सुपर किंग एयर 200 एफ़एई-723 ख़राब मौसम के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गया। पनामा के राजनेता जनरल ओमर तोरिजोस 31 जुलाई, 1981 को उस समय मारे गए जब पनामा की वायुसेना का विमान संदिग्ध परिस्थिति में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। दोनों मामलों में सीआईए के हाथ की बात सामने आई थी।

पोलैंड के राष्ट्रपति लेक केज़िंस्की की ख़राब मौसम के कारण हुई विमान दुर्घटना में 10 अप्रैल 2010 को मृत्यु हो गई। उनके साथ उस विमान दुर्घटना में कई वरिष्ठ अधिकारी भी मारे गए। पहले भी ऐसी विमान दुर्घटनाएं हुई हैं जिनमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण व्यक्ति मारे जा चुके हैं।

स्वीडन के प्रधानमंत्री अर्विड लिंडमैन नौ दिसंबर, 1936 को उस वक़्त मारे गए जब उनका विमान डग्लस डीसी-2 लंदन से उड़ान भर रहा था। तभी गहरे कोहरे के कारण वह क्राइडेन में मकानों से जा टकराया।

पोलैंड के प्रधानमंत्री व्लैडिस्लॉ सिकोर्स्की का विमान बी-24-सी लिब्रेटर जिबराल्टर से उड़ान भरने के थोड़ी देर बाद भूमध्यसागर में चार जुलाई 1943 को दुर्घटना ग्रस्त हो गया और निर्वासन की हालत में उनकी मृत्यु हो गयी थी।

मध्य अफ़्रीकी गणराज्य के राष्ट्रपति बारथेल्मी बोगांडा 29 मार्च 1959 को उस समय मारे गए जब उड़ान के दौरान उनका विमान आसमान में ही अचानक फट पड़ा। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव डैग हैम्मार्क्सजोल्ड 17 सितंबर, 1961 में उस समय मारे गए जब उनका विमान डग्लस डीसी-6बी ज़ाम्बिया के एक जंगर में जा गिरा।

इराक़ी राष्ट्रपति अब्दुस्सलाम आरिफ़ 13 अप्रैल 1966 को उस समय मारे गए जब उनका हेलिकॉप्टर एक तूफ़ान में फंसकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

यूगोस्लाविया के प्रधानमंत्री बिजेडिक 18 जनवरी 1977 को उस समय मारे गए जब उनका विमान गेट्स लरजेट बर्फ़ानी तूफ़ान में फंस कर एक पहाड़ से जा टकराया।

मोज़ांबिक के राष्ट्रपति समोरा की 19 अक्तूबर1986 को उस समय मृत्यु हो गई जब उनका विमान टूपोलेव-134 ए एक तूफ़ान में घिरने के बाद मपाटू पर उतारने की कोशिश में दुर्घटना ग्रस्त हो गया।

रवांडा के राष्ट्रपति हैबियरमाना और बुरुंडी के राष्ट्रपित एनटैरयामिरा छह अप्रैल 1994 को उस वक़्त मारे गए जब उनके विमान डसॉल्ट फ़ैकन 50 9एक्सआर-एनएन को किगाली एयरपोर्ट पर पहुंचने से पहले ही मिसाइल का निशाना बन गया।

मेसिडोनियाई राष्ट्रपति बोरिस ट्रॉजकोस्वकी 26 फ़रवरी2004 को उस वक़्त मारे गए जब उनका विमान बीचक्राफ़्ट सुपर किंग एयर 200 ज़ेड3-बीएबी ख़राब मौसम में मॉस्टर पर उतरने की कोशिश में दुर्घटना ग्रस्त हो गया था।

सूडानी राष्ट्रपति जॉन गारंग उस समय मारे गए जब 30 जुलाई 2005 को दक्षिणी सूडान में उनका हेलिकॉप्टर ख़राब मौसम के कारण एक पहाड़ से जा टकराया।

इसी तरह भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के साथ आखिरी बड़ी विमान दुर्घटना 1993 में हुई थी। पूर्वी कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल जमील महमूद की भूटान में भारतीय वायुसेना के एमआई-8 हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई थी। मृतकों में उनकी पत्नी भी शामिल थीं।

22 सितम्बर 2004 को खराब मौसम के चलते हेलिकॉप्टर उतरने के कुछ मिनट पहले क्रैश हो गया था। हादसे में मेघालय के मंत्री साइप्रियन आर संगमा और दो विधायक अर्धेंदु चौधरी और हेल्टोन मराक समेत कुल दस लोग मारे गए थे। पवन हंस नाम के इस हेलिकॉप्टर को सिर्फ 25 मिनट की उड़ान भरनी थी। गुवाहाटी से शिलांग जाना था, लेकिन मेघालय से करीब 40 किलोमीटर दूर किरदेम कोलाई इलाके में हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया।

19 सितम्बर 1965 की बात है, हिन्दुस्तान और पाकिस्तान का युद्ध चल रहा था। गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री बलवंत राय मेहता अन्य चार लोगों के साथ हेलिकॉप्टर में सवार थे। इलाका था कच्छ का रण। यानी बैटल ग्राउंड के आसपास ही। मीठापुर से उड़ान भरने के कुछ देर बाद जब मेहता का हेलिकॉप्टर कच्छ के रनवे के आसपास पहुंचा तो पाकिस्तानी फाइटर प्लेन ने उसे इंटरसेप्ट किया और मार गिराया। सभी पांच लोग मारे गए। पाकिस्तानी फाइटर प्लेन चलाने वाले कैश हुसैन ने बाद में इसके लिए माफी मांगी थी।

कांग्रेस के नेता रहे माधवराव सिंधिया 30 सितंबर 2001 को उत्तरप्रदेश के मैनपुरी जिले की भोगांव तहसील के पास मोता में एक विमान हादसे में जान गंवा बैठे थे। सिंधिया एक सभा को संबोधित करने के लिए कानपुर जा रहे थे। विमान में उनके सहित सात लोग थे। इन लोगों को लेकर जिंदल ग्रुप के 10 सीटों वाले एक चार्टर्ड विमान सेस्ना सी-90 ने नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे से उड़ान भरी थी। आगरा से 85 किमी दूर ये विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और इसमें सवार सभी लोग मारे गए।

3 सितंबर 2009 को आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी जिस हेलिकॉप्टर में सवार थे, वह चित्तूर जिले के जंगल में क्रैश हो गया था। यह यह अमेरिकन टेक्नोलॉजी पर आधारित डबल इंजन वाला बेल 430 चॉपर था। वाईएसआर का शव 27 घंटे बाद मिला था।

मई 2011 में अरूणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री दोरजी खांडू और चार अन्य लोगों के साथ लापता हुए हेलिकॉप्टर का मलबा मिला था। खांडू का चार सीटों और एक इंजन वाला पवन हंस हेलिकॉप्टर एएस-बी350-बी3 30 अप्रैल को तवांग से सुबह नौ बज कर 56 मिनट पर उड़ान भरने के 20 मिनट बाद से ही लापता था।

23 जून 1980 को भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी की मौत भी प्लेन क्रैश में हुई थी। उनकी मौत नई दिल्ली स्थित सफदरजंग एयरपोर्ट के करीब हुई थी। चौंकाने वाली बात यह थी कि वे कहीं सफर पर नहीं निकले थे बल्कि वे अपना प्राइवेट प्लेन खुद उड़ा रहे थे। वे अच्छे पायलट थे। घटना के बाद पता चला कि वे प्लेन से किसी खतरनाक करतब को अंजाम दे रहे थे।

31 मई 1973 को कांग्रेस लीडर मोहन कुमार मंगलम की मौत भी प्लेन क्रैश में हुई थी। वे इंडियन एयरलाइंस 440 नाम के प्लेन पर सवार थे। उनके मृत शरीर को उनके पार्कर पेन से पहचाना गया था।

3 मार्च 2002 को पूर्व लोकसभा अध्यक्ष जीएमसी बालयोगी का आंध्र प्रदेश के पश्चिमी गोदावरी जिले में कैकालुर नाम के स्थान पर हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। बेल 206 एक निजी हेलिकॉप्टर था जिसमें बालयोगी, उनके अंगरक्षक और एक सहायक सवार थे। हेलिकॉप्टर ने सुबह 7 बजकर 45 मिनट पर भीमावरम जिले से उड़ान भरी और कुछ ही देर में इसमें तकनीकी खराबी आ गई थी। हादसे में गंभीर रूप से घायल बालयोगी को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

1 अप्रैल 2005 को एक हवाई हादसे में इस्पात व्यवसायी और हरियाणा के बिजली मंत्री ओपी जिंदल मारे गए थे। इस हादसे में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री बंशीलाल के बेटे सुरेंद्र सिंह और पायलट की भी मौत हो गई थी। उनका हेलिकॉप्टर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। किंग कोबरा नाम का ये हेलिकॉप्टर जिंदल समूह ने कुछ ही माह पहले लिया था।

दरअसल आजादी के बाद से अ‍ब तक कामर्शियल विमान हादसों में कुल 2,173 लोगों की जान जा चुकी है। यही नहीं इन हादसों में से 80 फीसदी मौतों में पायलट की गलती बड़ी वजह बनकर सामने आई है। इसमें पायलट के एक्‍शन और फैसले दोनों ही शामिल हो सकते हैं। ये आंकड़ा एविएशन सेफ्टी नेटवर्क की ओर से जारी आंकड़ों से सामने आया है। एविएशन सेफ्टी नेटवर्क एक निजी कंपनी है जो हवाई हादसों, विमानों के अपहरण या हाइजैक जैसी घटनाओं पर नजर रखती है। एविएशन सेफ्टी नेटवर्क के विश्‍लेषण में सिर्फ पैसेंजर उड़ानों और उन हादसों को लिया गया है, जिसमें कम से कम एक यात्री या एक पायलट की मौत हुई हो। इस विश्लेषण में चार्टर्ड उड़ानों, प्रशिक्षित उड़ानों, कार्गो उड़ानों और बिना यात्री वाली उड़ानों को शामिल नहीं किया गया है।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय के पास से मिले आंकड़ों के मुताबिक 1995-96 से लेकर अब तक हवाई अड्डों पर यात्रियों की संख्या में 10 गुना बढ़ोत्तरी हुई है। हालांकि पहले की तुलना में विमान हादसे काफी कम हो गए हैं। 2011-2020 का समय हवाई हादसों को लेकर आजादी के बाद का सबसे बेहतर समय माना जाता है। इस दौरान केवल कोझिकोड हवाईअड्डे पर हुए यात्री विमान हादसे का शिकार हुआ था। मई 2010 में एक एयर इंडिया एक्सप्रेस का मंगलौर के हवाई अड्डे पर हादसा हुआ था, जिसमें 158 लोगों की मौत हुई थी।

समय के साथ एयरक्राफ्ट तकनीक काफी सुरक्षित हुई है। 1951 से लेकर 1980 तक के 30 सालों में कुल कुल 34 विमान हादसे हुए थे। इन विमान हादसों की जांच से पता चलता है कि इनमें से 59 फीसदी हादसे यानि लगभग 20 हादसे पायलट की गलतियों की वजह से हुए थे। वर्ष 1981-2010 तक कुल 13 विमान हादसे हुए, जिनमें से 12 या 92 फीसदी हादसे पायलट की गलतियों की वजह से हुए। भारत में आजादी के बाद से अब तक हुए विमान हादसों में हुई कुल 2,173 मौतों में से 1,740 मौतें पायलट की गलती के कारण हुई हैं।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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