Friday, August 12, 2022

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो-2: ड्रग्स तस्करी के एक मामले में 13 साल की सजा काट रहे हैं एनसीबी के जोनल डायरेक्टर साजी मोहन

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नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) द्वारा तीन अक्टूबर को मुंबई के तट के पास, गोवा जा रहे एक क्रूज़ पोत पर छापेमारी के बाद शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान और कुछ अन्य लोगों की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में 25 करोड़ रूपये की वसूली के प्रयास के आरोप लग रहे हैं। एनसीबी अधिकारियों पर ऐसे आरोप पहले से लगते रहे हैं। चंडीगढ़ नारकोटिस विभाग में जोनल डायरेक्टर रहे पूर्व आईपीएस अधिकारी साजी मोहन को ड्रग्स तस्करी के मामले में वर्ष 2013 में 13 साल कैद की सजा सुनाई गई थी। 1995 बैच के जम्मू-कश्मीर कैडर के इस पूर्व आईपीएस अधिकारी को जनवरी 2009 में मुंबई के ओशिवरा इलाके में 12 किलो हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया गया था। साजी मोहन अभी जेल में ही हैं।

जम्मू-कश्मीर में कई जिलों में एसपी के रूप में तैनात रहे साजी मोहन का स्थानांतरण 2007 में चंडीगढ़ स्थित नारकोटिस विभाग में जोनल डायरेक्टर के रूप में हुआ था। इस दौरान उसने कई ड्रग्स रैकेट का भंडाफोड़ किया था। पूछताछ के बाद खुलासा हुआ कि साजी मोहन जो ड्रग्स बरामद करता था उसे सरकारी आंकड़ों में कम कर दिखाता था। धीरे-धीरे वह इसे अपने पास इकट्ठा करता रहा और फिर सुनियोजित तरीके से हेरोइन के धंधे का रैकेट चलाने लगा। हरियाणा पुलिस के एक कांस्टेबल की हेरोइन के साथ गिरफ्तारी और उसकी निशानदेही के बाद एटीएस ने मुंबई में माल बेचने के लिए गए साजी मोहन को गिरफ्तार किया गया था।

हेरोइन तस्करी के मामले में आईपीएस साजी मोहन ने एटीएस की पूछताछ में कई अहम खुलासे किए थे। साजी मोहन ने एटीएस को बताया था कि वह तस्करों से बरामद हेरोइन को बाजार में बेच देता था और उसकी जगह पर चूना या फिर पाउडर रख देता था ताकि इससे किसी को शक न हो कि हेरोइन वहां से कम हो रही है। साजी मोहन पर हेरोइन तस्करी का आरोप था।इस गिरफ्तारी के बाद एक और खुलासा हुआ था, जिसमें साजी मोहन ने मालखाने से 13 लाख 81 हजार रुपये का गबन किया था। इसके बाद साजी मोहन के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी गई। सेक्टर-3 थाना पुलिस ने साजी मोहन व एक अन्य के खिलाफ 420 समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया था।

मार्च 2009 में मुंबई एटीएस ने हेरोइन तस्करी और बेचने के आरोप में एनसीबी के तत्कालीन जोनल डायरेक्टर और 1995 बैच के आईपीएस साजी मोहन को गिरफ्तार कर जांच शुरू की थी । महाराष्ट्र के एटीएस ने पूर्व आईपीएस अधिकारी के कब्जे से 12 किलोग्राम शुद्ध हेरोइन जब्त किया था। मादक पदार्थ को जम्मू-कश्मीर सीमा पर कथित तौर पर तस्करी के जरिये लाया गया था। एटीएस के अनुसार, साजी मोहन चंडीगढ़ में एनसीबी के जोनल निदेशक रहते नारकोटिक्स ब्यूरो द्वारा जब्त नशीले पदार्थ में से 50 फीसदी की चोरी की थी और उन्हें मुंबई सहित अन्य शहरों में ड्रग माफिया को बेचा था। उसके पकड़े जाने के बाद एनसीबी ने अपने मालखाने का रिकार्ड चेक किया था। चेकिंग के दौरान 15 मई, 2008 को जम्मू-कश्मीर बार्डर से जब्त की गई 60 किलो हेरोइन की जगह मालखाने में महज 30 किलो हेरोइन मिली थी। 30 किलो हेरोइन कम होने की जांच के दौरान पता चला कि साजी मोहन ने उक्त हेरोइन को अन्य आरोपियों के साथ मिलकर बेच दिया था।

आरोप के मुताबिक, इसमें से 10 किलो हेरोइन साजी मोहन ने तस्कर नसीब चंद को दे दी थी। एनसीबी ने साजी मोहन समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था। एटीएस को साजी मोहन ने बताया था कि वह तस्करों से बरामद हेरोइन को बाजार में बेच देता था और उसकी जगह पर चूना या पाउडर रख देता था। गबन किए गए रुपये साजी मोहन को पीयू स्थित बैंक में जमा करवाने के लिए दिए गए थे, लेकिन उसने रुपये जमा करवाने के बजाय गाड़ी खरीद ली थी। इसके बाद एटीएस ने साजी मोहन के करीबी रहे सारे पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ चंडीगढ़ के नारकोटिक्स ब्यूरो के कर्मचारियों से भी सबूत जुटाए थे ।

एटीएस ने उसके हर बयान की पुष्टि के लिए एनसीबी के अधिकारियों से भी पूछताछ की थी। अदालत ने साजी मोहन और एक अन्य साथी पर वर्ष 2011 में भ्रष्टाचार की साजिश रचने और गबन के आरोप तय किए थे। करीब चार साल बाद जम्मू कैडर के 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी एवं पूर्व एनसीबी जोनल डायरेक्टर साजी मोहन को जिला अदालत ने एनडीपीएस एक्ट के मामले में दोषी करार दिया था। मालखाने से रुपये निकालने के मामले में वर्ष 2013 में जिला अदालत साजी मोहन को 13 साल की सजा और तीन लाख रुपये जुर्माना कर चुकी है।

मुंबई की एक विशेष अदालत ने पूर्व आईपीएस अधिकारी साजी मोहन को मादक पदार्थ रखने और उसकी तस्करी का दोषी ठहराते हुए 15 साल कैद की सजा सुनाई थी । एनडीपीएस विशेष अदालत ने 2009 के इस मामले में हरियाणा पुलिस के कांस्टेबल राजेश कुमार कटारिया को भी 10 साल कैद की सजा सुनाई थी। तत्कालीन नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के जोनल निदेशक और ईडी के संयुक्त निदेशक साजी मोहन और कटारिया को नशीला पदार्थ रखने और उसकी तस्करी की साजिश में गिरफ्तार किया गया था। कांस्टेबल कटारिया उस वक्त साजी मोहन का ड्राइवर था।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी)द्वारा तीन अक्टूबर को मुंबई के तट के पास, गोवा जा रहे एक क्रूज़ पोत पर छापेमारी के बाद शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान और कुछ अन्य लोगों को गिरफ्तारी के बाद इस मामले में 25करोड़ रूपये की वसूली के प्रयास के आरोप लग रहे हैं। एक ओर अडानी के मुम्ब्रा पोर्ट से 21 हजार करोड़ मूल्य के 30 टन ड्रग्स(नशीले पदार्थ) पकड़े जाने पर अभी तक न तो पोर्ट के मालिक गौतम अडानी से न ही मुब्रा पोर्ट पर तैनात उनकी कम्पनी के आला अधिकारियों से एनसीबी या देश की किसी जांच एजेन्सी ने औपचारिक पूछताछ की है। वहीं आर्यन खान के पास से एक ग्राम ड्रग्स तक की बरामदगी न होने के बावजूद तीन हफ्तों से बॉम्बे के आर्थर रोड जेल में निरुद्ध करके रखा गया है और ड्रग पैडलर तक का आरोप बिना किसी सबूत के एनसीबी अधिकारियों द्वारा लगाया जा रहा है। दरअसल बॉलीवुड वसूली का सॉफ्ट टारगेट है जहाँ दाउद, रविपुजारी और अन्य माफिया तत्वों द्वारा जबरन वसूली की जाती है तो भला एनसीबी कैसे पीछे रहती। एनसीबी का नाम अब नारकोटिक्स कंट्रोल (वसूली) ब्यूरो बनता जा रहा है।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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