Monday, August 8, 2022

तो माना जाए कि हरियाणा ‘हिंदू प्रदेश’ बन गया है!

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जैसा कि हम सभी पिछले कुछ हफ़्तों से देख रहे हैं हरियाणा के गुडगांव शहर के विभिन्न सेक्टरों में हर शुक्रवार की नमाज को लेकर मुस्लिम नमाजियों से कई गुना उत्साह विभिन्न हिन्दुत्ववादी गुटों की होने लगी है।

यह सिलसिला अब सरकारी स्तर तक भी पहुँच गया है। अब से सभी सार्वजनिक स्थलों पर नमाज पढ़ने की पाबंदी का फरमान किसी और के द्वारा नहीं बल्कि खुद राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के द्वारा कर दिया गया है। कल शुक्रवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने साफ़-साफ़ शब्दों में घोषणा कर दी है कि खुले में नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती है, और इसे “बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।” इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि यदि कुछ स्थलों को पूर्व में नमाज पढ़ने के लिए आरक्षित किया गया था तो उसे भी वापस ले लिया गया है।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, ये बातें कल शुक्रवार को मुख्यमंत्री खट्टर ने गुरुग्राम मेट्रोपोलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (जीएमडीए) की बैठक की अध्यक्षता के दौरान गुडगांव के पीडब्ल्यूडी रेस्टहाउस में कहीं।

जब उनसे सवाल किया गया कि पिछले कई हफ्तों से गुडगाँव में शुक्रवार की प्रार्थना में व्यवधान डाला जा रहा है तो खट्टर का कहना था, “हमने पुलिस और उपायुक्त को इस मामले को सुलझाने के लिए कहा है। इसे सुलझाने के लिए, हर किसी को अपने-अपने स्थानों पर प्रार्थना करनी चाहिए, कुछ लोग नमाज पढ़ते हैं, कुछ पाठ करते हैं, तो कुछ पूजा करते हैं, हमें इस सबसे कोई समस्या नहीं है। इसके अलावा धार्मिक स्थान भी तो इसी उद्येश्य के लिए बने हैं, ताकि वहां पर पूजा प्रार्थना की जा सके”।

मुख्यमंत्री जी का कहना था कि समुदाय से बातचीत कर इसका सौहार्द्रपूर्ण तरीके से समाधान निकाल लिया जायेगा। खट्टर ने कहा, “उनका कहना है कि उनके पास कई स्थान हैं जहाँ पर उन्हें नमाज की इजाजत मिलनी चाहिए। उनकी कुछ प्रॉपर्टी या जो वक्फ़ बोर्ड के तहत थी पर अतिक्रमण हो रखा है….ये सब उन्हें कैसे मिले इस पर चर्चा करेंगे। या फिर वे चाहें तो अपने घरों में नमाज अदा कर सकते हैं। लेकिन खुले में नमाज पढ़ना और इस प्रकार का तनाव, ये हम बने रहने की इजाजत नहीं दे सकते।”

उनका कहना था, “पूर्व में बातचीत के बाद इस बारे में फैसला लिया गया था, लेकिन जिन स्थानों पर फैसला लिया गया था उसे भी हम वापस ले रहे हैं। अब बातचीत बिल्कुल नए दृष्टिकोण से फिर से शुरू होगी। हर किसी को सुविधायें चाहिए। किसी के भी अधिकार का अतिक्रमण नहीं होना चाहिए, लेकिन किसी को मजबूर भी नहीं करना चाहिए।”

मुख्यमंत्री की बैठक से कुछ घंटे पहले ही सेक्टर 37 पुलिस स्टेशन के बाहर वाले इलाके में कुछ स्थानीय लोगों और हिंदुत्व संगठन के समर्थकों ने नमाज के लिए निर्धारित स्थान पर घेराबंदी कर ली थी। पुलिसिया बन्दोबस्त के बीच इन लोगों ने इस मैदान में अपने ट्रक और गाड़ियों की पार्किंग कर दी। जैसे ही नमाजियों ने आना शुरू किया, इनकी ओर से ‘जय श्री राम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे शुरू कर दिए गये। इससे पहले भी नमाज के लिए निर्धारित स्थलों पर ये हंगामा कर चुके हैं। इंडियन एक्सप्रेस के रिपोर्टर के मुताबिक खांडसा, मोहम्मदपुर झारसा, बेगमपुर खटोला और आस पास के गाँवों के स्थानीय लोगों ने स्थल को छोड़कर जाने के लिए कहा। सेक्टर 37 के अलावा सेक्टर 29 और सेक्टर 44 में भी इन समूहों ने नमाज में बाधा पहुंचाई। इनमें वे लोग भी शामिल बताये जा रहे हैं जिन्हें 29 अक्टूबर को शुक्रवार की नमाज में विघ्न डालने के लिए गिरफ्तार किया गया था।

इससे पहले शुक्रवार के ही दिन इन तत्वों के द्वारा सेक्टर 37 के नमाज के लिए सरकार द्वारा निर्धारित स्थल पर 26/11 मुंबई आतंकी हमले, सेक्टर 12 ए में गोवर्धन पूजा के नाम पर अपने पीछे गोबर का पहाड़ छोड़ देने से लेकर क्रिकेट मैच खेलने और भजन कीर्तन का आयोजन किया गया है।

इस बार यह आयोजन बुधवार को 29 अक्टूबर को हुए हंगामे में गिरफ्तार किये गए एक शख्स अमित हिन्दू के अनुसार, “सेक्टर 29 में भी कुछ लोग नमाज पढ़ने आ गए थे। हम पार्क में गए और उनसे विनम्रता से वहां से चले जाने के लिए कहा।” वहीं सेक्टर 37 पुलिस स्टेशन के बाहर निर्धारित नमाज के लिए सभा स्थल पर इस बार शुक्रवार को सीडीएस बिपिन रावत और अन्य सेना के अधिकारियों की बुधवार को हुई मौत पर श्रद्धांजलि अर्पित करने का कार्यक्रम रख दिया गया।

ये तमाम घटनाएं पिछले दो महीनों से गुड़गांव के विभिन्न इलाकों में हो रही हैं, और पुलिस प्रशासन और सरकार ने नमाज के लिए निर्धारित स्थलों को एक के बाद एक कम करने का क्रम बना रखा था। इन हिन्दुत्ववादी संगठनों का अब एकमात्र लक्ष्य शुक्रवार की नमाज को किसी भी सूरत में न होने देने का बन गया है, जिसे मुख्यमंत्री खट्टर ने भी कल अपनी बातचीत में स्वीकारा है और हिन्दू-मुस्लिम तनाव को खत्म करने के लिए उनके पास एकमात्र समझ यही बनी कि नमाज घर पर पढ़ी जाये, या जब उनकी जमीनों को कानूनन सरकार छुड़वा लेगी, उसके बाद वहां पर मस्जिद बनाकर मुसलमान सार्वजनिक तौर पर नमाज पढ़ सकते हैं।

तो इसका मतलब यह है कि हरियाणा में अब सिर्फ मुसलमानों के लिए ही सार्वजनिक स्थानों पर प्रार्थना करने पर रोक लग जायेगी, या सभी धर्मों के लोगों को पूजा-पाठ, धार्मिक जुलूस, कांवड़ यात्रा, गुरु नानक जयंती, मुहर्रम और कई दिनों तक अखंड पाठ या माता का जगराता करने से प्रतिबंधित कर दिया जा रहा है।

देखने में तो खट्टर साहब की बात बेहद धर्म निरपेक्ष लगती है कि जिसे भी अपने धर्म का पालन करना है वह अपने घर पर या निर्दिष्ट स्थल पर ही करे। सरकार और राज्य का धर्म से कोई नाता नहीं रहेगा और सार्वजनिक स्थलों पर इस प्रकार के प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी जाएगी।

किंतु लगता नहीं है कि ऐसी पाबंदी मुसलमानों के अलावा किसी भी और धर्म पर लागू की जाने वाली है। क्योंकि जो दल खुद धर्म के नाम पर ही सत्ता को हासिल कर पाने में सफल रहा हो, जिसके एक राज्य में तो कांवड़ियों के लिए सरकारी खर्च पर हेलिकॉप्टर से पुलिस के आला अफसर द्वारा फूल बरसाए जाते हों। उपलब्धियों के नाम पर अयोध्या में हर साल रिकॉर्ड तोड़ दिए जलाने, राम मंदिर के निर्माण, मथुरा और काशी में दूसरे धर्म के बरखिलाफ मन्दिर बनाने की घोषणाएं हर रोज की जाती हों, उसके लिए ऐसा सोच पाना भी नामुमकिन है।

तो क्या हरियाणा के पास भारतीय संविधान नहीं है या यह एक घोषित हिन्दू प्रदेश बन चुका है? जिस प्रकार से एक-एक करके मुस्लिमों के लिए सार्वजनिक स्थलों पर प्रार्थना की जगहों को कम किया जा रहा है, पिछले दो महीने से हर बार शुक्रवार के दिन सुबह से ही अल्पसंख्यक समुदाय को किसी न किसी बहाने से नमाज न अदा करने और प्रार्थना स्थलों से खदेड़ने और यदि उलझते हैं तो इसे सांप्रदायिक रंग देकर उनके खिलाफ व्यापक संभावित हिंसा को अंजाम दिया जा सकता है, उसे देखते हुए और मुख्यमंत्री के वक्तव्य के साथ यदि मिलान किया जाये तो स्पष्ट होता है कि यह सब छिटपुट गुटों का किया धरा नहीं है, बल्कि इसके मूल में ही सियासी साजिश है।

चूँकि आज से किसान एक साल बाद अपने-अपने घरों को लौट रहे हैं, एक बार फिर से खुलकर खेलने का मौका बन गया है। क्या गुड़गांव के नागरिकों को जो खुद को शायद भारत में रहते हुए भी अमेरिकी और यूरोपीय ख़याल का कहीं अधिक समझते हैं, ब्लैक लाइव मैटर और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उनकी समझ कस्बाई और ग्रामीण मानसिकता से खुद को बेहद उन्नत समझते हैं, अपने ही आंगन में यह सब होते देख भी अनदेखा करना चाहिए?

यह एक अजीब विरोधाभासी विडंबना है कि हमारे भारतीय मानस में जहाँ एक तरफ आधुनिकता का प्रचंड बोलबाला है वहीं लगे हाथ हम मध्यवर्गीय सोच में विराथू और गोडसे के उपासकों को भी पाते हैं। यह भष्मासुरी सोच एक ही सांस में आमिर खान की पत्नी के देश में घुटन होने की बात कहने पर एंटी नेशनल और पाकिस्तान चले जाने के लिए चीखने चिल्लाने पर आतुर हो जाती है और आज 6 लाख भारतीयों के चुपचाप विदेशी नागरिक बन जाने पर पूरी तरह से खामोश है। ये हम कैसे भारतीय बन चुके हैं? आज इस समझ की पड़ताल सबसे अधिक आवश्यक है, यदि हमें चीन तो रहने ही दें, कल को बांग्लादेश के मुकाबले भी खुद को खड़ा देखना है तो।

(रविंद्र सिंह पटवाल लेखक हैं और जनचौक से जुड़े हुए हैं।)

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