Thursday, October 6, 2022

ब्लॉक से लेकर संसद तक गूंजी किसानों की आवाज

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केंद्र सरकार द्वारा किसानों के बरअक्श कार्पोरेट को सबल बनाने वाले अध्यादेशों के खिलाफ़ कल आंदोलित किसानों ने ब्लॉक से लेकर संसद तक हल्ला बोला। एक तरफ बेरोजगार युवा रोजगार सप्ताह मनाते हुए सरकार को घेर रहे हैं, तो दूसरी ओर किसान लगातार सड़कों पर आंदोलनरत हैं। इसी कड़ी में कल सासाराम, इलाहाबाद, हरियाणा और दिल्ली समेत कई राज्यों में कई जगहों पर जबर्दस्त विरोध-प्रदर्शन देखने को मिला। बड़ी बात ये है कि इन विरोध प्रदर्शनों में महिला किसानों और महिला किसान मजदूरों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। 

अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा संगठन के किसानों ने ‘कार्पोरेट भगाओ, किसान बचाओ’ नारे के साथ देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन किया। भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच दिल्ली के जंतर-मंतर और पार्लियामेंट स्ट्रीट से किसानों ने संसद तक अपनी आवाज़ पहुंचाई।   

सासाराम में निकाली गई विरोध रैली

हदबंदी, बटाई, बेनामी, बिहार सरकार सहित भूमि सुधार के अंतर्गत आने वाली जमीन और जल, जंगल, जमीन पर अपना हक़ जताने रोहतास के मैदानी एवं कैमूर के पठारी वन क्षेत्र से आए हजारों की संख्या में भूमिहीन किसानों, दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों, आदिवासियों ने अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा के बैनर तले संगठित होकर कल 14 जून 2020 को समाहरणालय रोहतास का घेराव किया। इसके बाद दोपहर 12:00 बजे रेलवे मैदान सासाराम से जुलूस की शक्ल में कतारबध हो पुराने जीटी रोड होते हुए कचहरी मोड़ से टर्न होकर किसानों-मजदूरों का काफिला समाहरणालय गेट पर पहुंचकर सभा के रूप में तब्दील हो गया प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ के करण जी टी रोड पर आवागमन ठप हो गया। 

सभा की अध्यक्षता संगठन के कार्यकारी जिलाध्यक्ष कॉमरेड संजय कुमार ने किया। सभा को संबोधित करते हुए कॉमरेड संजय कुमार ने कहा कि किसानों मजदूरों की यह जुझारू फौज जिला प्रशासन से भीख नहीं बल्कि अपना हक़ लेने के लिए जन संघर्षों का बिगुल फूँकने आई है। वहीं संगठन के जिला संयुक्त सचिव कामरेड राजेश पासवान ने जिले में प्रवासी मजदूरों को सरकार व प्रशासन द्वारा काम व रोजगार मुहैया नहीं कराने का मसला उठाते हुए बंद पड़े रोहतास उद्योग समूह सहित अन्य उद्योगों को पुनर्जीवित करने की मांग की।

जबकि संगठन के जिला अध्यक्ष कामरेड शंकर सिंह एवं जिला सचिव कामरेड अयोध्या राम और भदारा भूमि संघर्ष के कार्यकर्ताओं के विरुद्ध अंचल अधिकारी नौहटा द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी   संख्या 49/2020 बिना शर्त वापस लेने की मांग की। किसानों, मजदूरों को अपना समर्थन देते हुए डॉ. बीआर अंबेडकर विचार मंच के संयोजक राजवंश पासवान एवं जनवादी ऑटो चालक मजदूर संघ के महासचिव दिनेश कुमार सिंह ने आंदोलनकारी किसानों एवं मजदूरों की न्याय पूर्ण मांग को तत्काल पूरा करने की जिला प्रशासन से मांग की है।

सभा को संबोधित करते हुए संगठन के जिला सचिव कामरेड अयोध्या राम ने कहा कि आज के समय में राज्य व देश मे कायम फासीवादी शासन के अंतर्गत भूमि सुधार को लागू करने की मांग को लेकर किए जाने वाले आंदोलन को अपराध की संज्ञा दी जा रही है। भदारा भूमि संघर्ष के संदर्भ में कथित सुशासन एवं सामाजिक न्याय का असली चेहरा सामने आ गया है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों एवं जंगल वासियों को जाने एवं जंगलवासियों को उजाड़ने एवं जल, जंगल, जमीन के हक से बलात वंचित करने की किसी भी कोशिश को हम कामयाब नहीं होने देंगे। जिला प्रशासन हमारी 13 सूत्रीय मांगों पर गौर नहीं किया तो रोहतास की धरती पर एक नहीं सैकड़ों भदारा जैसा भूमि आंदोलन खड़े होंगे।

नौजवान भारत सभा के नेता संजय कुमार क्रांति एवं रवि ठाकुर, एआईकेएमएस के जिला कमेटी के उपाध्यक्ष राजेश पासवान, उपाध्यक्ष राम बली सिंह, अक्षयबर साव, सतेंद्र राम, सुखारी बनवाशी, चंदा देवी, कृष्णा चेरो, उदयऊ राव, रामनाथ उराव, कामरेड सत्येंद्र सिंह, इंतियाज, पीडीएसयू के जिला संयोजक मिशाल शेखर आदि मुख्य थे। प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को मांगों के संबंध में ज्ञापन सौंपी एवं वार्ता किया ।

तहसील बारा, प्रयागराज में ब्लॉक का घेराव किया गया 

इलाहाबाद एआईकेएमएस कमेटी के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों, बालू खनन, पत्थर खनन और खेत मजदूरों ने कल केन्द्र सरकार से मांग की कि वह खेती के तीन अध्यादेशों को वापस ले, 2020 का नया बिजली कानून वापस ले और पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतें वापस ले। मुट्ठी बांधे हुए, चेहरे पर मास्क लगाए, हाथों में झंडे, बैनर और प्लेकार्ड लिए हुए सैकड़ों की संख्या में उन्होंने “कॉरपोरेट भगाओ, किसानी बचाओ” का नारा लगाया और ब्लॉक का घेराव करते हुए तहसीलदार बार श्री विशाल शर्मा को इस आशय का राष्ट्रपति को सम्बोधित एक ज्ञापन सौंपा।

अध्यक्ष का. राम कैलाश कुशवाहा ने कोरोना लॉकडाउन के दौरान लोगों को राहत न पहुँचाने के लिए सरकार की आलोचना की और मांग की कि गरीबों को सरकार राहत दे। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी और भूख की समस्या विकराल है, खास तौर से शंकरगढ़ में, पर सरकार को इसकी कोई चिंता नहीं है। उन्होंने बताया कि सरकार ने खेती की लागत के दाम बढ़ा दिये हैं, जबकि किसानों के फसल की बिक्री व दाम की कोई सुरक्षा नहीं है। बड़े व्यापारी व कॉरपोरेट अपने मुनाफे को बढ़ाते जा रहे हैं और सरकार उनके हित में काम कर रही है। इन अध्यादेशों से लोगों की खाद्यान्न सुरक्षा घट जाएगी, क्योंकि खाने की पूरी श्रृंखला पर कॉरपोरेट का कब्जा हो जाएगा।

एआईकेएमएस महासचिव का. राजकुमार पथिक ने कहा कि मनरेगा में नियमित काम देना और किये काम का बकाया पेमेन्ट करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार को राशन में 15 किलो अनाज, 1-1 किलो दाल, तेल व चीनी देना चाहिए, किसानों के सभी कर्ज, समूह के माइक्रोफाइनेंस कर्ज समेत ब्याज माफ होना चाहिए और वसूली अभी रोक देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को कोरोना लाॅकडाउन दौर के सभी बिजली के बिल माफ किए जाने चाहिए और कोरोना हिदायतों के साथ स्कूल व अस्पताल खोलते हुए हर गांव में डॉक्टर भेजना चाहिए। उन्होंने हरियाणा के किसानों पर दमन की निन्दा की।

उपाध्यक्ष सुरेश निषाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने अकेले प्रयागराज में व सिर्फ जमुना नदी में बालू खनन काम में नाव के संचालन को बंद करने का गैरकानूनी आदेश, 24 जून 2019 पारित कर, लाखों बालू मजदूरों को बेरोजगार कर दिया है, जबकि मशीनों और लोडरों के प्रयोग से बालू माफिया की लूट जारी है।

राम मूरत बिन्द ने मांग की कि सरकारी व सीलिंग की जमीन गरीबों व भूमिहीनों को देनी चाहिए। बहुत से गावों में जमींदारों ने गांव की जमीन व गरीबों के पट्टों पर अवैध कब्जा जमा रखा है। जमीन जीविका का मुख्य साधन है। इसे जमींदारों से मुक्त कराकर गरीबों को बांटा जाना चाहिए।

उत्तर प्रदेश एआईकेएमएस महासचिव का. हीरालाल ने कहा कि गरीब लोग अब समझ रहे हैं कि सरकार किसानों के साथ धोखाधड़ी कर रही है और विदेशी लुटेरों का साथ दे रही है। खेती में विदेशी कम्पनियों को निमंत्रण देना ‘आत्मनिर्भरता’ नहीं है।

सभा में उपस्थित सैकड़ों लोगों में रामू निषाद, राजकुमारी, मंजू, बृजलाल, सहदेई, राकेश यादव, मालती देवी, विनोद निषाद, फूलचन्द निषाद, राम सूरत बिन्द, विनय निषाद, मनी व अन्य शामिल थे।

कौशांबी में किसानों ने एक स्वर में कहा- कम्पनियों को निमंत्रण देना ‘आत्मनिर्भरता’ नहीं है मोदी जी

मुट्ठी बांधे हुए, चेहरे पर मास्क लगाए, हाथों में झंडे, बैनर और प्लेकार्ड लिए हुए सैकड़ों किसानों व खेत मजदूरों ने “कारपोरेट भगाओ, किसानी बचाओ” का नारा लगाते हुए चायल तहसील के मूरतगंज ब्लाक का घेराव किया। एआईकेएमएस कौशाम्बी कमेटी के नेतृत्व में उन्होंने केन्द्र सरकार से मांग की कि वह खेती के तीन अध्यादेशों को वापस ले, 2020 का नया बिजली कानून वापस ले और पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतें वापस ले। बीडीओ शैलेश राय को इस आशय का राष्ट्रपति को सम्बोधित एक ज्ञापन प्रस्तुत किया।

अध्यक्ष का. बच्ची लाल ने कोरोना लॉकडाउन के दौरान लोगों को राहत न पहुँचाने के लिए सरकार की आलोचना की और इस दौर में बढ़ती बेरोजगारी और भूख से रक्षा के लिए राहत देने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार ने खेती की लागत के दाम बढ़ने दिये हैं, जबकि किसानों के फसल की बिक्री व दाम की कोई सुरक्षा नहीं है। बड़े व्यापारी व कारपोरेट अपने मुनाफे को बढ़ाते जा रहे हैं और सरकार उनके हित में काम कर रही है। इन अध्यादेशों से लोगों की खाद्यान्न सुरक्षा घट जाएगी, क्योंकि खाने की पूरी श्रृंखला पर कारपोरेट का कब्जा हो जाएगा।

एआईकेएमएस महासचिव का. फूलचन्द्र ने कहा कि मनरेगा में नियमित काम देना और किये काम का बकाया पेमेन्ट करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार को राशन में 15 किलो अनाज, 1-1 किलो दाल, तेल व चीनी देना चाहिए, किसानों के सभी कर्ज, समूह के माइक्रोफाइनेन्स कर्ज समेत ब्याज माफ होना चाहिए और वसूली अभी रोक देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को कोरोना लॉकडाउन दौर के सभी बिजली के बिल माफ किए जाने चाहिए और कोरोना हिदायतों के साथ स्कूल व अस्पताल खोलते हुए हर गांव में डॉक्टर भेजना चाहिए। उन्होंने हरियाणा के किसानों पर दमन की निन्दा की।

प्रगतिशील महिला संगठन की का. चन्द्रावती ने नदी, कछार की जमीन को कुलभाष्कर आश्रम डिग्री कालेज व उनके गुण्डों के अवैध कब्जे से मुक्त कराकर गरीबों को वितरित करने की मांग करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जमीन जीविका चलाने का महत्वपूर्ण साधन है और इसे जमींदारों से मुक्त कराकर गरीबों में बांटा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गंगा किनारे रह रहे परिवारों को बाध की बुनाई के लिए ब्याज मुक्त कर्ज दे और सुनिश्चित करे कि बाध का रेट 500 रुपये पसेरी के हिसाब से मजदूरों को मिले, ताकि उनके परिवार का जीवन चल सके।

एआईकेएमएस नेता कृष्णा ने कहा कि गरीब लोग अब समझ रहे हैं कि सरकार किसानों के साथ धोखाधड़ी कर रही है और विदेशी लुटेरों का साथ दे रही है। खेती में विदेशी कम्पनियों को निमंत्रण देना ‘आत्मनिर्भरता’ नहीं है।

प्रदर्शन में भाग लेने वालों में सुनीता देवी, बुधनी देवी, लालजी, पप्पू, राजेन्द्र कुशवाहा, विक्रम, वीरेन्द्र, बुधराम निषाद, गया प्रसाद, बेला, साहिल व अन्य शामिल थे।

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित रिपोर्ट। प्रस्तुति: सुशील मानव)

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