Wednesday, August 10, 2022

बिहार में अग्निपथ: आंदोलनकारी युवाओं के अभिभावकों को काटने पड़ रहे हैं थानों के चक्कर

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पटना। सेना के तीनों अंगों- थल, जल और वायु सेना में भर्ती के लिए अग्निपथ योजना की घोषणा के बाद से सरकार के खिलाफ कई राज्यों में काफी उग्र प्रदर्शन किया गया। बिहार के मोतिहारी से शुरू हुआ आंदोलन हैदराबाद तक पहुंच गया। देश के कई इलाकों में ट्रेन को आग लगा दिया गया। छात्रों ने पुलिस बल पर रोड़े-पत्थर बरसाए। चोटें दोनों तरफ के लोगों को लगीं। पूर्वोत्तर रेलवे, उत्तर-मध्य रेलवे और उत्तर रेलवे ने कई ट्रेन को रद्द कर दिया। इस सब के बावजूद अग्निपथ योजना जस का तस बना हुआ है लेकिन आंदोलन कर रहे छात्रों के जिंदगी का ताना-बाना बिगड़ चुका है।

कैसे अपराधी बन जाएंगे आंदोलनकारी युवा?

मोतिहारी के लगभग 35 लड़कों के खिलाफ ट्रेन में आग लगाने की वजह से केस दर्ज हुआ है। जिसमें 13 लड़के गिरफ्तार हो चुके हैं। बिहार के ADG संजय सिंह ने साफ शब्दों में कहा है कि ”जो लोग आंदोलन कर रहे हैं, यदि पकड़े गए तो ‘अग्निपथ’ तो क्या, किसी भी पथ के लायक नही रहेंगे।”

गिरफ्तार हुए छात्र संजय के पिता भंटू मंडल फ़ोन पर बताते हैं कि, “इस आंदोलन को उग्र करने में अपराधियों का हाथ है छात्रों का नहीं। मेरे बेटे को बेवजह फंसाया गया है। बताइए आप ही इस टॉर्चर से वह अपराधी बनेगा या जवान।”

बिहार में हुए छात्र आंदोलन की एक तस्वीर

ऊपर से केस नहीं हटेगा, तो नौकरी लायक ही नहीं रहेंगे

सहरसा के रहने वाले प्रभात आजकल पटना के पुलिस स्टेशन के चक्कर लगा रहे हैं। प्रभात बताते हैं कि, “एक साल पहले ग्रुप डी और आर्मी की तैयारी के लिए पटना आया था। एक बार दौड़ निकाला भी था तो परीक्षा में फेल हो गया था। भर्ती ना के बराबर सरकार निकाल रही थी और छात्रों का आक्रोश था तो मैं भी शामिल हो गया। राजेन्द्र नगर टर्मिनल पर छात्रों के हुए प्रदर्शन के बाद मुझे पकड़ लिया गया था और केस कर दिया। जब ऊपर से केस नहीं हटेगा तो नौकरी लायक ही नहीं रहेंगे। कहीं कैरेक्टर पर दाग लग गया तो हमारी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी‌।”

सुपौल जिले के पिंटू यादव के पिता दिनकर बताते हैं कि, ” ₹300 दिहाड़ी करने वाले मजदूर हैं हम। जिंदगी भी मेरे बच्चे का खराब हो रही है और जेल भी वही जा रहा है। सरकार को अपनी गलती नजर नहीं आती है। आग लगाने में मेरा बेटा नहीं बल्कि कोई दूसरा था। पुलिस उन तक नहीं जाएगी क्योंकि वह बड़े लोग हैं। बस अब बच्चों का कल्याण हो जाए। सर्विस में कोई दाग न लगे।” पिंटू यादव को 29 जून को सुपौल लाइन रेल में आग लगाने के कारण पुलिस ने अरेस्ट किया था।

अररिया के रानीगंज के सौरव का बिहार पुलिस में सब कुछ हो चुका है। पूरा चांस है कि वो मेरिट में भी आ जाएगा। दानापुर में हुए छात्र आंदोलन की वजह से उस पर भी केस दर्ज किया गया है। सौरव के चाचा अभिनव मिश्रा अभी पटना में रहकर सौरव को जेल से निकालने का प्रयास कर रहे हैं। अभिनव बताते हैं कि, “चावल और गेंहू घर से ही भेजते थे। थोड़ा-बहुत हमारी जमीन है। बाकी तेल-मसाला और सब्जी वो यहीं से खरीद लेता था। पांच साल से पटना में रह रहा था। अब नौकरी होने वाली थी तो बताइए क्या हो गया। फोन पर बहुत मना करते थे मत जाओ फिर भी चला गया था।”

युवाओं के लिए क्यों खतरनाक है आंदोलन का राजनीतिकरण

आखिर इतने बड़े स्तर पर आंदोलन होने के बावजूद भी अग्निपथ योजना पर कोई फर्क क्यों नहीं पड़ा? इस सवाल के जवाब में ‘हल्ला बोल’ के संस्थापक अनुपम बताते हैं कि, “‘अग्निपथ’ योजना को लेकर हो रहे विरोध-प्रदर्शन युवाओं के हाथों से निकल राजनीतिक दलों के हाथ में पहुंच गया है। जब उग्र युवाओं के साथ राजनीतिक दल के कार्यकर्ता शामिल हुए तो हंगामा और भी उग्र हो गया। इसका क्या नतीजा हुआ सबको पता है। विपक्षी दलों को बनी बनायी भीड़ मिल गयी और छात्रों का आंदोलन कमजोर पड़ गया।”

“बिहार में जेपी आंदोलन के समय कई विपक्षी दलों ने जयप्रकाश का सपोर्ट किया था। लेकिन ट्रेन और बस जलाने की घटना ना के बराबर हुई थी। सरकार को भी आंदोलन से सीख लेनी पड़ी। अग्निवीर आंदोलन के समय जो ट्रेन जली वह किसने जलाया यह विवाद का विषय है। लेकिन जिसने भी यह काम किया है उसने छात्रों को सरकार की नजर में अपराधी बना दिया और कुछ नहीं।” पटना विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर प्रशांत बताते है।

अपनी तैयारी करता एक छात्र

सरकार बदलने में 5 साल, हमको निकालने में 4 साल

भागलपुर जिले के भ्रमरपुर गांव के आशीष लगभग 3 साल से आर्मी की तैयारी कर रहे हैं। उनके पास इतना पैसा नहीं है कि बाहर जाकर पढ़ सकें। आशीष बताते हैं कि, “सरकार को बदलने में 5 साल लगता है, लेकिन हमको सिर्फ 4 साल में ही निकाल दिया जाएगा। अग्निपथ हमारे भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। हम बेरोजगारी की मजबूरी में फॉर्म भर देंगे लेकिन 4 साल की नौकरी के बाद मेरा क्या होगा?”

“आखिरकार 4 साल के बाद जब गांव में मिट्टी ढोने का ही काम करना है तो पढ़ने का क्या फायदा? पहले फौजी 17 साल में देश की सेवा अच्छे से कर पाते थे, लेकिन हम 4 साल में कितना ही सेवा करेंगे? आंदोलन का कोई असर नहीं पड़ा सरकार पे।” भ्रमरपुर गांव के गौरव झा बताते हैं।

अग्निवीर बनने पर शादी नहीं होगी

बिहार का सबसे बड़ा गांव बनगांव है। बनगांव ब्राह्मणों का भी सबसे बड़ा गांव है। बनगांव में लगभग 200 व्यक्ति आर्मी और पुलिस में होंगे। कारगिल युद्ध में बनगांव के रमन झा शहीद हुए थे। जिनके नाम पर चौक भी बना हुआ है। बनगांव के काली कांत खां बताते हैं कि, “नौकरी के नाम पर युवाओं को ठगा जा रहा है। सरकार ने मजाक बनाकर रख दिया है युवाओं का। हम लोग 2014 में आंख बंद करके मोदी को वोट दिए थे लेकिन यह विश्वास धीरे-धीरे कमजोर होता जा रहा है।”

“ब्राह्मणों का यह सबसे बड़ा गांव है और बीजेपी का गढ़ भी। लेकिन कुछ साल पीछे देखते हैं तो आश्चर्य होता हैं। कांग्रेस शासनकाल में ज्यादातर लड़के सरकारी नौकरी लेते थे अभी की तुलना में। नौकरी निकल भी रही है तो सिर्फ 4 साल के लिए बताइए क्या ही कहा जाए।” गांव के 55 वर्षीय नंदन बताते हैं‌।

गांव के ही लगभग 70 वर्षीय बलखंडी झा बताते हैं कि, “गांव में वैसे ही लड़कों की शादी नहीं हो रही है। इस नौकरी के बाद तो और नहीं होगी। इस योजना के बाद जब लड़का बेरोजगार हो जाएगा, तो उससे शादी कौन करेगा? ऐसे लड़के से कोई शादी नहीं करना चाहेगा। जिसके पास कोई नौकरी ना हो।”

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के आंकड़े के मुताबिक इस वक्त देश में बेरोजगारों की संख्या 5 करोड़ को पार कर चुकी है। CMIE की मानें तो इस वक्त देश में सिर्फ 38 फीसदी लोगों को ही रोजगार मिल पा रहा है। बेरोजगारी दर 8 फीसदी से भी अधिक का आंकड़ा छू रहा है।

विपक्ष ने किया विधानमंडल मानसून सत्र का बहिष्कार

बिहार में चल रहे मानसून सत्र का विपक्षी दल पूरी तरीके से विरोध कर रहे हैं। तेजस्वी यादव मीडिया को बताते हैं कि, “अग्निवीर योजना को लेकर हमने राजभवन मार्च भी किया था। आज समस्त विपक्ष की माँग थी कि सदन में अग्निपथ योजना पर विस्तृत चर्चा हो, हम सरकार के सामने इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने मत रखें। बिहार के युवा जिनका सेना में जाकर देश की सेवा करने का सपना था, उनमें से कई ने असंतुष्ट होकर हिंसा का सहारा भी लिया। ये भारत माँ के ही बच्चे हैं, इनके मुकदमे वापस लिए जाने चाहिए। कोचिंग संस्थानों को भी परेशान किया जा रहा है। चूँकि सदन में जनता की आवाज़ उठाने से विपक्ष को रोका जा रहा है इसीलिए समस्त विपक्ष ने निर्णय लिया है कि सभी विपक्षी दल सदन का बहिष्कार करेंगे और कल कर्पूरी जी की प्रतिमा के समक्ष धरना देंगे।”

(पटना से पत्रकार राहुल की रिपोर्ट।)

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