Monday, October 3, 2022

अडानी से नजदीकियों के बीच ममता और भाजपा में अंदरखाने डील की सुगबुगाहट

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इन दिनों चर्चा बहुत तेज है कि क्या ममता बनर्जी और भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के बीच में कोई समझौता हो गया है और इस डील को कराने में अंदरखाने पीएम के चहेते कारपोरेट गौतम अडानी की भूमिका है। राष्ट्रपति चुनाव ने कतिपय क्षेत्रीय विपक्षी दलों के छद्म विपक्ष के चरित्र का पर्दाफाश कर दिया है। दरअसल पूरे देश में दो ही विपक्ष है, एक कांग्रेस और एक वामपंथी दल या लेफ्ट फ्रंट। बाकी दल छद्म विपक्ष की भूमिका में हैं जो अपनी सुविधा, अपने फायदे के अनुसार कभी इस पार तो कभी उस पार बंदर की तरह छलांग लगाते रहते हैं। ऐसे में पश्चिम बंगाल कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके तृणमूल कांग्रेस के रवैये पर गंभीर सवाल उठ रहा है । ममता बनर्जी ने न केवल राष्ट्रपति के चुनाव में बहुत ही ठंडा रुख प्रदर्शित किया बल्कि उपराष्ट्रपति के चुनाव में विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा का समर्थन न करने की घोषणा करके इस अंदेशे को बल दिया है कि अंदरखाने उनकी भाजपा से डील हो गई है।

इसके लिए दार्जिलिंग की उस मीटिंग का उदाहरण दिया जा रहा है जिसमें तत्कालीन राज्यपाल जगदीप धनकड़, असम के मुख्यमंत्री हेमंत विश्व सरमा और ममता बनर्जी शामिल हुए। इसके बाद से ही ममता बनर्जी का तेवर बदला हुआ है। राजनीतिक हलकों में यह भी कहा जा रहा है कि पिछले छह-सात महीनों में जिस तरह ममता सरकार ने प्रधानमंत्री के चहेते कारपोरेट गौतम अडानी के पक्ष में फैसले किए हैं और बंगाल में उन्हें तमाम सहूलियतें दी हैं, उससे कहीं ना कहीं ममता की भाजपा से डील का श्रेय अडानी को दिया जा रहा है।

हालांकि छद्म विपक्ष का तमगा मिलने के बाद ममता बनर्जी ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश की है और कहां है कि 2024 में भाजपा को वह सत्ता में नहीं आने देंगी। लेकिन उनकी कथनी और करनी में अंतर से अब न तो राजनीतिक प्रेक्षकों को न ही  विपक्ष में किसी को विश्वास हो रहा है की ममता जो कह रही हैं वह करेंगी।

अब कहने को उड़ीसा में नवीन पटनायक का बीजू जनता दल, आंध्र में जगन मोहन रेड्डी का वाईएसआर कांग्रेस, चंद्रबाबू नायडू का तेलुगु देशम, शिवसेना, बसपा, सरीखी पार्टियाँ अपने को विपक्ष कहती हैं पर आचरण में ये भाजपा की बी और सी टीम बनकर रह गयी हैं। इन छद्म विपक्षी दलों के कारण वास्तविक विपक्ष को अत्यधिक राजनीतिक नुकसान हो रहा है।   

राष्ट्रपति चुनाव के पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़, असम के सीएम हेमंत बिस्वा सरमा और सीएम ममता बनर्जी की दार्जिलिंग राजभवन में मुलाकात हुई। इस मुलाकात के बाद ममता बनर्जी के आचरण से डील की अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि सीएम ममता बनर्जी ने मुलाकात को औपचारिक मुलाकात करार दिया और कहा कि इस मुलाकात के दौरान कोई राजनीतिक बातचीत नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राष्ट्रपति चुनाव के मतदान के पहले राज्यपाल धनखड़ और असम के सीएम हेमंत सरमा के साथ सीएम ममता बनर्जी की मुलाकात किसी न किसी तरह से भाजपा और ममता में डील का संकेत है ।

दरअसल ममता बनर्जी की सरकार नारद, सारदा, कोयले की तस्करी घोटाले ,शिक्षा घोटाले से बुरी तरह घिरी हुई है और इन सभी मामलों में जांच एडवांस स्टेज पर है और पार्टी नेताओं सहित ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी ईडी के रडार पर हैं।

आइये ममता और अडानी के बीच पनपे रिश्ते पर एक नजर डाल लेते हैं। अडानी समूह के प्रमुख गौतम अडानी ने कुछ दिनों पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की थी और उसके बाद बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट में भी शिरकत कर बंगाल में 10 हजार करोड़ रुपए निवेश का ऐलान किया था। अब जून के पहले हफ्ते में ममता बनर्जी की कैबिनेट बैठक में साल्टलेक के सेक्टर-V में सिलिकॉन वैली में अडानी एंटरप्राइजेज को 99 साल के लिए जमीन लीज पर देने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गयी है। यहां हाइपर स्केल डाटा सेंटर बनाया जाएगा। डाटा सेंटर कुल 51.75 एकड़ जमीन पर बनाया जाएगा। राज्य के उद्योग मंत्री पार्थ चटर्जी जिन्हें ईडी ने शिक्षा घोटाले  में उनकी करीबी अर्पिता के पास से 20 करोड़ की नगदी मिलने के बाद गिरफ्तार कर लिया है, ने राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के बाद यह जानकारी दी थी।

इसके पहले गौतम अडानी ने मुंबई में पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी से मुलाकात की थी। इस दौरान गौतम अडानी से सीएम को ताजपुर बंदरगाह में निवेश करने का प्रस्ताव दिया था। इसके अलावा अप्रैल 2022 में कोलकाता में बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट में गौतम अडानी शामिल हुए थे। उन्होंने बंगाल में निवेश करने का वादा किया था। उन्होंने कहा था कि उनका समूह राज्य में आने वाले वर्षों में दस हजार करोड़ का निवेश करेगा, जिससे 25 हजार लोगों को रोजगार प्राप्त होगा।

आपको याद दिला दें कि गौतम अडानी वही उद्योगपति हैं जिन्हें ममता बनर्जी पिछले कई सालों से पीएम नरेंद्र मोदी का न केवल मित्र बताती रही हैं, बल्कि लगातार यह आरोप भी लगाती रही हैं कि प्रधानमंत्री मोदी जो भी करते हैं वो सब कुछ अडानी और अंबानी को फायदा पहुँचाने के लिए करते हैं। इस साल अप्रैल में बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट के छठे संस्करण में अडानी ग्रुप ने पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर, और अंडरसी केबल, डिजिटल इनोवेशन, फुलफिलमेंट सेंटर, वेयरहाउस में एक दशक में 10,000 करोड़ रुपए के निवेश का ऐलान किया है।

हालाँकि ममता बनर्जी ने विपक्ष की प्रत्याशी अल्वा के अलावा धनखड़ को भी उपराष्ट्रपति के लिए सपोर्ट न करने का ऐलान किया है लेकिन यह एक प्रकार से धनखड़ का परोक्ष समर्थन माना जा रहा है।

धनखड़ ने 30 जुलाई 2019 को राज्य के गवर्नर पद की शपथ ली थी। ऐसे में उनके बंगाल में राज्यपाल के कार्यकाल को याद किया जा रहा है। वे प्रदेश के पहले ऐसे राज्यपाल हैं जिन्होंने सोशल मीडिया के सहारे लगातार अपनी बातें कही। धनखड़ अपने कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ 36 के आंकड़े के चलते अक्सर सुर्खियों में रहे। राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच कभी सोशल मीडिया पर वाकयुद्ध देखने को मिला तो कभी किसी कार्यक्रम में दोनों के बीच तल्खी देखने को मिली। इसी साल जनवरी में दोनों में विवाद इतना बढ़ा कि ममता बनर्जी ने ट्विटर पर धनखड़ को ब्लॉक तक कर दिया। हाल ही में बंगाल की राज्य संचालित यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति पद पर राज्यपाल की जगह मुख्यमंत्री को नियुक्त करने के प्रस्ताव को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ। राज्यपाल ने ममता सरकार के इस बिल को सुधार का हवाला देते हुए लौटा दिया। यह बिल विधानसभा से पास हो गया।

तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा की मां काली पर विवादास्पद टिप्पणी के बीच राज्यपाल ने राजभवन में कई साधु-संतों से मुलाकात की। राज्यपाल ने तृणमूल कांग्रेस और ममता सरकार पर तुष्टिकरण का आरोप लगाया। तृणमूल ने अपने मुखपत्र जागो बांग्ला के जरिए राज्यपाल पर निशाना साधा और पूछा कि क्या राजभवन भाजपा का मुख्यालय है? लेख में कहा गया था कि तृणमूल आने वाले दिनों में राज्यपाल का पद खत्म करने की मांग करेगी।

इसी साल जनवरी में ममता बनर्जी ने जगदीप धनखड़ को ट्विटर पर ब्लॉक कर दिया। उन्होंने धनखड़ पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि वे उनसे परेशान हो गई थीं। उन्होंने धनखड़ पर मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को धमकी देने का आरोप लगाया। साथ ही फोन टैपिंग का आरोप भी लगाया। इसके बाद धनखड़ ने ममता को भेजे गए वॉट्सऐप मेसेज ट्विटर पर शेयर किए। उनके अनुसार, उन्होंने ममता को जो संदेश भेजे उसमें लिखा था कि संवैधानिक पदाधिकारियों के बीच संवाद और सद्भाव लोकतंत्र का सार और भावना है और संविधान का जनादेश है।

इसी साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर धनखड़ और ममता के बीच खुलेआम तकरार देखने को मिली। गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम के दौरान सीएम ममता ने आयोजन स्थल पर राज्यपाल के उनकी ओर बढ़ने पर उनका अभिवादन किया। ममता तब तक अपनी कुर्सी से नहीं उठीं, जब तक कि राज्यपाल उनके करीब नहीं आ गए। इसका वीडियो भी वायरल हुआ था। एक समय धनखड़ उन्हें कुछ कहते नजर आ रहे थे लेकिन ममता ने अपना चेहरा घुमा लिया था।

ऐसे में धनकड़ के साथ ममता की मुलाकात और ममता का बदला हुआ रुख डील की बहुत बड़ी कहानी कह  रहा है। इसके अलावा अभी तक बंगाल में स्थायी गवर्नर की नियुक्ति नहीं हुई है। डील के तहत बंगाल में किसी सॉफ्ट गवर्नर की  नियुक्ति की सम्भावना है जो उपराष्ट्रपति के चुनाव के बाद होगा ताकि ममता पर अंकुश बना रहे। 

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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