Wednesday, October 5, 2022

हवाओं में तैर रही हैं एम्स ऋषिकेश के भ्रष्टाचार की कहानियां, पेंटिंग संबंधी घूस के दो ऑडियो क्लिप वायरल

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एम्स ऋषिकेश में किस तरह से भ्रष्टाचार परवान चढ़ता है। इसको लेकर दो ऑडियो क्लिप वायरल हुए हैं। एक ऑडियो क्लिप एन पी सिंह (एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एम्स व एम्स निदेशक रविकांत के बहनोई) और ठेकेदार के बीच हुई बातचीत (डील) की है और दूसरी ऑडियो क्लिप बिल्डिंग विभाग के ऑफिसर अनुराग सिंह और ठेकेदार के बीच हुई डील का है। ऋषिकेश एम्स में कैसे भर्ती से लेकर इमारतों की पेंटिंग कराने जैसे काम में घूसखोरी चल रही है उसका खुलासा ये दोनों ऑडियो क्लिप करती हैं।

दोनों ऑडियो को हम लिप्यांतरित करके दे रहे हैं-

ठेकेदार और एन.पी सिंह (एग्जीक्यूटिव इंजीनियर) के बीच डील का ऑडियो क्लिप

ठेकेदार- “आप बताओ सर कैसे करना है। बस करना है। टीम आ रही है सर एशियन पेंट्स से एक बजे तक आ जाएगी। कंट्रैक्टर आ जाएंगे। 1 हजार वर्ग स्क्वायर फीट वाला जो एरिया दिखा दीजिए। तो वी विल स्टार्ट द जॉब। जब से आप बोलें। जैसे बोलेंगे बस करना है। सेकेंड प्वाइंट ये है कि अगर टेंडर में जैसा भी आप बोलेंगे ना जैसा भी।”

एन.पी. सिंह- “वो सैंपल वाली बात थी ना। सैंपल करने के बाद टेंडर आपके स्पेसिफिकेशन के हिसाब से बनाएंगे। और फिर कोट करके डाल देंगे।” 

ठेकेदार – “ओके सर।”

एन.पी. सिंह- “बाकी उस दिन श्री राम वाले आए थे उनकी भी टेस्टिंग कराई थी। टेस्टिंग तो उनकी भी पास हो गई       पर। तो उनके उस पर हमें डाउट हो रहा था। उसके रेट बहुत ज़्यादा लग रहे थे।”

ठेकेदार- “कितना दे रहा है सर।” 

एन.पी. सिंह – “ज़्यादा नहीं दे रहा था। तो हमने कहा कि जाने दो हम अपने आप कराएंगे।”

ठेकेदार – “अगर आपको लग रहा है तो बता दीजिएगा। आई विल गेट इट डन।”

ठेकेदार – “अब मुझे आपसे वही बात करनी है सर। आपसे मैं थोड़ा पर्सनल पूछूँगा। आप मुझे बताइए क्या कोट करना है और कैसे करना है। कितना मतलब मैं पूछ सकता हूँ न आपसे।” 

एन.पी. सिंह- “15 प्रतिशत मानकर एड कर लो।”

ठेकेदार – “और सर बिफोर कुछ देना है मेरे को।”

एन.पी. सिंह- “जब काम कराएंगे तब। पहले टेंडर तो पास करा लें।”

ठेकेदार – “अच्छा सर अगर टेंडर के टाइम पर कुछ ड्रॉफ्ट करना है तो कुछ पहले देना का है..प्लीज आप बोल सकते हैं. ये फैक्ट है…”

एन.पी. सिंह- “तभी बता देंगे। बात करके सर से तभी बता देंगे।”

ठेकेदार – “सर से बात करूँ ये सारी या आप ही से बात करूँ।”

एन.पी. सिंह- “नहीं। मैं ही उनसे बात करके बता दूंगा।”

ठेकेदार – “आप ही रहेंगे हर जगह तो ठीक रहेगा सर। डन। वैसे भी मैं उनके लिए केवल मिठाई का डिब्बा ही लाया था। और मुझे नहीं पता वो कुछ लेते हैं तो..”

एन.पी. सिंह- “नहीं वो नहीं लेते।”

ठेकेदार – “ठीक है सर मैं वेट करता ही सर के बारे में। और प्लीज सर सपोर्ट कीजिएगा। और हां सर जम्मू एम्स के लिए भी सपोर्ट चाहिए। हमें वो भी करना है।”

एन.पी. सिंह- “जब यहां हो जाएगा तो वहां भी आ जाएगा। अभी तो वहां नींव रखी गई है।”

ठेकेदार – “और सर बाकी इक्विपमेंट्स भी हैं ना। तो वॉल प्रोटेक्शन वगैरह।”

एन.पी. सिंह- “एक काम कर लो फिर तो सब प्रोसीजर में आ जाएगा। हम वहां पर भी फिर कर लेंगे।”

शिकायतकर्ता और अनुराग सिंह के बीच कमीशन को लेकर बातचीत

शिकायतकर्ता- उसको कैसे करना है सर।

अनुराग सिंह- किसका।

शिकायतकर्ता- सर ने आपको भेजा होगा ना। यू वी बैलस्तर का जो ट्रॉली मैंने आपको बताई थी ना।

अनुराग- सिंह- हां हां कॉस्टली बहुत है यार। डेढ़ लाख का उन्होंने हैदराबाद में बताया है। 

शिकायतकर्ता- कितना छोटा है, कितना बड़ा है।

अनुराग सिंह- डेढ़ लाख नहीं पचास हजार का था। 1 लाख कास्ट कह रहे थे हो जाएगी क्योंकि पचास हजार का जो है वो मैनुअल उठा के रखने का है और इसे बना देंगे, ट्रॉली में ऑटोमौटिक बन जाएगा।

शिकायतकर्ता- कितना एरिया ले रहा है सर।

अनुराग सिंह- वो कह रहे थे ईमेल में है मेरी, मैं पढ़वा दूँगा।

शिकायतकर्ता- ओके, ओके। उन लोगों से बात करूँ। सर लास्ट फाइनल प्राइस क्या कर सकते हैं। लास्ट।

अनुराग सिंह- हाँ हाँ पूछो आप।

शिकायतकर्ता- आप उन से प्राइस पूछ लो अपना प्रॉफिट रख लो और यहाँ का एक्सपेंडिंचर रख लो। वो रख लो। 

शिकायतकर्ता- कितना रख लूँ सर।

अनुराग सिंह- यहाँ पर देखो 20-25 प्रतिशत से कम में बात बनती नहीं है।

शिकायतकर्ता- मेरे को सर 10 प्रतिशत से ज़्यादा नहीं चाहिए। 8-10 प्रतिशत में खुश हूँ। मेरे को कोई परेशानी नहीं है सर। 

अनुराग सिंह- आप 20 प्रतिशत पूरा यहाँ का मान के चलो। इस से कम में बात बनती नहीं है। 20 प्रतिशत उस में जोड़ लो तब आप देखो उस में लास्ट वहाँ से वहां क्या रेट आता है।

शिकायतकर्ता- डन सर। मैं इसका तो कल ही बता देता हूँ सर।

अनुराग सिंह- डायरेक्टर ऑफिस के लिए तो हम खरीद ही लेंगे।  

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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