Friday, August 12, 2022

बिहार, झारखंड और यूपी सबसे गरीब राज्य: नीति आयोग की रिपोर्ट

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संविधान दिवस पर 26 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को खेद व्यक्त किया कि कुछ लोग राष्ट्र की आकांक्षाओं को समझे बिना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर राष्ट्र के विकास को रोकते हैं। ऐसे सोच के लोग कभी बोलने की आजादी के नाम पर तो कभी किसी अन्य चीज का सहारा लेकर देश के विकास में रोड़ा अटका रहे हैं। वहीं सरकार का नीति आयोग देश के गरीबी सूचकांक को जारी करते हुए कह रहा है कि गरीबी के मामले में जो पांच राज्य टॉप पर हैं, उनमें से चार बीजेपी शासित राज्य हैं। कहीं बीजेपी की अकेली पूर्ण बहुमत की सरकार है तो कहीं डेढ़ दशक पुरानी गठबंधन की सरकार है। बिहार, झारखंड और यूपी सबसे गरीब राज्यों के रूप में सामने आए।अब प्रधानमन्त्री जी यह नहीं बता रहे हैं कि इन भाजपा शासित राज्यों में किस किस और कौन सी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता ने विकास से रोक रखा है या विकास में बाधा है।यही नहीं मोदी जी यह भी नहीं बता रहे कि 70 सालों के कांग्रेसी राज में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता थी या नहीं?

इस सूचकांक में सीपीएम शासित केरल में 0.71 प्रतिशतके साथ सबसे नीचे है।सर्वविदित है कि केरल की साक्षरता दर देश में सबसे अधिक है और केरल देश का ऐसा प्रदेश है जहाँ धार्मिक पाखंड सबसे कम है।इसके बाद गोवा में 3.76 प्रतिशत, सिक्किम में 3.82 प्रतिशत, तमिलनाडु में 4.89 प्रतिशत और पंजाब  में 5.59 प्रतिशत आबादी गरीब है। ये राज्य पूरे देश में सबसे कम गरीब जनता वाले राज्यों में शामिल हैं।

नीति आयोग द्वारा जारी सूचकांक के अनुसार, बिहार की 51.91 प्रतिशत जनसंख्या गरीब है। यहां नीतीश कुमार की अगुवाई में बीजेपी और जेडीयू गठबंधन की डेढ़ दशक पुरानी सरकार है, जबकि दिसंबर 2019 से पहले बीजेपी शासित झारखंड में 42.16 प्रतिशत आबादी गरीब है।देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में 37.79 प्रतिशत आबादी गरीबी में रह रही है।सूचकांक में मध्य प्रदेश (36.65 प्रतिशत) चौथे स्थान पर है।2011 की जनगणना के अनुसार यूपी की आबादी 19.98 करोड़ है। इसकी 37.79 फीसदी आबादी यानी 7.55 करोड़ आबादी गरीब है। बिहार की आबादी 2011 की जनगणना के अनुसार 10.4 करोड़ है। इसकी करीब 52 फीसदी आबादी यानी 5.4 करोड़ आबादी गरीबी में जीवन बसर कर रही है।

सूचकांक में मध्य प्रदेश (36.65 प्रतिशत) चौथे स्थान पर है, जबकि मेघालय (32.67 प्रतिशत) पांचवें स्थान पर है।मध्य प्रदेश में भी साल 2003 से लगातार (दिसंबर 2018 से मार्च 2020 छोड़कर) बीजेपी की सरकार है और शिवराज सिंह चौहान 2005 से मुख्यमंत्री हैं। वहीं मेघालय में बीजेपी की गठबंधन सरकार है।

सूचकांक के अनुसार, बिहार की 51.91 प्रतिशत जनसंख्या गरीब हैं। देश के सबसे गरीब राज्यों में बिहार पहले नंबर पर है। दूसरे नंबर पर झारखंड है। झारखंड में 42.16 प्रतिशत और यूपी में 37.79 प्रतिशत आबादी गरीबी में रह रही है। सूचकांक में मध्य प्रदेश (36.65 प्रतिशत) चौथे स्थान पर है, जबकि मेघालय (32.67 प्रतिशत) 5वें स्थान पर है।

केंद्र शासित प्रदेशों में, दादरा और नगर हवेली में (27.36 प्रतिशत), जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में (12.58 प्रतिशत),  दमन एवं दीव (6.82 प्रतिशत) और चंडीगढ़ (5.97 प्रतिशत) देश के सबसे गरीब केंद्र शासित प्रदेश हैं। पुडुचेरी की 1.72 प्रतिशत आबादी गरीब है। इसके अलावा लक्षद्वीप में (1.82 प्रतिशत), अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में (4.30 प्रतिशत) और दिल्ली में (4.79 प्रतिशत) गरीब हैं। लक्ष्यद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और दिल्ली ने इस बार बेहतर प्रदर्शन किया है।

बिहार में कुपोषितों की संख्या भी सबसे ज्यादा है। इसके बाद झारखंड, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ का स्थान है। मातृत्व स्वास्थ्य से वंचित आबादी का प्रतिशत,  स्कूली शिक्षा से वंचित आबादी,  स्कूल में उपस्थिति और खाना पकाने के ईंधन तथा बिजली से वंचित आबादी के प्रतिशत के मामले में भी बिहार का सबसे खराब स्थान है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत का राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक ऑक्सफोर्ड पॉवर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनीशिएटिव और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा विकसित विश्व स्तर पर स्वीकृत और मजबूत पद्धति का उपयोग कर तैयार किया जाता है। बहुआयामी गरीबी सूचकांक में मुख्य रूप से परिवार की आर्थिक हालात और अभाव की स्थिति को आंका जाता है।

एमपीआई में 3 पॉइंट्स स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन के स्तर का मूल्यांकन किया गया। पोषण, बाल और किशोर मृत्यु दर, प्रसव पूर्व देखभाल, स्कूली शिक्षा के वर्ष,  स्कूल में उपस्थिति,  खाना पकाने के ईंधन,  स्वच्छता, पीने के पानी,  बिजली,  आवास,  संपत्ति तथा बैंक खाते जैसे 12 पॉइंट्स के जरिए मूल्यांकन किया जाता है।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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