Sunday, May 22, 2022

पेगासस मामले में केंद्र को नहीं सूझ रहा जवाब; मांगा और वक्त, अब 13 को होगी सुनवाई

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पेगासस जासूसी मामले में केंद्र सरकार को समझ नहीं आ रहा है कि उच्चतम न्यायालय में क्या हलफनामा दायर करें? यह हम नहीं कह रहे हैं बल्कि केंद्र सरकार के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता कह रहे हैं कि हलफनामा दाखिल करने के मामले में कुछ परेशानी है। कुछ अधिकारी मिल नहीं पाए हैं और इस कारण हम अभी स्टैंड नहीं समझ पाए हैं, ऐसे में सुनवाई कुछ वक्त के लिए टाली जानी चाहिए। अब उच्चतम न्यायालय क्या करे? कल ही ट्रिब्यूनल वाले मामले में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि आप (केंद्र सरकार) हमारे धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं। चीफ जस्टिस एनवी रमना ने यह भी कहा कि हम टकराव नहीं चाहते। नतीजतन उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए हफ्ते भर का वक्त दे दिया और अगली सुनवाई के लिए 13 सितंबर की तारीख तय कर दी।    

चीफ जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस बोपन्ना की पीठ के सामने मंगलवार को सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हलफनामा दाखिल करने के मामले में कुछ परेशानी है। कुछ अधिकारी मिल नहीं पाए हैं और इस कारण हम अभी स्टैंड नहीं समझ पाए हैं, ऐसे में सुनवाई कुछ वक्त के लिए टाली जानी चाहिए। मैं रुख सुनिश्चित नहीं कर सका। कृपया मुझे परसों तक समायोजित करने पर विचार करें।

इस पर चीफ जस्टिस ने सवाल किया कि लेकिन आपने तो पिछली सुनवाई से पहले हलफनामा दायर किया था। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि पिछली सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि अगर केंद्र सरकार इस मामले में विस्तार से हलफनामा दायर करना चाहती है तो वह जवाब दाखिल करे। एसजी ने आग्रह किया कि गुरुवार तक या अगले सोमवार तक मामले को दिया जाए अगर याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता आपत्ति नहीं कर रहे हैं।

पत्रकारों एन राम और शशि कुमार द्वारा दायर याचिका में पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि कोई आपत्ति नहीं है। तदनुसार, याचिकाओं को सोमवार, 13 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

 पिछले हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट के सामने केंद्र ने कहा था कि उसने जो हलफनामा दायर किया है वह पर्याप्त है। ये मामला नेशनल सिक्योरिटी से जुड़ा हुआ है और मामले में हलफनामे में तथ्यों का खुलासा नहीं किया जा सकता। वहीं याचिकाकर्ता के वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि हम नेशनल सिक्योरिटी से जुड़े तथ्यों का खुलासा करने को नहीं कह रहे हैं बल्कि हम ये जानना चाहते हैं कि सरकार ये बताए कि पेगासस का इस्तेमाल सरकार ने सर्विलांस के लिए किया है या नहीं? केंद्र सरकार ने जो हलफनामा दायर किया है उसमें वह जवाब देने से बच रही है।

उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि हम बतौर कोर्ट ये कभी नहीं चाहेंगे कि राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता हो। लेकिन यहां आरोप है कि कुछ लोगों के मोबाइल को हैक किया गया और सर्विलांस किया गया। ये भी कंपिटेंट अथॉरिटी की इजाजत से हो सकता है। इसमें क्या परेशानी है कि कंपिटेंट अथॉरिटी हमारे सामने इस बारे में हलफनामा पेश करे। कंपिटेंट अथॉरिटी नियम के तहत फैसला ले कि किस हद तक जानकारी पब्लिक हो सकती है।

चीफ जस्टिस की पीठ ने कहा था कि हम सोच रहे थे कि केंद्र सरकार का जवाब इस मामले में विस्तार से आएगा लेकिन जवाब लिमिटेड था। हम इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हैं। 17 अगस्त को पेगासस जासूसी मामले की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा था।

पीठ पेगासस स्पाइवेयर का उपयोग कर एक्टिविस्ट, पत्रकारों, राजनेताओं और नेताओं की जासूसी की रिपोर्टों की अदालत की निगरानी में विशेष जांच दल द्वारा जांच या न्यायिक जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।

उच्चतम न्यायालय ने 17 अगस्त को याचिकाओं के बैच में केंद्र को नोटिस जारी किया था। केंद्र सरकार ने कहा था कि वह पेगासस मुद्दे में कोई अतिरिक्त हलफनामा दाखिल नहीं करना चाहती, क्योंकि इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा के पहलू शामिल हैं। केंद्र ने कहा था कि वह मुद्दों की जांच के लिए उसके द्वारा गठित की जाने वाली प्रस्तावित विशेषज्ञ समिति के समक्ष विवरण रखने को तैयार है। उच्चतम न्यायालय ने 16 अगस्त को सुनवाई एक दिन के लिए स्थगित कर दी थी और एसजी को यह पता लगाने के लिए कहा था कि क्या केंद्र सरकार मामले में अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करना चाहती है। यह याचिकाकर्ताओं द्वारा इस बात पर प्रकाश डालने के बाद हुआ कि केंद्र द्वारा दायर सीमित हलफनामा इस सवाल से बचता है कि क्या सरकार या उसकी एजेंसियों ने कभी पेगासस का इस्तेमाल किया है।

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अगर सरकार सार्वजनिक रूप से यह खुलासा करती है कि वह एक विशेष इंटरसेप्शन सॉफ्टवेयर का उपयोग नहीं कर रही है, तो आतंकवादी संगठन अपनी संचार सेटिंग्स को बदलने के लिए उस जानकारी का लाभ उठाएंगे। सॉलिसिटर जनरल ने कहा था कि सरकार प्रस्तावित तकनीकी समिति के समक्ष सभी विवरण रखेगी, जिसमें उन्होंने आश्वासन दिया था कि इसमें केवल तटस्थ अधिकारी शामिल होंगे।

पीठ ने स्पष्ट किया था कि यह सरकार पर दबाव डालने के लिए किसी भी जानकारी का खुलासा करने या राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं करना चाहती है। पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि वह केवल नागरिकों के फोन को कथित रूप से इंटरसेप्ट करने के लिए प्राधिकरण के बारे में जानकारी चाहती है।

चीफ जस्टिस ने कहा था कि हमने सोचा था कि एक व्यापक जवाब आएगा लेकिन यह एक सीमित जवाब है। हम देखेंगे, हम भी सोचेंगे और विचार करेंगे कि क्या किया जा सकता है। हम चर्चा करेंगे कि क्या किया जाना चाहिए, अगर विशेषज्ञों की समिति या कुछ अन्य समिति बनाने की जरूरत है।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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