Wednesday, December 7, 2022

ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- 36 हजार करोड़ के छत्तीसगढ़ नान घोटाले में हाईकोर्ट जज आरोपियों की कर रहे हैं मदद 

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सुप्रीम कोर्ट में ईडी ने यह आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दी कि हाईकोर्ट के  न्यायाधीश संवैधानिक पदाधिकारियों के माध्यम से 36हजार करोड़ के नागरिक आपूर्ति निगम (नान) घोटाले के आरोपी के संपर्क में थे। ईडी ने सुप्रीम कोर्ट को को बताया कि वर्ष 2020 में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने दो आईएएस अधिकारियों को अग्रिम जमानत दी थी, जिन्हें पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान बुक किया गया था। छत्तीसगढ़ में साल 2015 में सार्वजनिक वितरण प्रणाली में 36,000 करोड़ रुपए का कथित घोटाला सामने आया था।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नागरिक आपूर्ति निगम (एनएएन) घोटाले के आरोपी संवैधानिक पदाधिकारियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के संपर्क में थे, जो आरोपियों की मदद कर रहे थे।

चीफ जस्टिस  यू.यू. ललित, जस्टिस रवींद्र भट और जस्टिस अजय रस्तोगी की पीठ ईडी द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें नान घोटाला मामले में जांच को स्थानांतरित करने की मांग की गई थी। ईडी ने दिसंबर 2021 में छत्तीसगढ़ के बाहर मामले की फिर से सुनवाई की मांग की थी और मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने को कहा था।

वर्ष 2020 में, उच्च न्यायालय ने दो आईएएस अधिकारियों,  अनिल कुमार तुजेजा और आलोक शुक्ला को अग्रिम जमानत दी थी, जिन पर पिछली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के कार्यकाल के दौरान मामला दर्ज किया गया था।

भाजपा के रमन सरकार के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ से बहु-करोड़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) घोटाला, या नान घोटाला, वर्ष  2015 में सामने आया जब आर्थिक अपराध जांच (ईओआई) और भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो, रायपुर, छत्तीसगढ़ ने विभिन्न जिलों में 12 फरवरी, 2015 को छापेमारी की। छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम एवं छत्तीसगढ़ राज्य भण्डारण निगम के अधिकारियों के कार्यालय एवं आवास। नान अनाज के वितरण और खरीद की प्रभारी एजेंसी है।

मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ्तार किए गए दो आईएएस अधिकारियों पर घटिया किस्म के चावल, चना और नमक आदि की आपूर्ति करने का आरोप था।

चीफ जस्टिस यू.यू. ललित, जस्टिस रवींद्र भट और जस्टिस अजय रस्तोगी ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की, जिसमें नागरिक आपूर्ति निगम (एनएएन) घोटाला मामले में जांच ट्रांसफर करने की मांग की गई है, जो छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में भ्रष्टाचार से संबंधित है। पीठ ने पक्षों को निर्देश दिया कि वे जिस सबूतों पर भरोसा करना चाहते हैं उसे सीलबंद लिफाफे में कोर्ट में दाखिल करें।यह मामला अब 26 सितंबर 2022 को दोपहर 3 बजे के लिए सूचीबद्ध है।पीठ ने पक्षकारों को याचिकाओं को सुनवाई योग्य बनाए रखने पर अपनी लिखित प्रस्तुतियां प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मामला इतना बड़ा है कि सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग कर सकता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में संवैधानिक पदों पर अधिकारियों की मिलीभगत से उच्च पदस्थ अधिकारी अपने पदों का फायदा उठा रहे हैं।

प्रतिवादियों की ओर से सीनियर एडवोकेट द्विवेदी, सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी और सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि उक्त घोटाला छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के शासन के दौरान हुआ था। एसजी मेहता ने कहा कि यह सामने आया है कि छत्तीसगढ़ सरकार के सीनियर अधिकारी याचिकाकर्ताओं के मामले को कमजोर करने में सक्रिय रूप से शामिल हैं और अभियुक्तों ने न केवल गवाहों को ईडी के समक्ष अपने बयान वापस लेने के लिए प्रभावित किया था, बल्कि एसआईटी ने भी कार्यवाही को रोकने के लिए कई प्रयास किए थे।

मेहता ने कहा कि ईडी की जांच से पता चला है कि आरोपी संवैधानिक पदाधिकारियों के संपर्क में हैं और अन्य सह-आरोपियों के अनुसूचित अपराधों की गंभीरता को कम करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों को वर्तमान छत्तीसगढ़ सरकार से मदद मिली है। इस पर सीनियर एडवोकेट रोहतगी ने आपत्ति की और कहा कि या तो आप सामग्री का खुलासा करें या इसे न पढ़ें।

एसजी मेहता ने कहा कि उन्हें सामग्री को रिकॉर्ड पर रखने में कोई संकोच नहीं है। उक्त सामग्री का खुलासा करने से सिस्टम में लोगों का विश्वास खत्म हो जाएगा। अगर यह सार्वजनिक डोमेन में आता है, तो यह सिस्टम में लोगों के विश्वास को खत्म कर सकता है। उच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश संवैधानिक अधिकारियों के संपर्क में हैं जो आरोपी की मदद कर रहे हैं, क्या आप चाहते हैं कि मैं इसे सार्वजनिक कर दूं?तदनुसार, एसजी ने पीठ से अनुरोध किया कि वह कुछ समय लें और सामग्री को ‘आराम से’ देखें और फिर अपना निर्णय लें।

एक आरोपी की ओर से सीनियर एडवोकेट मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि उक्त आरोपी को 2015 में गिरफ्तार किया गया था और इस मामले में 170 से अधिक गवाहों से पूछताछ की जा चुकी है, जिसमें अंतिम गवाह भी शामिल है जो जांच अधिकारी था। एसजी मेहता ने कहा कि कोई भी आरोपी जेल में नहीं है और वे जमानत पर बाहर हैं। एसजी ने यह भी कहा कि रजिस्ट्री में उल्लेखित होने के बावजूद मामलों को सूचीबद्ध नहीं किया जा रहा था।उन्होंने कहा कि मैंने छह बार इसका उल्लेख किया है। मैं केवल इतना कह रहा हूं कि मेरी याचिका लंबित है, कृपया मुकदमे को समाप्त न करें।

चीफ जस्टिस ललित ने कहा कि जो भी दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में हैं, हमने उन्हें नहीं देखा है लेकिन एसजी ने अनुरोध किया कि हम उन पर एक नज़र डालें ताकि हम उन्हें देख सकें। यदि हम पाते हैं कि सामग्री को सार्वजनिक किया जाना है, तो हम इसकी अनुमति देंगे।

चीफ जस्टिस ने कहा कि एक अनुरोध किया गया है कि जांच को स्थानांतरित किया जाए और इस अदालत ने नवंबर 2021 में नोटिस जारी किया था। लगभग 10 महीने बीत चुके हैं। मुकदमे के समाप्त होने से पहले, हमें यह तय करना होगा कि क्या दूसरे पक्ष में सार है। मामले को अगले सोमवार को 3 बजे सूचीबद्ध करें। 2021 में नोटिस जारी किया गया था, जिसका अर्थ है कि प्रथम दृष्ट्या याचिकाकर्ता के खिलाफ कुछ पाया गया था। इस प्रकार, यह सुनना हमारा कर्तव्य है।

चीफ जस्टिस ने कहा कि एसजी के पास सीलबंद लिफाफे में दस्तावेज और सामग्री है। प्रतिवादी प्रस्तुत करते हैं कि सीलबंद लिफाफे में दस्तावेज जमा करने की प्रथा को इस अदालत के एक नवीनतम निर्णय द्वारा अनुमोदित नहीं किया गया है। राज्य का कहना है कि यदि याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत सामग्री पर विचार किया जाता है, तो राज्य भी सीलबंद लिफाफे में दस्तावेज रखने के इच्छुक हों। इसलिए, हम चाहते हैं कि काउंसिल ऐसी सामग्री रखें जिस पर राज्य भी भरोसा करना चाहता है। दोनों सीलबंद लिफाफे मामले की अध्यक्षता करने वाले न्यायाधीशों के आवास पर भेजे जाएं।

पीठ ने कहा कि उत्तरदाताओं में से एक ने हमारे ध्यान में लाया कि याचिकाकर्ता द्वारा जांच किए जाने वाले सभी 170 गवाहों की जांच की गई है, जिसमें अंतिम गवाह, जांच अधिकारी शामिल हैं। हमें यह भी अवगत कराया गया है कि ईडी द्वारा अभियोग के लिए एक आवेदन और निपटान तक सुनवाई को स्थगित करने की मांग की गई है। इस संबंध में मामले पर 24 सितंबर 2022 को विचार किया जाएगा। ईडी के निष्कर्ष के बाद अब सीआरपीसी की धारा 313 के तहत आरोपियों के बयान दर्ज करने के मामले पर विचार किया जाना है। इसके  के लिए, अभी तक कोई तारीख तय नहीं की गई है।

पीठ ने कहा कि हस्तक्षेपकर्ता, प्रदीप श्रीवास्तव की ओर से, प्रशांत भूषण ने कहा है कि जांच वांछित होने के लिए बहुत कुछ छोड़ देती है। उनका कहना है कि जांच की गुणवत्ता सही नहीं है। उनका कहना है कि स्वतंत्र एजेंसी में ट्रांसफर होने के बाद भी जांच की प्रक्रिया की निगरानी इस अदालत द्वारा एसआईटी या किसी पदाधिकारी को नियुक्त करके की जाएगी। हमें अभी इन सवालों में जाने की जरूरत नहीं है। पहले, हम याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं, इस पर विचार करेंगे।

छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के समय फूटे नागरिक आपूर्ति निगम-नान घोटाला केस में केंद्र सरकार सक्रिय हो गई है। केंद्र सरकार की एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय-ईडी ने रायपुर की विशेष अदालत में आवेदन देकर सुनवाई रोकने की मांग की है। वहीं केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नान घोटाला केस की जांच में ही फर्जीवाड़े और फोन टैपिंग के आरोपी IPS मुकेश गुप्ता का निलंबन खत्म कर दिया है।

नान घोटाले के तत्कालीन महाप्रबंधक शिवशंकर भट्‌ट और दूसरे आरोपियों के खिलाफ रायपुर की विशेष अदालत में सुनवाई चल रही है। 15 सितम्बर को ईडी की ओर से पेश अधिवक्ता सौरभ कुमार पाण्डेय ने एक आवेदन पेश किया। इसमें कहा गया कि इसी मामले में सर्वोच्च न्यायालय में भी एक मामला चल रहा है। 19 सितम्बर को सुनवाई की तारीख तय है। जब तक सर्वोच्च न्यायालय ईडी की याचिका पर कोई फैसला नहीं दे देता रायपुर की अदालत में सुनवाई को रोक दिया जाए। रायपुर की विशेष अदालत में अब इस मामले की सुनवाई 24 सितम्बर को होनी है।

इसके ठीक एक दिन बाद 16 सितम्बर को केंद्रीय गृह मंत्रालय के अपर सचिव संजीव कुमार ने निलंबित आईपीएस मुकेश गुप्ता का निलंबन रद्द कर दिया है। इसके लिए आधार यह दिया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय ने मुकेश गुप्ता के खिलाफ दर्ज सभी मामलों और अनुशासनात्मक कार्रवाई पर स्थगन दिया हुआ है। मुकेश गुप्ता 30 सितम्बर को सेवानिवृत्त भी हो रहे हैं।सरकार ने फरवरी 2019 में मुकेश गुप्ता को निलंबित किया था। उसके बाद उन पर एक के बाद एक करके तीन एफआईआर हुई।निलंबित आईपीएस मुकेश गुप्ता प्रदेश के दबंग पुलिस अफसरों में शुमार रहे हैं।

दरअसल छत्तीसगढ़ में नागरिक आपूर्ति निगम के जरिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली का संचालन होता है। एंटी करप्शन और आर्थिक अपराध ब्यूरो ने 12 फरवरी 2015 को नागरिक आपूर्ति निगम के मुख्यालय सहित अधिकारियों-कर्मचारियों के 28 ठिकानों पर एक साथ छापा मारा था। वहां से करोड़ों रुपए की नकदी, कथित भ्रष्टाचार से संबंधित कई दस्तावेज, डायरी, कम्प्यूटर की हार्ड डिस्क समेत कई दस्तावेज मिले। आरोप था, राइस मिलों से लाखों क्विंटल घटिया चावल लिया गया और इसके बदले करोड़ों रुपये की रिश्वत ली गई। चावल के भंडारण और परिवहन में भी भ्रष्टाचार किया गया।

शुरुआत में शिवशंकर भट्‌ट सहित 27 लोगों के खिलाफ मामला चला। बाद में निगम के तत्कालीन अध्यक्ष और एमडी का नाम भी आरोपियों की सूची में शामिल हो गया। हालांकि तत्कालीन सरकार ने उन पर मुकदमा चलाने की अनुमति तब दी, जब यह तय हो गया कि राजनीतिक सत्ता बदलने वाली है।

2018 के विधानसभा चुनाव के बाद छत्तीसगढ़ में सत्ता बदल गई। 17 दिसम्बर 2018 को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उसके कुछ ही दिनों बाद नान घोटाले की जांच के लिए एक SIT का गठन किया गया। इस दौरान सामने आया कि नान घोटाले की जांच के दौरान एसीबी के मुखिया मुकेश गुप्ता और एसपी रजनेश सिंह ने फर्जी दस्तावेज किए हैं। अवैध रूप से अफसरों-नेताओं के फोन टेप किए गए हैं। इस आरोप के आधार पर सरकार ने मुकेश गुप्ता और रजनेश सिंह को निलंबित कर दिया। उनके खिलाफ एफआईआर हुआ। उसके बाद से गिरफ्तारी की आशंका में दोनों अधिकारी भूमिगत हो गए। तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक एसआईटी के खिलाफ कोर्ट गए और स्टे ले आए। मुकेश गुप्ता ने सर्वोच्च न्यायालय से कार्रवाई पर स्टे लगवाने में कामयाब हो गए। लेकिन उनके खिलाफ राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में केस किया है।

छत्तीसगढ़ में सरकार बदलने के बाद जनवरी 2019 में नान घोटाले में मनी लॉड्रिंग के आधार पर पहला केस दर्ज किया। बाद में आयकर विभाग ने राज्य सरकार के कुछ अफसरों, यहां के कारोबारियों और ठेकेदारों के ठिकानों पर छापा मारा। बड़ी संख्या में कैश, दस्तावेज बरामद हुए। उसी में एक वॉट्सएप चैट भी सामने आई जिसमें राज्य सरकार के कुछ अधिकारियों और उच्च न्यायालय के एक न्यायिक अधिकारी की नान घोटाला मामले में कथित बातचीत दर्ज है। ईडी इस चैट को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। वहां कोर्ट ने उसे भी पार्टी बनने को कहा। बाद में ईडी भी पक्षकार बनी।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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