Thursday, April 18, 2024

चला गया फुटबॉल का जादूगर

अर्जेंटिना के दिग्गज फुटबॉलर डिएगो माराडोना का दिल का दौरा पड़ने से 60 साल की उम्र में निधन हो गया। इसी महीने की शुरुआत में दिमाग़ में क्लॉटिंग के चलते उनका ऑपरेशन हुआ था। यह ऑपरेशन सफल रहा था। उनके निधन से दुनिया भर में फैले उनके करोड़ों चाहने वालों में शोक की लहर दौड़ गयी है। भारत के कोलकाता शहर में भी फुटबाल प्रेमी बहुत दुखी हो गये हैं। 

लोग भारी मन से अपने प्रिय खिलाड़ी को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। 

मारोडोना 1982 के विश्व कप फ़ुटबॉल से सबसे पहले चर्चा में आए। यह विश्व कप स्पेन में खेला गया था लेकिन उस समय मात्र 21 वर्षीय माराडोना अर्जेंटिना के स्टार खिलाड़ी के रूप में उभर कर आए।

अर्जेंटिना फुटबॉल एसोसिएशन ने शोक जताते हुए कहा, ‘हमारे लिजेंड के निधन से हम शोक में डूबे हैं, आप हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे।’ अर्जेंटिना की ओर से खेलते हुए माराडोना ने 91 मैचों में 34 गोल किए। अर्जेंटिना की ओर से माराडोना ने चार वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया है।

साल 1986 का विश्व कप पूरी तरह माराडोना के नाम रहा। उन्हें टीम की कप्तानी सौंपी गई और वह अकेले दम पर अर्जेंटिना को पहली बार चैंपियन बनाकर लौटे। उन्होंने पांच गोल किए और पांच में मदद की। इससे उन्हें टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का गोल्डन बॉल अवॉर्ड भी मिला। 

सिर्फ उनके देश में ही नहीं, पूरी दुनिया में ‘डिएगो-डिएगो’ का नाम गूंज उठा। माराडोना उस दौर में सबसे लोकप्रिय शख्स बन गए। 

माराडोना ने अर्जेंटिना के लिए 91 मैच खेले जिसमें उन्होंने 34 गोल दागे। इतना ही नहीं, उन्होंने चार विश्व कप में अर्जेंटिना का प्रतिनिधित्व किया।

साल 1997 में अपने जन्मदिन पर फुटबॉल से संन्यास लिया। साल 2008 में लियोन मेस्सी की टीम के कोच बने, पर क्वार्टर फाइनल में टीम हार गई।

जनचौक से जुड़े

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments

Latest Updates

Latest

शिवसेना और एनसीपी को तोड़ने के बावजूद महाराष्ट्र में बीजेपी के लिए मुश्किलें बढ़ने वाली हैं

महाराष्ट्र की राजनीति में हालिया उथल-पुथल ने सामाजिक और राजनीतिक संकट को जन्म दिया है। भाजपा ने अपने रणनीतिक आक्रामकता से सहयोगी दलों को सीमित किया और 2014 से महाराष्ट्र में प्रभुत्व स्थापित किया। लोकसभा व राज्य चुनावों में सफलता के बावजूद, रणनीतिक चातुर्य के चलते राज्य में राजनीतिक विभाजन बढ़ा है, जिससे पार्टियों की आंतरिक उलझनें और सामाजिक अस्थिरता अधिक गहरी हो गई है।

केरल में ईवीएम के मॉक ड्रिल के दौरान बीजेपी को अतिरिक्त वोट की मछली चुनाव आयोग के गले में फंसी 

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय चुनाव आयोग को केरल के कासरगोड में मॉक ड्रिल दौरान ईवीएम में खराबी के चलते भाजपा को गलत तरीके से मिले वोटों की जांच के निर्देश दिए हैं। मामले को प्रशांत भूषण ने उठाया, जिसपर कोर्ट ने विस्तार से सुनवाई की और भविष्य में ईवीएम के साथ किसी भी छेड़छाड़ को रोकने हेतु कदमों की जानकारी मांगी।

Related Articles

शिवसेना और एनसीपी को तोड़ने के बावजूद महाराष्ट्र में बीजेपी के लिए मुश्किलें बढ़ने वाली हैं

महाराष्ट्र की राजनीति में हालिया उथल-पुथल ने सामाजिक और राजनीतिक संकट को जन्म दिया है। भाजपा ने अपने रणनीतिक आक्रामकता से सहयोगी दलों को सीमित किया और 2014 से महाराष्ट्र में प्रभुत्व स्थापित किया। लोकसभा व राज्य चुनावों में सफलता के बावजूद, रणनीतिक चातुर्य के चलते राज्य में राजनीतिक विभाजन बढ़ा है, जिससे पार्टियों की आंतरिक उलझनें और सामाजिक अस्थिरता अधिक गहरी हो गई है।

केरल में ईवीएम के मॉक ड्रिल के दौरान बीजेपी को अतिरिक्त वोट की मछली चुनाव आयोग के गले में फंसी 

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय चुनाव आयोग को केरल के कासरगोड में मॉक ड्रिल दौरान ईवीएम में खराबी के चलते भाजपा को गलत तरीके से मिले वोटों की जांच के निर्देश दिए हैं। मामले को प्रशांत भूषण ने उठाया, जिसपर कोर्ट ने विस्तार से सुनवाई की और भविष्य में ईवीएम के साथ किसी भी छेड़छाड़ को रोकने हेतु कदमों की जानकारी मांगी।