Thursday, October 6, 2022

बेरोजगारी के खिलाफ छात्रों-युवाओं का फूटा सड़कों पर गुस्सा, जगह-जगह लाठीचार्ज और गिरफ्तारियां

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नई दिल्ली/इलाहाबाद। आज 17 सितंबर की दोपहर तक ट्विटर पर टॉप 3 में #nationalUnemployDay, #बेरोज़गार दिवस, और #राष्ट्रीय_जुमला_दिवस ट्रेंड कर रहा है। 

सोशल मीडिया के अलावा देश के कई शहरों में युवा आबादी सड़क पर उतर कर राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस मनाते हुए बेरोज़गारी के खिलाफ़ विरोध-प्रदर्शन कर रही है।

इलाहाबाद में प्रदर्शन कारी छात्रों पर लाठीचार्ज, गिरफ़्तारी

इलाहाबाद के बालसन चौराहे पर ‘राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस’ मनाकर सरकार का विरोध कर रहे छात्रों पर यूपी पुलिस द्वारा लाठी चार्ज किए जाने बाद बड़ी संख्या में गिरफ्तारी की गई है।

गिरफ्तारी का वीडियो अपने ट्विटर हैंडल पर साझा करते हुए इसकी सूचना उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने साझा किया है।

बता दें कि इलाहाबाद के बालसन चौराहे पर सुबह से ही युवा विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। यहां सुबह से ही युवा मंच के नेतृत्व में हजारों की संख्या में युवा प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा शुरु हो गया था। सुबह से ही पुलिस की कई गाड़ियां प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थीं। बावजूद इसके बेरोज़गार युवा आबादी में यूपी पुलिस का कोई खौफ़ नहीं है। लगातार सायरन और पुलिस के बीच छात्र अपने शांतिपूर्वक आंदोलन पर अड़े हुए हैं। इलाहाबाद के बालसन चौराहे पर बेरोज़गारों की सारी तस्वीरें ये बता रही हैं कि संविदा भर्ती किसी ड्रैकोनियन कानून से कम नहीं है।

इसमें शामिल छात्र किसी विशेष संगठन से संबंधित नहीं हैं बल्कि युवा मंच के आह्वान पर एकत्रित हुए हैं। अल्लापुर, बघाड़ा, सलोरी, गोविंदपुर, आदि जगहों से आने वाले कई हज़ारों छात्रों की भीड़ लगातार जुड़ती ही जा रही है, ये तस्वीर 12.30 बजे तक की है। चौराहे पर पार्क के अंदर जगह कम पड़ने के कारण कई छात्र और छात्राएं सड़क की दूसरी तरफ़ खड़े हैं।

इलाहाबाद ही नहीं यूपी के दूसरे शहरों में भी प्रदर्शन हो रहा है। बेरोजगार युवाओं ने श्रम व रोजगार मंत्री #संतोष_गंगवार के संसद क्षेत्र मुख्यालय बरेली में जोरदार प्रदर्शन करते हुए  #राष्ट्रीय_बेरोजगारी_दिवस मना रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बेरजोगार युवा एक दूसरे का मुंह काला करके राष्ट्रीय रोजगार दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन मना रहे हैं। 

लखनऊ में एनएसयूआई के छात्रों ने प्रदर्शन करने के बाद गिरफ्तारी दी है। जबकि गोरखपुर में उनके कार्यकर्ताओं ने रोजगार दफ्तर पर ताला जड़ दिया है।

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को ज्ञापन

विरोध कार्यक्रम के बाद जिलाधिकारी के मार्फ़त एक ज्ञापन मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को भेजा गया। इस ज्ञापन पत्र में लिखा है-

 “युवा मंच समेत छात्र-युवा संगठनों द्वारा 17 सितंबर को आयोजित रोजगार अधिकार दिवस के मौके पर जिला प्रशासन के माध्यम से प्रेषित ज्ञापन के माध्यम से आपका ध्यान प्रदेश में गहराते जा रहे आजीविका के गंभीर संकट की ओर आकृष्ट कराना चाहते हैं। महोदय 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने वादा किया था कि 90 दिनों के भीतर सभी खाली पदों पर चयन प्रक्रिया शुरू होगी और 5 साल में 70 लाख नये रोजगार का सृजन होगा। लेकिन प्रदेश में सरकारी आंकड़ों के विपरीत जमीनी हकीकत बहुत बुरी है।

सरकारी दावे जो भी हों लेकिन सच्चाई यह है कि प्रदेश में विगत 3.5 साल से चयन प्रक्रिया ठप जैसी है। हालात ऐसे हैं कि पूर्ववर्ती सरकार के दौर में शुरू हुई भर्तियां भी अभी तक अधर में हैं और युवाओं द्वारा आरोप लगाया जा रहा है कि चयन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों द्वारा जानबूझकर इन भर्तियों को लटकाया जा रहा है। कुल मिलाकर प्रदेश में रोजगार सृजन की स्थिति बहुत बुरी है। ऐसे में युवाओं में भारी रोष पहले से है, लेकिन इसी दरम्यान सरकारी नौकरी के पूर्व संविदा पर रखने के प्रस्ताव ने युवाओं के जले पर नमक छिड़कने का काम किया है और इस प्रस्ताव से युवाओं में भारी नाराजगी है। 

ज्ञापन के जरिए आंदोलनरत बेरोजगार युवाओं की प्रमुख माँगे

1: सरकारी नौकरी में संविदा पर रखने के प्रस्ताव को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाये।

2: माध्यमिक, उच्चतर, प्राथमिक, पुलिस समेत प्रदेश में सभी विभागों में खाली पदों का विज्ञापन जारी किया जाए।     

3: सभी लंबित भर्तियों को जल्द से जल्द पूरा किया जाये।                                                    

4: सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आदेशित 8300/ 2018 तदर्थ शिक्षकों के पदों का अधियाचन मँगा कर विज्ञापन जारी किया जाए साथ ही साथ निश्चित समय सीमा में भर्ती पूरी की जाए । 

5: रोजगार को मौलिक अधिकार बनाने के लिए प्रदेश सरकार प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को  प्रेषित करे।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं

आज राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस और राष्ट्रीय जुमला दिवस के अवसर पर सोशल मीडिया पर लगातार तरह तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। पत्रकार रोहिणी सिंह ट्वीट करते हुए लिखती हैं- “प्रधानमंत्री जी, आपको जन्मदिवस मुबारक। आज जो छात्र सड़कों पर हैं वो आपके दुश्मन नहीं हैं, इनमें से बड़ी संख्या में लोगों ने 2014 में आपके लिए नारे लगाए, 2019 में आप पर भरोसा जताया, अब आपकी बारी है। इन्हें अपना दुश्मन मत मानिए, इनके ‘मन की बात’ सुनिए। #राष्ट्रीय_बेरोजगार_दिवस।”

लखनऊ में गिरफ्तारी का दृश्य।

एक दूसरे ट्वीट में वो वर्तमान छात्र आंदोलन को छात्रों के आंदोलन के इतिहास से जोड़कर लिखती हैं- “छात्रों के नेतृत्व में स्वदेशी आंदोलन ने अंग्रेज सरकार को हिला कर रख दिया, गांधी जी के असहयोग आंदोलन से छात्रों ने अंग्रेजों की कमर तोड़ दी, चिपको आंदोलन से देश जगाया, आपातकाल में देश की आवाज बने, जब जब बोले तब तब भारत बदला। भारत का छात्र फिर बोल रहा है!”

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव छात्र आंदोलन को समर्थन देते हुए कहते हैं- “बेरोजगार युवाओं ने बिहार के कृषि मंत्री और सत्ताधारी विधायक से सवाल किया तो जवाब देने की बजाय वो भाग खड़े हुए। युवा अपने हक़-अधिकार और नौकरी-रोजगार के लिए जाग चुका है। 15 वर्षों की NDA सरकार जवाब दे, बिहार के करोड़ों युवा नौकरी से वंचित क्यों है?”

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी लिखती हैं- “वाह री सरकार। पहले तो नौकरी ही नहीं दोगे। जिसको मिलेगी उसको 30-35 से पहले नहीं मिलेगी। फिर उस पर 5 साल अपमान वाली संविदा की बंधुआ मजदूरी। और अब कई जगहों पर 50 वर्ष पर ही रिटायर की योजना। युवा सब समझ चुका है। अपना हक मांगने वो सड़कों पर उतर चुका है।”

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