Saturday, August 13, 2022

मोदी सरकार का दोहरा रवैया क्यों! देश में तालिबान के नाम पर दंगा और सुरक्षा परिषद में मान्यता!

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संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी राजदूत रहे सैयद अकबरुद्दीन ने अपने ट्विटर हैंडल पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 27 अगस्त और 16 अगस्त के बयानों के स्क्रीनशॉट साझा करते हुये लिखा है कि “कूटनीति में एक पखवाड़ा काफ़ी लंबा समय होता है। ‘टी’ शब्द ग़ायब है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 16 और 27 अगस्त के बयान की तुलना कीजिये।”

गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 27 अगस्त को जारी अपने बयान में, 16 अगस्त के बयान में तब्दीली करते हुए ‘तालिबान’ शब्द को हटा दिया है। यह तब्दीली महज 11 दिन के अंदर की गयी है। गौरतलब है कि काबुल एयरपोर्ट पर बम धमाकों में 150 से अधिक लोगों के मारे जाने के एक दिन बाद 27 अगस्त को UNSC अध्यक्ष तिरुमूर्ति ने एक बार फिर सुरक्षा परिषद की ओर से बयान जारी किया था। इस बयान में 16 अगस्त वाले बयान का भी ज़िक्र था लेकिन उसमें ‘तालिबान’ का कहीं कोई ज़िक्र नहीं है। आपको बता दें कि भारत इस समय अगस्त माह के लिए सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष है।

27 अगस्त को जारी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का ताजा बयान इस प्रकार है

“सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने अफ़ग़ानिस्तान में आतंकवाद का मुक़ाबला करने के महत्व को दोहराया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अफ़ग़ानिस्तान के क्षेत्र का इस्तेमाल किसी भी देश को धमकी देने या हमला करने के लिए न हो, और किसी भी अफ़ग़ान समूह या व्यक्ति को किसी भी देश के क्षेत्र में सक्रिय आतंकवादियों का समर्थन नहीं करना चाहिए।”

अब एक नज़र 16 अगस्त (राजधानी काबुल पर तालिबान के नियंत्रण के एक दिन बाद) को संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने UNSC की ओर से जारी बयान पर एक नज़र –

“सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने अफ़ग़ानिस्तान में आतंकवाद से लड़ने के महत्व की पुष्टि की है और यह भी माना है कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि अफ़ग़ानिस्तान के किसी भी क्षेत्र को किसी भी देश को धमकाने या उस पर हमले के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। और यहाँ तक कि तालिबान या किसी भी अफ़ग़ान समूह या किसी भी व्यक्ति को किसी अन्य देश में सक्रिय आतंकी का समर्थन नहीं करना चाहिए।”

बता दें कि अगस्त महीने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता भारत के पास ही है और उसने ही दोनों बयानों पर हस्ताक्षर किए हैं।

क्या तालिबान पर बदल गयी है भारत की राय

भारत की अध्यक्षता वाले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के ताजा बयान से  ‘तालिबान’ शब्द का आतंकी के संदर्भ से हटाया जाना इस बात को पुख्ता करता है कि भारत सरकार का स्टैंड तालिबान के प्रति न सिर्फ़ नर्म हुआ है बल्कि वो तालिबान को स्टेट अथॉरिटी के तौर पर भी देख रहे हैं। यह तालिबान को लेकर सिर्फ़ भारत का ही नहीं बल्कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के झंडे तले आने वाले सभी देशों के बदले रुख को दर्शाता है।

तालिबान का समर्थन करने वालों पर देश में हो रही है कार्रवाई

इसे भारत सरकार का दोगलापन नहीं तो और क्या कहें। एक ओर भारत की अध्यक्षता वाली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद अपने बयान में ‘आतंकी के संदर्भ में तालिबान’ शब्द को हटाकर उसे स्टेट अथॉरिटी की मान्यता देने की फिराक़ में है और दूसरी ओर देश में तालिबान का समर्थन करने वालों को जेल में ठूंसा जा रहा है।

सोशल मीडिया पर अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के अधिग्रहण का कथित रूप से समर्थन करने के लिए असम पुलिस द्वारा अब तक 16 मुसलमानों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज़ किया गया है 20 अगस्त से 23 अगस्त के बीच गिरफ्तार किए गए 16 आरोपियों में एक 23 वर्षीय एमबीबीएस छात्र, असम पुलिस में एक कांस्टेबल, एक शिक्षक और एक पत्रकार शामिल हैं। सभी पर आतंकवाद विरोधी कानून, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया है और उन्हें असम के 12 जिलों से गिरफ्तार किया गया है- दरांग, कामरूप (ग्रामीण), कछार, बरपेटा, बक्सा, धुबरी, हैलाकांडी, दक्षिण सालमारा, गोवालपारा, होजाई, करीमगंज और कामरूप (मेट्रो)।

गिरफ्तार लोगों में तीन मौलाना भी शामिल हैं और उनमें से एक 49 वर्षीय मौलाना फजुल करीम राज्य के विपक्षी दल ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के महासचिव और जमीयत की राज्य इकाई के सचिव भी थे। हालांकि करीम को पार्टी से निलंबित कर दिया गया है।

कामरूप (ग्रामीण) से 21वीं असम पुलिस इंडिया रिजर्व बटालियन के कांस्टेबल हकबकर सिद्दीकी उर्फ अफ़गा खान अविलेख (55) और सैदुल हक (29) को  को दो दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

17 अगस्त को वेस्टर्न यूपी के क्षेत्रीय भाजपा उपाध्यक्ष राजेश सिंघल की शिकायत पर सदन कोतलावी में सपा सांसद डॉ शफीकुर्रहमान बर्क समेत कई सपा नेताओं के ख़िलाफ़ केस दर्ज़ किया गया। बता दें कि सपा सांसद ने अफ़ग़ानिस्तान के काबुल पर तालिबानी कब्जे को उन्होंने सही ठहराया था।

19 अगस्त गुरुवार को एक टीवी डिबेट में अफ़ग़ानिस्तान के हालात को भारत से बेहतर बताने, तालिबान की तुलना RSS, BJP और बजरंग दल से करने, अफ़ग़ानिस्तान से ज्यादा क्रूरता हिंदुस्तान में बताने, अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान का के को उसका अंदरूनी मसला बताने पर मशहूर शायर मुनव्वर राना केे ख़िलाफ़ अखिल भारत हिंदू महासभा के अध्यक्ष शिशिर चतुर्वेदी ने शुक्रवार को लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में केस दर्ज करवाया है।

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