Wednesday, August 17, 2022

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो-4: एनसीबी अधिकारी नहीं जानते कि व्हॉटसऐप चैट पर्याप्त सबूत नहीं होता

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नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी)द्वारा तीन अक्टूबर को मुंबई के तट के पास, गोवा जा रहे एक क्रूज़ पोत पर छापेमारी के बाद शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान और कुछ अन्य लोगों की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में 25करोड़ रुपये की वसूली के प्रयास के आरोप लग रहे हैं। एक ओर अडानी के मुन्द्रा पोर्ट से 21 हजार करोड़ मूल्य के 30 टन ड्रग्स (नशीले पदार्थ) पकड़े जाने पर अभी तक न तो पोर्ट के मालिक गौतम अडानी से न ही मुन्द्रा पोर्ट पर तैनात उनकी कम्पनी के आला अधिकारियों से एनसीबी या देश की किसी जांच एजेन्सी ने औपचारिक पूछताछ तक की है। वहीं आर्यन खान के पास से एक ग्राम ड्रग्स तक की बरामदगी न होने के बावजूद तीन हफ्तों से बाम्बे के आर्थर रोड जेल में निरुद्ध करके रखा गया और पूरा केस व्हॉटसऐप चैट पर आधारित बनाया गया, जिसे मुंबई की एक विशेष अदालत ने पूरी तरह ख़ारिज कर दिया।

इससे सवाल उठ रहा है कि क्या एनसीबी के अधिकारी नारकोटिक्स कानून के प्रति कोई विशेष जानकारी रखते हैं अथवा नहीं? इससे ऐसा प्रतीत होता है कि एनसीबी के अधिकारियों को भारतीय साक्ष्य अधिनियम की पर्याप्त जानकारी नहीं है क्योंकि साक्ष्य अधिनियम में व्हॉटसऐप चैट को सेकेंडरी साक्ष्य माना जाता है प्राथमिक साक्ष्य नहीं। वॉट्सऐप चैट को सबूत माना जा सकता है, लेकिन इसकी कुछ शर्तें होती हैं। इंडियन एविडेंस एक्ट 1872 के सेक्शन 65, 65बी के अनुसार एक सेकेंडरी एविडेंस का प्रोविजन है। अगर कोर्ट में परमिशन दी जाती है तो इनका इस्तेमाल किया जा सकता है और इसके साथ ही कई टेक्निकल कंडीशन भी होती है, जैसे इससे बेहतर कोई भी सबूत नहीं था। इंडियन एविडेंस एक्ट के सेक्शन 62 और 63 में प्राइमेरी और सेकेंडरी एविडेंस के बारे में बताया गया है। प्राइमेरी एविडेंस कुछ ऐसे दस्तावेज होते हैं, जो मूल रूप में ही कोर्ट में पेश किए जाते हैं। वहीं, सेकेंडरी एविडेंस में प्रमाणित प्रतियां या ऑरिजनल कंटेंट के ओरल कंटेंट शामिल किए जाते हैं।

इसके लिए कई तरह की शर्तें होती हैं, जो सेक्शन 65बी में बताई गई हैं। इन शर्तों के अनुसार, जिस डिवाइस से मैसेज क्रिएट किए गया है, वो रेग्युलर यूज में होना चाहिए। साथ ही उन संदेशों को सबूत माना जाता है, जो सामान्य रूप से उपयोग में लिए जाते हैं। साथ ही डिवाइस की स्थिति और ऑरिजनल से बिल्कुल हूबहू डुप्लीकेट कॉपी होनी चाहिए। आर्यन खान मामले की जब सुनवाई हो रही थी तब कहा गया था की व्हॉटसऐप चैट दो वर्ष पुराने हैं।

विशेष अदालत ने अपने विस्तृत आदेश- जिसकी एक प्रति रविवार को उपलब्ध कराई गई थी, में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के पंचनामा रिकॉर्ड की सत्यता पर भी सवाल उठाया गया है और कहा गया है कि वे मनगढ़ंत और संदिग्ध लग रहे थे। मुंबई क्रूज ड्रग्स केस में मुंबई की एक विशेष अदालत ने पिछले हफ्ते आचित कुमार को जमानत देते हुए कहा कि केवल व्हाट्सएप चैट के आधार पर यह नहीं पाया जा सकता है कि उसने बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान और अरबाज मर्चेंट को ड्रग्स की आपूर्ति की थी।

नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम से संबंधित मामलों की सुनवाई के लिए नामित विशेष न्यायाधीश वी वी पाटिल ने शनिवार को 22 वर्षीय आचित कुमार को जमानत दे दी थी। अदालत ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि आर्यन खान के साथ व्हाट्सएप चैट के अलावा, आचित कुमार के ऐसी गतिविधियों में शामिल होने का कोई सबूत नहीं है।

आदेश में कहा गया है कि केवल व्हाट्सएप चैट के आधार पर, यह नहीं कहा जा सकता है कि आवेदक आचित कुमार आरोपी नंबर 1 और 2 (आर्यन खान और अरबाज मर्चेंट) को कंट्राबेंड की आपूर्ति करता था, खासकर जब आरोपी नंबर 1, जिसके साथ व्हाट्सएप चैट हो, को उच्च न्यायालय द्वारा जमानत दिया जा चुका हो। 3 अक्टूबर को क्रूज ड्रग्स मामले में गिरफ्तार किए गए आर्यन खान और अरबाज मर्चेंट को पिछले गुरुवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत दे दी थी। विशेष अदालत ने यह भी कहा कि आचित कुमार के खिलाफ मामले के किसी अन्य आरोपी के साथ उसे जोड़ने का कोई सबूत नहीं है।

अदालत ने कहा कि पंचनामा गढ़ा गया है और इसे मौके पर तैयार नहीं किया गया था। इसलिए, पंचनामा के तहत दिखाई गई वसूली संदिग्ध है और इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। आदेश में कहा गया है कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत नहीं है जो दर्शाता हो कि आवेदक (कुमार) ने आरोपी नंबर 1 (आर्यन खान) या किसी को ड्रग्स की आपूर्ति की थी और इसलिए, आवेदक जमानत पर रिहा होने का हकदार है। एनसीबी ने कुमार के आवास से 2.6 ग्राम गांजा बरामद करने का दावा किया था। ड्रग रोधी एजेंसी के मुताबिक कुमार आर्यन खान और मर्चेंट को गांजा और चरस सप्लाई करता था।

विशेष अदालत ने इस मामले में किसी भी षड्यंत्र की संभावना को ख़ारिज करते हुए बीते शनिवार को नौ लोगों को ज़मानत दे दी। एनसीबी ने दो अक्टूबर को क्रूज़ जहाज़ पर छापेमारी कर प्रतिबंधित मादक पदार्थ जब्त करने का दावा किया था। इस मामले में गिरफ़्तार अभिनेता शाहरुख़ ख़ान के बेटे आर्यन ख़ान को कुछ दिन पहले ही ज़मानत मिली है।

एनसीबी की ओर से दाखिल किए गए पंचनामे पर भी अदालत ने सवाल खड़े किए हैं। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि पंचनामा गढ़ा गया है। यह मौके पर तैयार नहीं किया गया है। इसलिए इसमें दिखाई गई वसूली संदिग्ध है, जिस कारण पंचनामा पर भरोसा नहीं किया जा सकता है।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने आरोप लगाया था कि कुमार इन लोगों को ड्रग्स सप्लाई करते थे। हालांकि कोर्ट ने कहा कि एनसीबी अपनी इन दलीलों के समर्थन में साक्ष्य मुहैया कराने में विफल रहा है। ऐसा दर्शाने के लिए कोई अन्य सबूत नहीं है कि आवेदक (आचित कुमार) इस तरह की गतिविधि में शामिल था। केवल वॉट्सऐप चैट के आधार पर यह पता नहीं चल सकता है कि आवेदक प्रतिबंधित सामग्री की आपूर्ति करता था।

विशेष न्यायाधीश वीवी पाटिल की तरफ से शनिवार को 9 आरोपियों की जमानत मंजूर की गई थी। 9 में से 5 आरोपियों को लेकर जारी आदेश में कोर्ट ने कहा है कि इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि वे साजिश में शामिल थे। इससे पहले 20 अक्टूबर को आर्यन, मर्चेंट और धामेचा की जमानत याचिका को नामंजूर करते हुए विशेष अदालत ने एनसीबी की दलीलें मानी थीं। उस दौरान ब्यूरो ने कहा था कि सभी आरोपी एक तार से जुड़े हुए हैं। एनसीबी ने कथित रूप से कुमार को 2.6 ग्राम गांजा के साथ गिरफ्तार किया था। ब्यूरो ने दावा किया था कि उन्हें खान के फोन से व्हाट्सऐप चैट बरामद हुई थी। दावा किया गया था कि कुमार एक ‘पैडलर’था और शहर के ‘गांजा तस्करी नेटवर्क’का हिस्सा था।

अदालत ने इवेंट मैनेजमेंट कंपनी केनप्लस ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े चार लोगों की जमानत मंजूर की है। कोर्ट ने आदेश दिया कि ऐसा कुछ भी पेश नहीं किया गया, जो यह साबित कर सके कि इन लोगों ने अपराधियों को जहाज पर पनाह या आर्थिक मदद दी थी। इसमें बताया गया है कि कॉर्डेलिया क्रूज टीम और स्पॉन्सर्स में से किसी को भी मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है। दिल्ली निवासी और कंपनी के निदेशक समीर सहगल और गोपालजी आनंद और कर्मचारियों मानव सिंहल और भास्कर अरोरा मामले में आरोपी थे। इवेंट कंपनी से जुड़े चार लोगों की जमानत के विरोध में एनसीबी ने दावा किया कि वे यात्रियों और कथित रूप से रेव जैसी पार्टी के बारे में जानते थे।

गिरफ्तार हुए 20 लोगों की जमानत को अब तक मंजूर किया जा चुका है। इनमें वे 14 लोग भी शामिल हैं, जिनके पास से कथित रूप से कुछ मात्रा में ड्रग्स पाया गया था। कुमार और कंपनी से जुड़े चार लोगों को शनिवार को जेल से रिहा किया गया। जबकि, धामेचा और मर्चेंट रविवार को जेल से छूटे।

दरअसल बॉलीवुड वसूली का सॉफ्ट टारगेट है जहाँ दाउद, रविपुजारी और अन्य माफिया तत्वों द्वारा जबरन वसूली की जाती है तो भला एनसीबी कैसे पीछे रहती। एनसीबी का नाम अब नारकोटिक्स कंट्रोल (वसूली) ब्यूरो बनता जा रहा है।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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