Wednesday, August 10, 2022

नई फोरेंसिक रिपोर्ट ने भी की पुष्टि, रोना विल्सन के फोन पर पेगासस से हुआ था 49 बार हमला

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नई दिल्ली। भीमा कोरेगांव मामले में डिफेंस वकीलों की सहायता कर रही बोस्टन आधारित फोरेंसिक जांच फर्म आर्सेनल कंसल्टिंग ने इस बात की पुष्टि की है कि रोना विल्सन के आई फोन पर पेगासस स्पाईवेयर के जरिये कई बार हमला किया गया था। फोरेंसिक रिपोर्ट ने इसके पहले यह दिखाया था कि दूसरे आरोपियों को फंसाने के लिए उनके कंप्यूटर में सबूत प्लांट किए गए थे।

मौजूदा रिपोर्ट 5 जुलाई 2017 और 10 अप्रैल 2018 के बीच विल्सन के आई फोन पर पेगासस के 49 अलग-अलग हमलों की घटनाओं को चिन्हित करती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई बार इन हमलों के दौरान वह आई फोन का सुरक्षा चक्र तोड़कर उसमें घुसने में भी कामयाब रहा। आर्सेनल की पहले की रिपोर्ट में यह दिखाया गया था कि विल्सन का कंप्यूटर 13 जून, 2016 और 17 अप्रैल, 2018 के बीच, नेटवायर रिमोट एक्सेस ट्रोजन के जरिये हैक किया गया था। यह सब कुछ उनके कंप्यूटर में उन्हें दोषी सिद्ध करने वाली फाइल को प्लांट करने के मकसद से किया गया था। रिपोर्ट बताती है कि यही सारी चीजें एक दूसरे आरोपी सुरेंद्र गाडलिंग के कंप्यूटर में भी की गयी थीं। आर्सेनल ने इस बात की भी पुष्टि की कि विल्सन और गाडलिंग ने सवालों के घेरे वाली इन फाइलों को कभी नहीं खोला।

इस तरह से कहा जाए तो विल्सन 2017 और 2018 में पेगासस के जरिये निगरानी और नेटवायर आरएटी के जरिये सबूत प्लांटिंग दोनों के निशाने पर थे।

आपको बता दें कि भीमा कोरेगांव केस में 16 प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता, वकील, स्कॉलर और कलाकार काले कानून यूएपीए के तहत पिछले तीन सालों से बगैर किसी ट्रायल के जेल में बंद हैं। इस मसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए डिफेंस टीम के वकील मिहिर देसाई ने कहा कि “ श्री विल्सन के कंप्यूटर और फोन पर दो सालों से जारी दोहरा हमला न केवल चौंकाने वाला है बल्कि यह कुछ ऐसा है जिसे उन सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं को याद रखना चाहिए कि अवैध साइबर हमले निर्दोष नागरिकों को कथित अपराधी में बदल सकते हैं और फिर उसके बाद उन्हें अनिश्चित काल के लिए जेल में बंद किया जा सकता है”।

नई रिपोर्ट सामने आने के बाद मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल ने कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है। और इसके साथ ही उसने कई सवाल खड़े किए हैं:

1.   नेटवायर हमले और सबूत प्लांटिंग के खुलासे को अब तकरीबन 300 दिन बीत गए हैं और पेगासस हमले की रिपोर्ट को 150 दिन हो गए हैं। दोनों एक साथ मिलकर यह अपने किस्म का बेहतरीन दस्तावेजित साइबर अपराध का केस हो गया है जिसमें भारतीय आपराधिक न्यायिक व्यवस्था और उसके नागरिकों के अधिकारों के साथ समझौता किया गया है। फिर भी सरकार अभी भी इस पर मौन धारण किए हुए है। क्यों?

2.   इन रिपोर्टों के बाद सामान्य समझ के हिसाब से भी एनआईए को उन सभी लोगों के डिवाइसेज की फिर से जांच करनी चाहिए थी और उन्हें प्रकाशित करना चाहिए था जिन्हें उसने भीषण अपराधों के आरोप में पकड़ रखा है। सामान्य एंटी वायरस साफ्टवेयर नेटवायर मालवेयर को पकड़ सकता है और एमनेस्टी इंटरनेशनल सिक्योरिटी लैब ने इस बात को दस्तावेजित किया है कि कैसे पेगासस हमले और इंफेक्शन को पहचाना जा सकता है। यहां तक कि अगर एनआईए इन पहलुओं की जांच करने की भी परवाह नहीं करता है तो कैसे वह इस बात का दावा कर सकता है कि उसकी कार्यवाहियां वैध हैं?

3.   विल्सन के आईफोन पर पहला पेगासस हमला पीएम मोदी के इजरायल, जहां पेगासस की निर्माता कंपनी एनएसओ समूह का मुख्यालय स्थिति है, दौरे के दूसरे दिन हुआ। क्या यह महज एक इत्तफाक था? एनएसओ ने बार-बार इस बात को दोहराया है कि वह पेगासस को केवल सरकारों को बेचता है और उसकी सभी बिक्रियां इजरायली सरकार के अनुमोदन के अधीन होती हैं। एनएसओ समूह की सेवाओं से समझौते या फिर भारतीय नागरिकों पर हमले के लिए क्या वहां पीएम की टीम के सदस्य थे जिन्हें इस काम को करने के लिए सरकार की तरफ से अधिकृत किया गया था? या फिर वहां प्राइवेट साइबर सिक्योरिटी एक्टर्स थे जिसमें साइबर सिक्योरिटी फर्म भी शामिल हैं जिसके साथ सरकार समझौता करती है, और वो प्रतिनिधमंडल के हिस्से थे? इन सब सवालों पर सरकार ने क्यों बिल्कुल सोची-समझी चुप्पी बना रखी है? 

पीयूसीएल के राष्ट्रीय महासचिव वी सुरेश का कहना है कि इन स्थितियों पर जबकि हमारे पास इस बात के बिल्कुल पुख्ता सबूत हैं कि वहां ऐसे नागरिक हैं जिन पर नेटवायर और पेगासस दोनों द्वारा हमला किया गया है। यह बेहद महत्वपूर्ण है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त की गयी कमेटी दोनों हमलों के बीच किसी तरह के रिश्ते और भीमा कोरेगांव केस पर पड़ने वाले उसके प्रभाव की जांच करती है। आर्सेनल द्वारा एक साथ ली गयी चार रिपोर्टों के बाद इस बात में संदेह की गुंजाइश बहुत कम रह जाती है कि भीमा कोरेगांव मामले में सरकार के पास कोई पुख्ता सबूत नहीं है। कम से कम सभी आरोपियों को तत्काल जमानत दी जानी चाहिए।

पृष्ठभूमि:

इस साल की 20 जुलाई को द वायर और वाशिंगटन पोस्ट ने खुलासा किया था कि विल्सन समेत भीमा कोरेगांव के 8 आरोपी और उनके परिवार के ढेर सारे सदस्य और मित्र पेगासस के संभावित हमलों के शिकार थे। बहरहाल अब जबकि सवालों के घेरे में आया डिवाइस- विल्सन का आईफोन- एनआईए के कब्जे में है। ऐसे में इसकी पुष्टि नहीं हो सकती है। आर्सेनल अपनी जांच के तहत उसी समय विल्सन के हार्ड ड्राइव पर उनके फोन के आईट्यून बैकअप का परीक्षण करता है। और पाता है कि उनके फोन पर वास्तव में हमला किया गया था। आर्सेनल के नतीजे की एमनेस्टी इंटरनेशनल सिक्योरिटी लैब, जिसने पेगासस हमले और इंफेक्शन को पहचानने के लिए प्राथमिक टेक्निक विकसित की, द्वारा पुष्टि की गयी थी।

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