Sunday, December 4, 2022

आजम खान को तो सजा मिल गयी, लेकिन हेट स्पीच के अन्य आरोपियों को कब मिलेगी?

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समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और रामपुर से विधायक आजम खान को एमपी-एमएलए कोर्ट ने 3 साल की जेल की सजा सुनाई है। आजम खान के अलावा कोर्ट ने 2 अन्य लोगों को भी सजा सुनाई है और 2000 रुपए का जुर्माना लगाया है। हालांकि, आजम खान को जमानत मिल गई है लेकिन स्पीकर ने आजम खां की विधान सभा की सदस्यता समाप्त कर दी है। जमानत मिलने पर आजम खान ने कहा कि “मैं इंसाफ का कायल हो गया”। सवाल है कि आजम खान के अलावा देश में हेट स्पीच देने वाले नेताओं की एक लंबी जमात है, जिसमें विधायक, सांसद से लेकर केंद्रीय मंत्री तक शामिल हैं, क्या उन्हें भी सजा मिलेगी?

एडीआर की रिपोर्ट (2018) में देश के 58 विधायक और सांसदों ने खुलासा किया कि उनके ऊपर नफरत फैलाने वाले भाषण देने के मामले दर्ज हैं। इनमें बीजेपी नेताओं की संख्या सबसे अधिक है। रिपोर्ट के मुताबिक लोकसभा के 15 मौजूदा सदस्यों ने अपने खिलाफ नफरत फैलाने वाले भाषण को लेकर मामला दर्ज होने की बात स्वीकारी है। इनमें से 10 लोकसभा सांसद बीजेपी से ताल्लुक रखते हैं। जबकि एक-एक सांसद एआईयूडीएफ, टीआरएस, पीएमके, एआईएमआईएम और शिवसेना से हैं। 2018 की एडीआर रिपोर्ट में कहा गया है  कि बीजेपी के 27, एआईएमआईएम और टीआरएस के 6-6, टीडीपी और शिवसेना के 3-3, टीएमसी, कांग्रेस और जेडीयू के 2-2, एआईयूडीएफ, बीएसपी, डीएमके, पीएमके और सपा के 1-1 सांसदों और विधायकों पर हेट स्पीच से जुड़े मामले दर्ज हैं।

सबसे तजा मामला अक्टूबर 2022 का है। दिल्ली में विश्व हिंदू परिषद ने एक कार्यक्रम आयोजित किया था इसमें बीजेपी सांसद परवेश वर्मा ने भाषण दिया था और एक समुदाय विशेष को निशाना बनाया था। उन्होंने विशेष समुदाय के लोगों की दुकानों, रेहड़ी से सामान ना लेने और पूर्ण बहिष्कार करने की अपील की थी। इस दौरान गाजियाबाद के लोनी विधानसभा से बीजेपी विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने भी विवादित बयान दिया था। उन्होंने दादरी में मारे गए अखलाक को सुअर कहा और फिर कहा-हमें जेहादियों को मारना होगा।

इस महीने की शुरुआत में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीजेपी नेता संगीत सोम ने विवादित बयान दिया था। संगीत सोम ने कहा था कि जिस तरह एक वर्ग की आबादी बढ़ती जा रही है, जिस तरह से आतंक फैलता जा रहा है, ऐसे में राजपूत समाज को फिर से शस्त्र उठाने पड़ेंगे। सोम साल 2013 में मुजफ्फरनगर में हुए दंगों के अभियुक्त भी हैं।

जून, 2022 में तेलंगाना के बीजेपी विधायक राजा सिंह ने पैगंबर मोहम्मद पर एक विवादित बयान दिया था। उनके बयान के खिलाफ हैदराबाद में धार्मिक भावनाएं आहत करने का केस दर्ज किया गया था। राजा सिंह का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसे लेकर मुस्लिम समुदाय ने राजा सिंह की गिरफ्तारी की मांग की थी। राजा सिंह को गिरफ्तार किया गया था। बीजेपी ने उन्हें निलंबित कर दिया था, लेकिन पार्टी से बाहर का रास्ता नहीं दिखाया।

मई, 2022 में बीजेपी प्रवक्ता नूपुर शर्मा ने पैगंबर मोहम्मद पर विवादित बयान दिया था। इनके साथ ही दिल्ली बीजेपी के मीडिया प्रमुख रहे नवीन जिंदल ने भी मुस्लिम समुदाय को लेकर आपत्तिजनक बयानबाजी की थी। इसके बाद मुस्लिम समुदाय ने जोरदार प्रदर्शन किए थे, और बीजेपी को नूपुर और नवीन को पार्टी से बाहर निकालना पड़ा था, लेकिन उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई थी।

मई के महीने में ही तेलंगाना बीजेपी के अध्यक्ष बंडी संजय कुमार ने मुसलमानों के खिलाफ नफरती बयानबाजी करते हुए कहा था कि जब पूरी तरह राम राज्य आ जाएगा तो उर्दू भाषा को बैन कर दिया जाएगा। उन्होंने देश में हुए बम धमाकों के लिए मदरसों को जिम्मेदार ठहराया था।

अगस्त 2021 में दिल्ली बीजेपी के पूर्व प्रवक्ता और सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय ने ‘औपनिवेशिक युग के कानूनों के खिलाफ’ एक रैली आयोजित की थी। इसमें समान नागरिक संहिता का समर्थन किया गया था। लेकिन, इस रैली में मुसलमानों के खिलाफ भड़काऊ नारे लगाए गए थे। इस मामले में बवाल मचने के बाद आयोजकों ने खुद को इससे अलग कर लिया था।

फरवरी, 2020 में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ दिल्ली के जाफराबाद में प्रदर्शन के दौरान बीजेपी नेता कपिल मिश्रा का वीडियो सामने आया था। कपिल मिश्रा ने पुलिस से कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जाने के बाद हम आपकी भी नहीं सुनेंगे। ट्रंप जिस दिन भारत आए थे, उसी दिन हिंसा भड़क गई थी। आज भी कपिल मिश्रा आजाद हैं।

जनवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ साल 2019 के आखिर में और 2020 की शुरुआत में देश के कई शहरों में जोरदार प्रदर्शन हुए थे। इस दौरान दिल्ली विधानसभा के चुनाव भी हो रहे थे। तभी केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर की जनसभा में देश के गद्दारों को, ‘गोली….मा…सा…को…’ वाला नारा लगा था। इसकी जमकर आलोचना हुई थी। लेकिन कानून से सजा नहीं मिली। इसके अलावा सांसद परवेश वर्मा ने शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। परवेश वर्मा ने कहा था कि ये लोग आपके घरों में घुसेंगे, बहन-बेटियों से रेप करेंगे।

गौरतलब है कि देश भर में हेट स्पीच के मामले तो आग की तरह बढ़ रहे हैं, लेकिन इनमें सज़ा की दर काफी कम है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले सात सालों में हेट स्पीच के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं। ऐसे मामलों में रिकॉर्ड 500 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। एनसीआरबी डेटा के मुताबिक साल 2014 में हेट स्पीच के सबसे कम 323 मामल दर्ज किए गए, जो साल 2020 में बढ़कर 1804 हो गए। ये हेट स्पीच के सबसे ज्यादा मामले थे। ये वो मामले हैं जो पुलिस में दर्ज किए गए, कई मामलों में तो पुलिस तक शिकायत भी नहीं पहुंच पाती है।

हेट स्पीच वो होती है जिसमें किसी खास धर्म के लोगों या समुदाय या खास वर्ग के खिलाफ हिंसा, नस्ल, धर्म और लिंग संबंधी कोई टिप्पणी की जाती है। खास बात ये है कि हेट स्पीच पर कोई विशेष कानून नहीं बनाया गया है। नफरत और हिंसा फैलाने संबंधी धाराओं के तहत हेट स्पीच मामलों में केस दर्ज किया जाता है। भारतीय दंड संहिता की धारा 153 और 295ए के तहत इसे परिभाषित किया जाता है, जिसमें हिंसा और दंगा भड़काने के लिए उकसाने वाले और धार्मिक भावनाएं भड़काने के तमाम मामले दर्ज होते हैं। अगर हेट स्पीच ऑनलाइन तरीके से हुई है। उसके खिलाफ भी कानून में रास्ते हैं।

इस सेक्शन के तहत दर्ज होने वाले कुल मामलों में कन्विक्शन रेट काफी ज्यादा नीचे है। यानी मामले तो दर्ज हो जाते हैं, लेकिन आरोपी दोषी साबित नहीं हो पाता है। 2016 से लेकर 2020 तक हेट स्पीच के मामलों में कन्विक्शन रेट महज 20 फीसद रहा है।

चुनाव के वक्त हेट स्पीच के ज्यादा मामले सामने आते हैं। ये मामले चुनाव आयोग में जाते हैं और वो चेतावनी देकर नेताओं को छोड़ देते हैं। नेताओं पर 4 या 10 दिन तक पब्लिक रैली में नहीं जाने का प्रतिबंध लगा दिया जाता है और इससे ज्यादा कुछ नहीं होता। अगर ये मामले कोर्ट में जाते हैं तो निचली अदालत में ही निपट जाते हैं।

कुछ ही दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसे ही मामले पर सुनवाई करते हुए राज्यों की पुलिस को सख्त चेतावनी दी और कहा कि हेट स्पीच पर सख्त कार्रवाई की जाए, फिर वो चाहे किसी भी धर्म से जुड़ा क्यों न हो। कुछ दिन पहले ही हेट स्पीच पर सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की। जस्टिस केएम जोसफ ने कहा कि यह 21वीं सदी है। हम धर्म के नाम पर कहां आ पहुंचे हैं? हमें एक धर्मनिरपेक्ष और सहिष्णु समाज होना चाहिए, लेकिन आज घृणा का माहौल है। सामाजिक ताना-बाना बिखरा जा रहा है। हमने ईश्वर को कितना छोटा कर दिया है। उसके नाम पर विवाद हो रहे हैं। इस याचिका में बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा और हिंदू सभा के इवेंट का जिक्र किया गया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की इन तल्ख टिप्पणियों का कोई खास असर नहीं दिखता।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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