Wednesday, December 7, 2022

मुंबई हादसा : “हम मर नहीं सकते क्योंकि हम ज़िंदा भी नहीं हैं”

Follow us:
Janchowk
Janchowkhttps://janchowk.com/
Janchowk Official Journalists in Delhi

ज़रूर पढ़े

636422727857588895
गौरव सोलंकी

मेरे शहर की स्पिरिट कमाल है। हम मर नहीं सकते क्योंकि हम ज़िंदा भी नहीं हैं।

22 लोग आज काम पर गए थे पर वे लौटेंगे नहीं। उनके साथ जो बाकी लोग उस भगदड़ का हिस्सा थे, लेकिन बच गए – वे फिर जाएँगे दो दिन बाद उसी भीड़ के बीच – जान हथेली पर रखकर। उदास आँखों से एक-दूसरे को या अपने-अपने फ़ोन को देखते हुए।

वे सर झुकाकर काम पर जाएँगे और काम से लौटेंगे। उनमें से 9 हर दिन औसतन लोकल ट्रेन से गिरकर मरते रहेंगे – साल के 3000। लेकिन उनमें से कोई कभी प्रोटेस्ट नहीं करेगा, क्योंकि उसके लिए वक़्त ही नहीं है।

जितने लोग गणपति विसर्जन के लिए निकलते हैं, उसका हज़ारवां हिस्सा भी अगर सड़क पर आकर सवाल पूछने लगे तो सरकारें हिल जाएँ। लेकिन सवाल पूछना हमें अच्छा नहीं लगता। हम सफ़र और शोर से इस कदर थके हुए लोग हैं कि सवाल पूछेंगे तो उसके बीच में ही मर जाएँगे।

नए लोग आते रहते हैं। नया पुल नहीं बनता। और जैसे चरस पर ज़िंदा हैं हम, कि सरकार हमारे लिए एल्फ़िंस्टन रोड स्टेशन का नाम बदलकर प्रभादेवी कर देती है। हादसे, जाने क्यूं, इसके बाद भी नहीं रुकते।

शिवाजी की 3600 करोड़ की मूर्ति बन ही रही है। उन्हें अगर इस शहर से ज़रा भी मोहब्बत होगी तो मुझे लगता है कि उद्घाटन के दिन वो मूर्ति एक पाँव उठाएगी और उन सबके ऊपर रख देगी, जिन्होंने उसे बनाया है। और शायद हमारे ऊपर भी – कि या तो जीना सीख लो, या मर ही जाओ।

(गौरव सोलंकी एक लेखक और पत्रकार हैं। आप मुंबई में रहते हैं।)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

तत्काल समाचारों के लिए, हमारा जनचौक ऐप इंस्टॉल करें

Latest News

साईबाबा पर सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर पुनर्विचार के लिए चीफ जस्टिस से अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की अपील

उन्नीस वैश्विक संगठनों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़  को संयुक्त पत्र लिखकर कथित 'माओवादी लिंक' मामले में...
जनचौक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें

Janchowk Android App

More Articles Like This

- Advertisement -