Saturday, August 13, 2022

झारखंड: 100 दिन हो गए ब्रम्हदेव सिंह की हत्या को, अभी तक नहीं दर्ज हुई सुरक्षाबलों के खिलाफ प्राथमिकी

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गत 12 जून 2021 को झारखंड के लातेहार जिला के पिरी गाँव के ब्रम्हदेव सिंह समेत कई आदिवासी पुरुष नेम सरहुल मनाने की तैयारी के क्रम में शिकार के लिए गाँव से निकले ही थे कि, उन पर जंगल के किनारे से सुरक्षा बलों ने गोली चलानी शुरू कर दी। हाथ उठा कर चिल्लाये कि वे आम जनता हैं, पार्टी (माओवादी) नहीं हैं। वह दोनों हाथ उठा कर बार बार चिल्ला कर बताते रहे कि वे माओवादी नहीं बल्कि साधारण ग्रामीण हैं। उन्होंने यहां तक बताया कि उनके पास पारंपरिक भरटुआ बंदूक है जिसका इस्तेमाल वे छोटे जानवरों के शिकार के लिए करते हैं। बावजूद इसके सुरक्षाबलों ने उन पर दनादन गोलियां चला दी। ग्रामीणों ने कोई गोली नहीं चलायी थी। लेकिन सुरक्षा बल की ओर से गोलियां चलती रहीं, और परिणामतः दीनानाथ सिंह के हाथ में गोली लगी और ब्रम्हदेव सिंह की सुरक्षाबलों की गोली से मौत हो गयी। बता दें कि पहली गोली लगने के बाद मृत ब्रम्हदेव को सुरक्षा बलों द्वारा थोड़ी दूर ले जाकर फिर से गोली मार के उनकी मौत सुनिश्चित कर दी गयी। बावजूद इसके दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही करने के बजाय पुलिस ने मृत ब्रम्हदेव समेत छः युवकों पर ही विभिन्न धाराओं के अंतर्गत प्राथमिकी (Garu P.S. Case No. 24/2021 dated 13/06/21) दर्ज कर दी।

इस प्राथमिकी में पुलिस ने घटना की गलत जानकारी लिखी है। प्राथमिकी में इस कार्यवाही को मुठभेड़ कहा गया है और यह लिखा गया है कि हथियार बंद लोगों द्वारा पहले फायरिंग की गई और कुछ लोग जंगल में भाग गए। साथ ही मृत ब्रम्हदेव का शव जंगल किनारे मिला। यह तथ्यों से बिल्कुल अलग मामला बनाया गया।

ब्रम्हदेव सिंह की पत्नी जीरामनी देवी ने अपने पति की हत्या के लिए जिम्मेवार सुरक्षा बलों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करवाने के लिए 29 जून को गारू थाना में आवेदन दिया था। लेकिन घटना के 100 दिन बाद भी आज तक प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है। इस बीच ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक से लेकर मुख्यमंत्री तक कई बार अपील की है।

स्थानीय पुलिस इस मामले में दो बहाना देती है- पहला इस घटना की एक प्राथमिकी उन्होंने दर्ज कर दी है और दूसरा मामले को CIDके हवाले कर दिया गया है। दोनों कानून व सामान्य ज्ञान से परे है। पुलिस की प्राथमिकी में ब्रम्हदेव की हत्या का ज़िक्र नहीं है। जीरामनी ब्रम्हदेव की हत्या का प्राथमिकी दर्ज करवाना चाहती हैं। साथ ही, एक घटना के विभिन्न घटनाक्रम के आधार पर दो प्राथमिकी दर्ज होना आम बात है। CID को मामला ट्रान्सफर कर देने से पीड़ित के परिवार के सदस्यों की प्राथमिकी दर्ज करने का अधिकार समाप्त नहीं हो जाता है। जीरामनी देवी ने अब स्थानीय न्यायलय में इस विषय में आवेदन दिया है।

प्रशासन और पुलिस के रवैये से स्पष्ट है कि दोषियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। यह अत्यंत चिंतनीय है कि एक आदिवासी की हत्या की प्राथमिकी 100 दिनों के बाद भी दर्ज नहीं हो रही है। यह स्थिति राज्य सरकार का जन पक्षीय होने के दावों के खोखलेपन को उजागर करती है।

इस मामले पर झारखंड जनाधिकार महासभा ने झारखंड सरकार से मांग की है जो इस प्रकार है –

• ब्रम्हदेव सिंह की हत्या के लिए ज़िम्मेदार सुरक्षा बल के जवानों व पदाधिकारियों के विरुद्ध जीरामनी देवी के आवेदन पर तुरंत प्राथमिकी दर्ज की जाए एवं दोषियों पर दंडात्मक कार्यवाही की जाए।
• पुलिस द्वारा ब्रम्हदेव समेत छः आदिवासियों पर दर्ज प्राथमिकी को रद्द किया जाए। गलत बयान व प्राथमिकी दर्ज करने के लिए स्थानीय पुलिस व वरीय पदाधिकारियों पर प्रशासनिक महकमे के खिलाफ कार्यवाही की जाए। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए न्यायिक कमीशन का गठन हो।
• ब्रम्हदेव की पत्नी को कम-से-कम 10 लाख रुपये मुआवज़ा दिया जाए और उनके बेटे की परवरिश, शिक्षा व रोज़गार की पूरी जिम्मेदारी ली जाए। साथ ही, बाकी पांचों पीड़ितों को पुलिस द्वारा उत्पीड़न के लिए मुआवज़ा दिया जाए।
• नक्सल विरोधी अभियानों की आड़ में सुरक्षा बलों द्वारा लोगों को परेशान न किया जाए। किसी भी गाँव के सीमा क्षेत्र में सर्च अभियान चलाने से पहले पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में ग्राम सभा व पारंपरिक ग्राम प्रधानों एवं अन्य क्षेत्रों में पंचायत प्रतिनिधियों की सहमति ली जाए। पांचवीं अनुसूची प्रावधानों व पेसा को पूर्ण रूप से लागू किया जाए।
• स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों को आदिवासी भाषा, रीति-रिवाज, संस्कृति और उनके जीवन-मूल्यों के बारे में प्रशिक्षित किया जाए और संवेदनशील बनाया जाय।

बताते चलें कि सुरक्षा बलों द्वारा गोलीबारी, ब्रम्हदेव सिंह की गोली से हत्या और सरकार की निष्क्रियता के विरुद्ध 31 अगस्त 2021 को पिरी व आसपास के गावों के सैकड़ों ग्रामीणों व विभिन्न जन संगठनों के प्रतिनिधियों ने लातेहार ज़िला मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया था। धरना का आयोजन पिरी ग्राम सभा व अग्रलिखित संगठनों द्वारा किया गया था। जिसमें अखिल भारतीय आदिवासी महासभा, अखिल झारखंड खरवार जनजाति विकास परिषद, झारखंड जनाधिकार महासभा व संयुक्त ग्राम सभा सहित लातेहार, पलामू, गढ़वा के कई जन संगठनों व राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था।
(झारखंड से वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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