Wednesday, December 7, 2022

झारखंड : यूनिवर्सल पेंशन योजना बना चूचू का मुरब्बा

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झारखंड में भ्रष्टाचार इतना हावी है कि उम्र के अंतिम पड़ाव में दाखिल हो चुके यानी वृद्धों को मिलने वाला वृद्धा पेंशन का आलम यह है कि राज्य के कई वृद्ध जहां आधार कार्ड में हुई गड़बड़ी के कारण वृद्धा पेंशन से वंचित हैं, वहीं कई लोगों का वृद्धा पेंशन उनके मरने के बाद भी उनके नाम से निकाला जा रहा है। बैंक के दलाल व बैंक कर्मियों की मिलीभगत से कैसे मुर्दा लोगों के पेंशन पर भी गिद्धदृष्टि लगाये हुए हैं, इसका जीता जागता उदाहरण बोकारो जिले के कसमार प्रखड के खैराचातर में सामने उभर कर आया है।

बताते चलें कि खैराचातर स्थित डोम टोला निवासी वृद्धा पेंशनभोगी योगी डोम की मौत वर्ष 2020 में ही हो गई, लेकिन उसके वृद्धा पेंशन के खाते से सितम्बर 2022 तक बैंक से पैसों की निकासी होती रही। ज़ाहिर है बैंक के दलाल व बैंक कर्मियों की मिलीभगत के कारण किसी की भी नज़र इस ओर नहीं गई।

गौरतलब है कि बैंक ऑफ इंडिया के ब्रांच से प्रखण्ड कार्यालय के आदेश संख्या जे एच एस 00711533 के माध्यम से योगी डोम को वृद्धा पेंशन दी जा रही थी। उसकी मौत के दो वर्षों से उसके खाते से पेंशन की निकासी होती रही। उक्त पैसे की निकासी बैंक का ही एक कर्मचारी द्वारा अंगूठे का निशान लगाकर की जा रही थी।

वृद्धा पेंशन की इस अवैध निकासी का मामला प्रकाश में आने के बाद जब शाखा प्रबंधक से सम्पर्क किया गया तो उन्होंने मामले को संज्ञान में लेते हुए उस खाते को होल्ड करने और मामले की जाँच आरम्भ करने की बात बताई, लेकिन बैंक के किस कर्मी ने पैसे की निकासी की है, यह बताने से इनकार कर दिया।

वहीं इसकी सूचना रिजिनल मैनेजर को भेजे जाने के बाद बैंक मैनेजर का ट्रांसफर कर दिया गया है। वहीं प्रखंड कार्यालय स्तर पर इसकी जाँच शुरू कर दी गई है। दूसरी तरफ राज्य में ऐसे भी लोग हैं जिनके आधार कार्ड में दर्ज गलत उम्र के कारण उन्हें वृद्धा पेंशन से वंचित होना पड़ रहा है।

इसी कड़ी में मिली जानकारी के अनुसार पश्चिमी सिंहभूम के खुंटपानी के दोपाई पंचायत के छोटा लागिया गांव की आदिवासी वृद्धा चिपरी कुई का आधार कार्ड में उम्र 26 वर्ष (जन्म साल 1995) दर्ज है। जबकि इनके लड़के की उम्र 45 वर्ष है। आधार में हुई इस गड़बड़ी के कारण चिपरी कुई को आजतक वृद्धा पेंशन से वंचित होना पड़ा है।

वहीं क्षेत्र के आदिवासी धनश्याम गुन्दुवा के आधार कार्ड में उम्र 25 साल दर्ज है, इनके बेटे की भी उम्र 45 साल के करीब है। धनश्याम गुन्दुवा की वास्तविक उम्र 65 वर्ष के आसपास है। इन्हें भी इसी कारण वृद्धा पेंशन नहीं मिल पा रहा है।

आदिवासी वृद्धा फूलो मांझी के आधार में उम्र 54 साल दर्ज है जबकि इनकी वास्तविक उम्र 70 वर्ष है। आधार में दर्ज गलत उम्र के कारण इन्हें भी वृद्धा पेंशन से वंचित रहना पड़ रहा है। जबकि इनका अपना कहने को कोई नहीं है।

बताते चलें कि उम्र सही करवाने के लिए ऐसे लोगों ने  कई बार प्रखंड कार्यालय का चक्कर भी काटा है, लेकिन सुधार नहीं हुआ। कभी रांची जाने बोला जाता है तो कभी बोला जाता है कि अब सुधार नहीं हो सकता है।

यूनिवर्सल पेंशन योजना लागू होने के बावज़ूद अनेक विधवा महिला पेंशन से वंचित हैं। कारण है पति का मृत्यु प्रमाण पत्र न बनना। अनेक महिलाओं के पति की मृत्यु कई वर्षों पहले हुई है बावजूद अभी तक मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बना है। क्षेत्र के अनेक बुज़ुर्ग, विधवा व विकलांग पेंशन योजनाओं के आवेदन प्रक्रिया की जटिलता के कारण वंचित हैं।

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खाद्य सुरक्षा जन अधिकार मंच के संदीप प्रधान ने बताया कि ऐसे ही मुद्दों को लेकर 19 अक्टूबर 2022 को खाद्य सुरक्षा जन अधिकार मंच, पश्चिमी सिंहभूम का प्रतिनिधिमंडल सामाजिक सुरक्षा मंत्री जोबा मांझी के आवास पर मुलाकात कर उनके द्वारा पूर्व में किये गए आश्वासनों को याद करवाया। प्रतिनिधिमंडल द्वारा मंत्री को कहा गया कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के आवेदन प्रक्रिया की जटिलता के सरलीकरण की मांग और वृद्धा पेंशन के लिए निर्धारित उम्र में हो रही गड़बड़ी पर मंच द्वारा मंत्री से कई बार बातचीत की गयी है, लेकिन आश्वासनों के बावज़ूद आज तक कार्यवाई नहीं हुई है। अभी भी क्षेत्र के अनेक बुज़ुर्ग, विधवा व विकलांग पेंशन योजनाओं के आवेदन प्रक्रिया की जटिलता के कारण वंचित हैं। वहीं आधार में उम्र की गड़बड़ी के कारण कई लोग वृद्धा पेंशन से वंचित हैं। अतः इन समस्याओं के निराकरण के बिना इन वंचितों के लिए “आपकी योजना-आपकी सरकार-आपके द्वार” कार्यक्रम घोषणा मात्र है।

इस अवसर पर मंत्री ने पहले कहा कि समस्या का निराकरण कर दिया गया है, लेकिन जब उनके सामने ज़मीनी तथ्यों को रखा गया तो वे फिर से कार्यवाई का आश्वासन देने को मजबूर हुई। मंच द्वारा मंत्री को मुख्य रूप से तीन मांगें की गईं और संलग्न मांग पत्र दिया गया।

मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया का सरलीकरण- यूनिवर्सल पेंशन योजना लागू होने के बावज़ूद अभी भी ज़िला की अनेक विधवा महिला पेंशन से वंचित हैं। एक प्रमुख कारण है पति का मृत्यु प्रमाण न बनना। अनेक महिलाओं के पति की मृत्यु कई वर्षों पहले हुई थी एवं मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बना था। वैसी महिलाओं को पति के मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए कोर्ट से एफिडेविट बनवाने की ज़रूरत होती है। यह सुदूर क्षेत्र की वंचित महिलाओं के लिए एक बड़ी बाधा है।

अतः पेंशन सम्बंधित मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए एफिडेविट की आवश्यकता समाप्त हो एवं केवल मुंडा / मानकी के सत्यापन के आधार पर प्रमाण पत्र निर्गत किया जाए।

विकलांगता प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया का सरलीकरण- विकलांगता प्रमाण पत्र के लिए सदर अस्पताल के बजाए प्रखंड स्तर पर मेडिकल सर्टिफिकेट नियमित रूप से निर्गत करने की व्यवस्था की जाए एवं आवेदकों को आने-जाने की सुविधा दी जाए।

आधार में दर्ज उम्र सुधार की व्यवस्था-अनेक बुज़ुर्ग वृद्ध पेंशन से वंचित हैं क्योंकि उनके आधार में गलत (कम) उम्र दर्ज है।  इनमें से अनेकों के पास सही उम्र का कोई प्रमाण पत्र नहीं है। अनेकों ने उम्र सही करवाने के लिए कई बार प्रखंड कार्यालय का चक्कर भी काटा है, लेकिन नहीं हुआ। कभी रांची जाने बोला जाता है तो कभी बोला जाता है कि नहीं हो सकता है। कई तो आधार के अनुसार 60 वर्ष होने तक जीवित भी नहीं रहेंगे। प्रखंड-वार शिविरों का आयोजन कर आधार में उम्र सुधार की व्यवस्था की जाए।

ऐसे बुज़ुर्ग जिनके पास वास्तविक उम्र का कोई प्रमाण पत्र नहीं है, उनका मुंडा / मानकी व सरकारी डॉक्टर द्वारा सत्यापित स्वघोषणा पत्र के आधार पर आधार कार्ड में उम्र को सुधार किया जाए।

यह प्रक्रिया आवेदकों के लिए निःशुल्क होना चाहिए एवं प्रशासन द्वारा बुजुर्गों के लिए परिवहन की व्यवस्था दी जाए। वंचितों को आधार के कारण अनेक अन्य समस्याओं को भी झेलना पड़ता है। इसलिए पेंशन के लिए आधार की अनिवार्यता समाप्त की जाए।

संदीप प्रधान ने बताया कि मंत्री ने फिर से समस्याओं के निराकरण का आश्वासन दिया। ऐसे में मंच द्वारा स्थिति पर निगरानी रखी जाएगी। अगर कार्यवाई नहीं होती है, तो क्षेत्र के बुज़ुर्ग, विधवा व विकलांग आन्दोलन करने को मजबूर होंगे।

(विशद कुमार स्तंभकार एवं स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

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