Wednesday, August 10, 2022

ambedkar

नये रेडिकल विकल्प की तलाश में है बहुजन राजनीति

डा. अंबेडकर दलित राजनीति के जनक माने जाते हैं। उन्होंने ही गोलमेज कांफ्रेंसों में दलितों को राजनीतिक अधिकार दिए जाने की मांग उठाई तथा गांधी जी के कड़े विरोध के बावजूद दलितों को हिंदुओं से अलग अल्पसंख्यक वर्ग का...

बीएचयू: छात्रों के हमलावरों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन

बनारस। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय आजकल जाति व धर्म को लेकर खूब चर्चा में है। ऐसे में तो विश्वविद्यालय के कुलगीत में बनारस को सर्वविद्या और विश्वविद्या की राजधानी अंकित किया गया है और लोग मानते भी हैं लेकिन पिछले...

अम्बेडकर को देवता बनाकर उनके सिद्धांतों को दरकिनार करने की साजिश

पिछले सालों की तरह इस साल भी विभिन्न राजनैतिक दलों और संगठनों ने 14 अप्रैल को जोर-शोर से अम्बेडकर जयंती मनाई। पिछले कुछ दशकों से लगभग सभी राजनैतिक दलों में सामाजिक न्याय के इस प्रतिबद्ध हिमायती के प्रति जबरदस्त...

भारतीय समाज में व्याप्त जाति व्यवस्था के विरुध्द संघर्ष के सर्वश्रेष्ठ अगुआ हैं आंबेडकर

डॉ. भीमराव आंबेडकर एक बहुजन राजनीतिक नेता और एक बौद्ध पुनरुत्थानवादी होने के साथ-साथ, भारतीय संविधान के मुख्य वास्तुकार भी थे। आंबेडकर का जन्म एक गरीब अस्पृश्य परिवार में हुआ था। आंबेडकर ने अपना सारा जीवन हिंदू धर्म की...

जयंती पर विशेष:अबूझ क्यों हैं आम्बेडकर बहुतेरों के लिए 

आम्बेडकर कम्युनिस्टों के लिए ही नहीं बल्कि बहुतेरे दलितों के लिए भी अबूझ हैं।हाल कुछ उस कथा जैसी है जिसमें किसी हाथी को नेत्रहीन लोग उतना ही बूझ पाए जितना वे हाथी को स्पर्श कर सके। जिसने सूंड़ स्पर्श...

बाबा साहेब के गहरे वैचारिक पक्षों को सामने लाती है ‘….आंबेडकर एक जीवनी’

डॉ. भीम राव आंबेडकर के व्यक्तित्व और उनके अवदान को लेकर भारत के बौद्धिक वर्ग में आम तौर पर दो तरह का नजरिया देखने को मिलता है। पहला उनकी उपेक्षा करता है और उन पर बात ही नहीं करना...

लोकतंत्र को जीवित रखने संबंधी अंबेडकर का नुस्खा आज भी बेहद कारगर

लोकतंत्र सरकार का एक रूप और तरीका है जिससे लोगों के आर्थिक और सामाजिक जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन बिना रक्तपात के लाए जाते हैं - बी.आर. अम्बेडकर डा. बीआर अंबेडकर की 65वीं पुण्यतिथि पर, जो 6 दिसंबर 2021 को पड़ती...

धर्म परिवर्तन से नहीं होगा जाति समस्या का खात्मा: भगवान दास

(भगवान दास अम्बेडकरवाद और अनुसूचित जातियों के मानवाधिकारों के मुद्दे पर सबसे प्रतिष्ठित विद्वानों में से एक थे। व्यापक रूप से यात्रा करने वाले, भगवान दास ने भारत में दलितों की स्थितियों पर विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्लेटफार्मों पर...

दलित पैंथर ने दलित साहित्य का भूमंडलीकरण किया: दलित पैंथर के संस्थापक जेवी पवार

जेवी पवार दलित-पैंथर के संस्थापकों में एक रहे हैं। इस संगठन ने 1970 के दशक के शुरूआती वर्षों में अपनी गतिविधियों से भारत ही नहीं, दुनिया भर का ध्यान खींचा था। इसी संगठन को दलित-साहित्य का जनक भी माना...

मनुस्मृति दहन दिवस: डॉ. आंबेडकर ने लिया था ब्राह्मणवाद के खात्मे का संकल्प

आज 25 दिसम्बर है। यह दलितों के लिए "मनुस्मृति दहन दिवस" के रूप में अति महत्वपूर्ण दिन है। इसी दिन ही सन 1927 को "महाड़ तालाब" के महा संघर्ष के अवसर पर डॉ बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर ने...
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