film

‘गुलाबो सिताबो’ पर क्षण भर : अंधेरे खंडहरों में बिलबिलाती जिंदगियां

आदमी की भौतिक दरिद्रता उसकी मानसिक दरिद्रता का भी कारण बनती है। वह अपने अस्तित्व के लिये… Read More

मजरूह सुल्तानपुरी की पुण्यतिथि: मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर…

’‘मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर/ लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया’’ उर्दू अदब… Read More

पुण्यतिथि पर विशेष: विजय तेंदुलकर, भारतीय रंगमंच में यथार्थवाद का चितेरा

भारतीय रंगमंच को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाले विजय तेंदुलकर, देश के महान नाटककारों में… Read More

पुण्यतिथि पर विशेष: नौशाद, जिनके संगीत में मिट्टी की सुगंध और मौजूद थी जिंदगी की शक्ल

नौशाद, हिंदी सिनेमा के ऐसे जगमगाते सितारे हैं, जो अपने संगीत से आज भी दिलों को मुनव्वर… Read More