Friday, August 12, 2022

Rupesh Kumar Singh

किताब ‘कैदखाने का आईना’: जेल में भ्रष्टाचार ही सिस्टम है

स्वतंत्र पत्रकार और लेखक रूपेश कुमार सिंह 7 जून, 2019 से 5 दिसंबर, 2019 तक बिहार की दो जेलों में छह महीने तक काला कानून ‘यूएपीए’ के तहत कैद थे। 6 दिसंम्बर, 2019 को ये जमानत पर बाहर निकल...

जमानत पर छूटे पत्रकार ने कहा, सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ लिखना सबसे बड़ा जुर्म!

जुझारू, निर्भीक और स्वतंत्र पत्रकार रूपेश कुमार सिंह को पिछली चार जून 2019 को अपहरण के बाद छह जून को गिरफ्तारी दिखाकर छ: महीने तक जेल में रखा गया। रूपेश कुमार सिंह का अपराध बस इतना ही था कि...
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भारत छोड़ो आंदोलन के मौके पर नेताजी ने जब कहा- अंग्रेजों को भगाना जनता का पहला और आखिरी धर्म

8 अगस्त 1942 को इंडियन नेशनल कांग्रेस ने, जिस भारत छोड़ो आंदोलन का आगाज़ किया था, उसका विचार सबसे...
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