Wednesday, December 7, 2022

अंबेडकरवादी रेशनलिस्ट को बजरंग दल के कार्यकर्ता ने दी ‘सड़क पर गोली मारने की धमकी’

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क्या अंबेडकरवादी रेशनलिस्ट की नियति नरेंद्र दाभोलकर, गोविंद पानसरे, एम. एम. कलबुर्गी व गौरी लंकेश होना है। खुद को बजरंगदल का कार्यकर्ता बताने वाले व्यक्ति ने उन्हें कॉल करके जान से मारने की धमकी दी है।

निर्देश सिंह द्वारा मुहैया करवाये गये कॉल रिकार्डिंग में वो व्यक्ति खुद को बजरंग दल का आदमी बताते हुये उन्हें धमकाते हुए कहता है – “बजरंग दल का आदमी हूँ। बजरंग दल से पंगा लेने वालों को… हम नहीं छोड़ते। तेरे घर में घुसकर गोली मारुंगा और रोड पर मारुंगा मादर…।  ब्राह्मणपुत्र हूं काट डालूंगा। परशुराम का इतिहास नहीं जानती तुम।… और फिर गाली सिर्फ़ गाली…

अंबेडकरवादी रेशनलिस्ट निर्देश सिंह को वॉट्सअप कॉल करके घंटे भर गरियाने वाले उस व्यक्ति के दस शब्दों के वाक्य में चार शब्द गाली के हैं। उस बजरंगदली ने निर्देश सिंह को बाबा साहेब पर ज्ञान देते हुए अपनी गंदी गलीज ज़बान में कहा – “तुझ जैसे लोगों को गाली देना बहुत ज़रूरी होता है क्योंकि गाली नहीं देंगे तो तुम जैसे लोग एक दिन ज़हर बनकर… जैसे साले मदरसा छाप हैं वैसे तुम लोग। तुम्हीं सालों (दलित) की वजह से देश ग़ुलाम हुआ। तुम्हीं लोग कभी तलवार, के डर से मुस्लिम बने, पैसे के लालच में ईसाई बने।

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वो इतने पर ही नहीं रुकता है आगे निर्देश सिंह को रंडी, मादर… से संबोधित करके कहता है कि वो (बी. आर. आंबेडकर) इतना बड़ा ज्ञानी नहीं था। ज्ञानी होता तो अकेले लिखता। सिर्फ़ संविधान सभा का अध्यक्ष था। वो भी पहले हिंदू था, बाद में बौद्ध बना। बाबा साहेब, चद्रशेखर रावण को गालियां देता है। फिर कहता है कि तुम सा.. खुद को आंबेडकरवादी कहते हो और बाबा साहेब को भी नहीं मानते। आंबेडकर ने कहा था, कटुवों से दूर रहो तो क्यों नहीं दूर रहते कटु… से तुम लोग।

बातचीत के दौरान वो आंबेडकरवादी, रेशनलिस्ट निर्देश सिंह को ब्राह्मण, ठाकुरों व हिंदू देवी देवताओं के ख़िलाफ़ बोलने के लिये उन्हें जान से मारने की धमकी देता है। और खुद को यादव बताते हुए कहता है कि – “मैं यादव हूं तुझे मारकर जेल जाऊंगा।”

निर्देश सिंह कहती हैं कि पहले वो खुद को ब्राह्मण बता रहा था, जब उन्होंने उसे बताया कि उसके कॉल रिकार्ड हो रही है तब वो खुद को यादव बताने लगा।

निर्देश सिंह बताती हैं कि उन्हें आये दिन ऐसे कॉल आते हैं जिनमें गालियां और जान से मारने की धमकियां होती हैं। किस- किस के ख़िलाफ़ कोर्ट कचेहरी जाऊं।

इससे पहले इसी साल अगस्त महीने में देवी सरस्वती को ज्ञान की देवी बताये जाने के संदर्भ में सवाल उठाने के बाद निर्देश सिंह के ख़िलाफ़ क़ाशीराम नगर चौकी इंचार्ज प्रदीप कुमार की तहरीर पर मुरादाबाद जिले के थाना मझोली में यूपी पुलिस ने केस दर्ज़ किया गया था। और तभी से लगातार उन्हें बजरंग दल व दूसरे हिंदुत्ववादी संगठनों द्वारा जान से मारने के धमकियां मिल रही हैं। निर्देश सिंह किसान आंदोलन के दौरान ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर किसानों के बच्चों के लिये स्कूल चलाकर चर्चा में आयी थीं। वो एक प्रखर समाजिक कार्यकर्ता व आंबेडकरवादी हैं।

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अब यहां दो सवाल उठते हैं। पहला सवाल यह कि आंबेडकरवादी रेशनलिस्ट निर्देश सिंह को जान से मारने की धमकियों पर इतनी ख़ामोशी क्यों है और दूसरा सवाल यह है कि इन धमकियों को किस तरह से देखा जाना चाहिये। बेशक़ इसे गौरी लंकेश को मिली जान से मारने की धमकियों और फिर हत्या की अगली कड़ी में ही देखा जाना चाहिये।

गौरतलब है कि 5 सितंबर 2017 को मंगलवार शाम गौरी लंकेश जब राज राजेश्वरी नगर में अपने घर लौटकर दरवाज़ा खोल रही थीं, तब हमलावरों ने उनके सीने पर दो और सिर पर एक गोली मारकर हत्या कर दी थी। गौरी लंकेश को भी हत्या से पहले पिछले कुछ सालों से श्रीराम सेना जैसी दक्षिणपंथी विचारधारा वाले संगठनों से कथित तौर पर धमकियां मिल रही थीं। निर्देश सिंह को बजरंग दल से मिल रही जान से मारने की धमकी को भी गौरी लंकेश को श्री राम सेना से मिली जान से मारने की धमकियों और फिर हत्या के पैटर्न पर ही रखकर देखा जाना चाहिए और उसी दिशा में एहतियाती क़दम व सामूहिक जन प्रतिरोध खड़ा किया जाना चाहिये।

हम जानते ही हैं कि गौरी लंकेश से पहले अगस्त 2013 में पुणे की सड़कों पर तर्कशील आन्दोलन के कार्यकर्ता एवं लेखक नरेन्द्र दाभोलकर की हत्या दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा कर दी गई। फिर फरवरी 2015 में कोल्हापुर की सड़क पर अपनी पत्नी के साथ टहल कर लौट रहे कम्युनिस्ट आन्दोलन के अग्रणी नेता कामरेड पानसरे की हत्या कर दी गई। इसके बाद धारवाड़, कर्नाटक में अपने घर के अन्दर वामपंथी विचारक एवं कन्नड़ भाषा के प्रकांड विद्वान 77 वर्षीय कलबुर्गी की हत्या 30 अगस्त 2015 को कर दी गई।

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सवाल है कि आख़िर तर्कवादी लोग सत्ता संरक्षित दक्षिणपंथी संगठनों के निशाने पर क्यों हैं। आस्तिकता से नास्तिकता का बौद्धिक सफ़र तय करते हुये भारत में दो नास्तिक सम्मेलनों का आयोजन करवाकर सीधे दक्षिणपंथी संगठन व सांप्रदायिकता को शह देने वाली सरकार के निशाने पर आये और देश से निर्वासित हुये बालेंदु स्वामी उक्त सवाल का जवाब देते हैं। वो कहते हैं कि प्रत्येक धर्म निश्चित रूप से अन्धविश्वास की तरफ ही ले जाता है। धर्म आपको बुद्धि का उपयोग और प्रश्न करने से मना करता है। धर्म कहता है कि बस जो लिखा है धर्म ग्रंथों में उसे मान लो और आँख बंद करके विश्वास करो। धर्म काल्पनिक भय और काल्पनिक लालच दिखा कर व्यक्ति के दिलो दिमाग को कंट्रोल और मेनिपुलेट करता है।

बालेंदु जी ज़ोर देकर कहते हैं कि आप तब तक धर्म के कुचक्र को नहीं समझ सकते जब तक कि इससे बाहर न निकलें, क्यों कि इसने आपकी आँखे बंद कर दी हैं और यही तो अन्धविश्वास है। तर्कवादी लोग अपने तर्कों और तथ्यों से अंधविश्वास की पट्टी को हटाकर जनसमाज को चेतना व दृष्टि प्रदान करते हैं इससे धर्मसत्ता व सांप्रदायिक राजनीति के मंसूबे फेल होते हैं। यही कारण है कि इस समय रेशनलिस्ट लोग सबसे ज़्यादा इनके  निशाने पर हैं। बालेंदु आगे कहते हैं कि आस्था के नाम पर जिस तरह का शोषण और अत्याचार हो रहा है हमारा (नास्तिक व रेशनलिस्ट) विरोध तो उससे है। हमारी लड़ाई ग़रीबी और शोषण से है, ईश्वर तो बीच में आ जाता है। वो कहते हैं कि असल में धर्म और ईश्वर के पीछे भी वही दो कारक हैं जो हमें दुनियादारी के बाक़ी काम में लगाते हैं। वे कारक हैं लोभ और भय। इन्हीं दोनों वजहों से हम आस्तिक बने रहते हैं, ईश्वर की शरण लेते हैं। नैतिक आचरण के लिए अलग से किसी प्रेरक शक्ति की ज़रूरत नहीं है। मनुष्य सहज रूप में नैतिक ही है। दुनिया के हालात हमें बुरा बनने को मजबूर करते हैं। इन हालात के ख़िलाफ़ लड़ने की ज़रूरत है और ईश्वर नाम के डंडे के ख़िलाफ़ विद्रोह उसी व्यापक लड़ाई का एक हिस्सा है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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