Saturday, August 13, 2022

कॉरपोरेट के दलाल मीडिया की बौखलाहट आयी सामने

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय टीवी पर तीन केंद्रीय कृषि क़ानूनों को रद्द करने की घोषणा के बाद से आंदोलनकारी किसानों को नक्सली, खालिस्तानी टुकड़े गैंग बताने वाले कार्पोरेट मीडिया के दलाल बिलबिला उठे हैं। जिनमें रीढ़ होने का तनिक भी एहसास है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले पर सवाल खड़े कर रहे हैं और जिनमें यह एहसास ही मर गया है वो हीं हीं हीं कर रहे हैं।

टाइम्स नाऊ नव भारत के संपादक एंकर सुशांत सिन्हा ने कृषि क़ानून रद्द करने के मोदी के फैसले पर भड़ास निकालते हुये कहा है कि, “चलो आप हताश हो गए कि इन लोगों को भला नहीं चाहिए तो मैं सियासी नुकसान क्यों झेलूं। तो उन लोगों को भी जवाब दीजिए जो कानून को लोगों को समझा रहे थे। आपके मन में आया, आप हताश हुए और आपने कह दिया कि हम वापस ले रहे हैं। उनका क्या, जो किसानों का भला चाह रहे थे। हमारे जैसे लोग, जिन्हें लोग गाली दे रहे थे, बॉर्डर पर हमारी जान को खतरा था। हमारे लिए आपने क्या किया, शून्य कर दिया।”सुशांत सिन्हा यहीं नहीं रुकते वो आगे कहते हैं – “देश ने छप्पन इंच के सीने वाला पीएम चुना था नरेंद्र मोदी जी, कुछ के विरोध के सामने, सियासी नफा-नुक़सान देखकर एक बड़े वर्ग के समर्थन के बावजूद झुक जाने वाला पीएम नहीं।” 

इंडिया टीवी के मालिक रजत शर्मा ने लिखा है -” प्रधानमंत्री के रूप में मोदी ने शुक्रवार को (कृषि कानूनों को निरस्त करके) जो कुछ भी किया उसे अलग-थलग करके नहीं देखा जाना चाहिए। अपने अनोखे अंदाज में उन्होंने उन लोगों को प्रभावी ढंग से जवाब दिया जो आरोप लगा रहे थे कि मोदी अहंकारी और अहंकारी हैं। एक अहंकारी प्रधान मंत्री कभी भी देश के सामने नहीं आएंगे और बिना शर्त ‘माफी’ की पेशकश करेंगे, किसानों के एक वर्ग को समझाने में सक्षम नहीं होने के कारण, खासकर जब उन्होंने कोई गलती नहीं की।”रजत शर्मा ने आगे कहा है कि -” पत्रकारिता में अपने 40 वर्षों के अनुभव में, मैंने इंदिरा गांधी सहित कई सरकारें देखी हैं, लेकिन मोदी जैसा प्रधान मंत्री कभी नहीं देखा, जो बिना किसी गलती के लोगों से विनम्रतापूर्वक माफी माँगने में संकोच नहीं करते थे। मोदी ने लोगों को दिखाया कि वह दुनिया के सबसे लोकप्रिय राजनीतिक नेता और राजनेता क्यों हैं।
रजत शर्मा ने आगे कहा कि उन्होंने 17 मिनट तक बात की और अपने नियमित काम पर चले गए, लेकिन उनकी घोषणा से राजनीतिक क्षेत्र में खलबली मच गई।”

इसके लिए बड़े दिल और साहस की आवश्यकता है, जो मुझे लगता है, भारत के किसी भी प्रमुख राजनेता के पास वर्तमान में नहीं है। मोदी एक निर्वाचित प्रधान मंत्री हैं, जिनके पास संसद में स्पष्ट बहुमत है। उसके पास कृषि सुधारों को लागू करने के लिए कानून बनाने की संवैधानिक शक्ति है। अगर वह चाहते तो अपने स्टैंड पर अडिग रह सकते थे और झुकने से इनकार कर सकते थे। लेकिन मोदी जैसा राजनेता, जो विनम्र जड़ों से विकसित हुआ है, जानता है कि एक साल से अधिक समय तक दिल्ली की सीमाओं पर, गर्मी और कड़ाके की सर्दी का सामना करते हुए, धरने पर बैठे किसानों को किन कठिनाइयों से गुजरना पड़ा। उन्होंने भारतीय किसानों की भावनाओं का सम्मान किया और गुरु नानक देव जयंती के पवित्र दिन को यह घोषणा करने के लिए चुना कि वे कृषि कानूनों को निरस्त कर रहे हैं। उन्होंने गुरु नानक के मार्ग का अनुसरण किया, जिन्होंने अपने अनुयायियों को शांति और भाईचारे का अर्थ सिखाया।जी न्यूज के मैनेजिंग इडिटर सुधीर चौधरी ने कृषि कानूनों की वापसी को बैलगाड़ी युग में प्रवेश बताया है। कृषि सुधार की हार बतायी। लोकतंत्र और देश की हार बताया है। 

आज तक चैनल की एंकर अंजना ओम कश्यप ने खुलकर तो कृषि कानूनों की वापसी पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दिया है। लेकिन कांग्रेस नेता जीतू पटवारी के साथ अंजना ओम कश्यप का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है जिसमें जीतू पटवारी कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि अंजना मुझे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की है कि जब मैं आपको थोड़ी दिन पहले सुनता था तो आप कहती थी कि यह तीनों कृषि कानून किसानों के हित में है और आज आपने कहा कि तीनों काले कानून किसानों के हित में वापस लिए गए। जीतू पटवारी की इस बात पर अंजना ओम कश्यप आग बबूला हो जाती है। अंजना ओम कश्यप इसके बाद कहती हैं कि मिस्टर जीतू पटवारी में आपको साफ कर दूं कि हमने तीनों कृषि कानूनों के फायदे और नुकसान हमेशा दर्शकों को बताए हैं।नेटवर्क 18 के एटिटर अमन चोपड़ा ने ट्वीट में लिखा है कि जो किया किसानों के लिए किया, जो कर रहा हूं देश के लिए कर रहा हूं।

बिल वापिस लिया, देश बचा लिया खुद हार गए, देश को जिता दिया देश ना झुके इसलिए खुद झुके राजनीति और राष्ट्रनीति का फर्क समझा दिया मोदी ने राजधर्म निभा दिया 

ज़हरखुरान एंकर दीपक चौरसिया ने ट्विटर पर लिखा कि केंद्र का बड़ा फैसला, तीनों कृषि कानून वापिस लिए गए। वामपंथी ज़मीन पर लोट-लोट कर खुश हो रहे हैं कि अब तो धारा 370 भी वापस आ जाएगा, CAA विधेयक भी हट जाएगा। गुलाबी सपने में जी रहे हैं ये वामी।
एंकर रूबिका लियाकत ने ट्वीट करके लिखा – “सुप्रीम कोर्ट द्वारा कृषि क़ानूनों पर बनाई गई तीन सदस्यीय कमिटी के सदस्य अनिल घनवट ने सरकार के फ़ैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।” 

एंकर विकास भदौरिया ने कहा है कि – “कोई कह रहा अहंकार हार गया, कोई कह रहा है कि लोकतंत्र जीत गया, कोई कह रहा सरकार की हार है, कोई कह रहा हैं आंदोलन की जीत है, तो कोई कहता है तानाशाही हार गयी, कोई कह रहा है कि किसान जीत गए,लेकिन सच्चाई ये है कि “कृषि सुधार” हार गए ! कुछ वर्षों बाद इन्हीं सुधारो की मांग फिर उठेगी। 
वहीं आरएसएस भाजपा के सबसे बड़े प्रोपागैंडलिस्ट अर्णब गोस्वामी ने मोदी के फैसले को राष्ट्रीय सुरक्षा, राष्ट्रीय हित, भारत विरोधी ताकतों को भारी झटका बताते हुये कहा – “और अब जबकि कृषि कानूनों को वापस लिया जा रहा है, उन्होंने कहा, “जो तत्व देश को जलाना चाहते थे … उनके पास भारत को जलाने के लिए कुछ भी नहीं है।”

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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