Tuesday, October 4, 2022

दलितों की 21 बीघा जमीन रामायण ट्रस्ट को देना अवैध: रेवेन्यू कोर्ट, अयोध्या

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अयोध्या में सहायक रिकॉर्ड अधिकारी (एआरओ) न्यायालय ने 22 अगस्त, 1996 को लगभग 21 बीघा (52,000 वर्ग मीटर) दलित भूमि को महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट (एमआरवीटी) को हस्तांतरित करने के सरकारी आदेश को अवैध  घोषित कर दिया है। अदालत ने ट्रस्ट के खिलाफ किसी कार्रवाई की सिफारिश नहीं की क्योंकि इसमें कोई जालसाजी शामिल नहीं थी। दलित की जमीन ट्रस्ट ने 1993 में बिना डीएम की अनुमित के ही दान में ले ली थी। इस मामले में दान की भूमि पर नियम के अनुसार स्टांप डयूटी भी अदा नहीं की गई थी।

अयोध्या में राम के नाम पर जमीन की लूट लगातार जारी है। राजस्व अदालत ने मांझा बरेहटा में दलित रोंघई की 21 बीघा भूमि को महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट) को दान देने के मामले को अवैध घोषित कर दिया गया है। ये मामला मीडिया में आते ही आनन फानन में अयोध्या मंडल के आयुक्त (कमिश्नर) एमपी अग्रवाल हटा दिए गए हैं। अब तक यूपी एसआरटीसी में एमडी के पद पर तैनात 1999 बैच के आईएएस अधिकारी नवदीप रिनवा को मंडलायुक्त अयोध्या बनाया गया। एमपी अग्रवाल को देवीपाटन मंडल का आयुक्त बनाकर भेजा गया है।

तत्कालीन डीएम अनुज कुमार झा ने दान में ली गई इस भूमि को जांच के बाद सरकार के नाम दर्ज करने के लिए कहा था। दलित रोंघई महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट का कर्मचारी था, जिससे ट्रस्ट ने यह भूमि दान में ले ली थी।

जांच के बाद पता चला कि स्थानीय विधायकों, नौकरशाहों के करीबी रिश्तेदारों और राजस्व अधिकारियों के परिजन ने अयोध्या में जमीन खरीदी, इस उम्मीद में कि उच्चतम न्यायालय के फैसले (9 नवंबर, 2019) की तरह जिले में राम मंदिर के निर्माण को मंजूरी मिलने के बाद अचल संपत्ति बाजार में इसकी बढ़ती कीमत का फायदा ले लेंगे।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 22 दिसंबर, 2021 को भूमि सौदों की जांच का आदेश दिया था, इसके बाद जांच रिपोर्ट सौंप दी गई है।

इन भूमि सौदों की हड़बड़ी में, लेन-देन के एक सेट ने औचित्य और हितों के टकराव के सवाल खड़े कर दिए थे। कुछ खरीदार दलित निवासियों से भूमि हस्तांतरण में कथित अनियमितताओं के लिए विक्रेता – महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट – की जांच में शामिल कुछ अधिकारियों से निकटता से जुड़े थे। गैर-दलित द्वारा दलित व्यक्तियों की कृषि भूमि के अधिग्रहण पर रोक लगाने वाले भूमि कानूनों को खत्म करने के लिए, एमआरवीटी ने 1992 में लगभग एक दर्जन दलित ग्रामीणों से बरहटा मांझा गांव में भूमि पार्सल खरीदने के लिए ट्रस्ट के साथ कार्यरत रोंघई नाम के एक दलित व्यक्ति का इस्तेमाल किया।

सहायक रिकॉर्ड अधिकारी, भान सिंह ने सर्वेक्षण-नायब तहसीलदार के अगस्त 1996 के आदेश को रद्द कर दिया है, क्योंकि यह अवैध था। इसे आगे की कार्रवाई के लिए एसडीएम (उप-मंडल मजिस्ट्रेट) को भेज दिया है। सहायक रिकॉर्ड अधिकारी ने तत्कालीन सर्वे-नायब-तहसीलदार (कृष्ण कुमार सिंह, अब सेवानिवृत्त) के खिलाफ कार्रवाई की भी सिफारिश किया है।

27 दिसंबर, 2021 का एआरओ आदेश, जमींदारी उन्मूलन अधिनियम, 1950 की धारा 166/167 के तहत कार्रवाई की सिफारिश करता है। जबकि धारा 166 एमआरवीटी को भूमि के हस्तांतरण को शून्य बनाने का काम करेगी, धारा 167 प्रभावी रूप से उक्त भूमि को राज्य सरकार में सभी भारों से मुक्त कर देती है।

भूमि हस्तांतरण की कथित अवैधता सितंबर 2019 में जिला प्रशासन के संज्ञान में आई थी, जब महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट ने दलित भूमि के हिस्सों को बेचना शुरू किया था। एमआरवीटी को जमीन बेचने वाले दलितों में से एक ने तब उत्तर प्रदेश बोर्ड ऑफ रेवेन्यू से शिकायत की थी कि उनकी जमीन को “अवैध रूप से स्थानांतरित” कर दिया गया है। उनकी शिकायत पर तबादले की जांच के लिए अतिरिक्त आयुक्त शिव पूजन और तत्कालीन अतिरिक्त जिलाधिकारी गोरेलाल शुक्ला की कमेटी गठित की गई थी।

रिकॉर्ड बताते हैं कि 1 अक्टूबर, 2020 को तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट अनुज कुमार झा ने इस समिति की रिपोर्ट को मंजूरी दे दी थी, जिसमें एमआरवीटी और कुछ सरकारी अधिकारियों के खिलाफ “अपंजीकृत दान विलेख के माध्यम से (अनुसूचित जाति के व्यक्ति) को अवैध रूप से स्थानांतरित करने के लिए” कार्रवाई की सिफारिश की गई थी।इसे 18 मार्च, 2021 को अयोध्या संभागीय आयुक्त एमपी अग्रवाल द्वारा अनुमोदित किया गया था, और अंतत: 6 अगस्त, 2021 को एआरओ अदालत में 22 अगस्त, 1996 के “सुधार”, आदेश और “राज्य सरकार को विचाराधीन भूमि वापस करने” के लिए एक मामला दायर किया गया था।

28 दिसंबर को आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रभारी और सांसद संजय सिंह ने मांझा बरेहटा के गरीब दलितों से भेंट कर उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया था। संजय सिंह ने यह आरोप भी लगाया था कि स्कूल और अस्पताल के नाम पर जमीन लेने के बाद महर्षि ट्रस्ट के लोग इस जमीन को बेचकर अरबों की लूट कर रहे हैं।

संजय सिंह ने कहा था कि राम जन्मभूमि क्षेत्र के पांच किलोमीटर के दायरे में किस तरह से तमाम अधिकारियों, भारतीय जनता पार्टी के विधायकों,उनके रिश्तेदारों ने जमीनें खरीदी हैं। उसका पूरा खाका उनके पास है। उत्तर प्रदेश में नियम है कि 3.5 बीघे से अधिक जिस दलित की जमीन होगी, वही बेच सकता है, अन्यथा नहीं बेच सकता। इसमें पहले एक रोंघई नाम के व्यक्ति को तैयार किया गया, क्योंकि दलित ही दलित की जमीन को खरीद सकता है, यह ट्रस्ट के लोग जानते थे।

एक-दो बीघे की जमीन रखने वाले उस क्षेत्र के दलितों से रोंघई ने 21 बीघा जमीन खरीदी। फ‍िर वह 21 बीघा जमीन महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट को दान कर देता है। जब वह जमीन दान में चली गई और इस बात का पता उसमें शाम‍िल एक जमीन बेचने वाले दलित महादेव को चली, तो उसने शिकायत की। उसने कहा कि हमारी जमीनों को गलत ढंग से खरीद कर बेचा जा रहा है, जो क‍ि ट्रस्ट नहीं कर सकता।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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