Sunday, August 14, 2022

दिल्ली कोर्ट ने अनिल देशमुख के वकील आनंद डागा और सीबीआई सब इंस्पेक्टर को दो दिन के रिमांड पर भेजा

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दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के वकील आनंद डागा और सब-इंस्पेक्टर अभिषेक तिवारी को संवेदनशील जानकारी लीक करने के आरोप, जिससे भ्रष्टाचार मामले की जांच प्रभावित हुई, दो दिन की सीबीआई की हिरासत में भेज दिया।

सीबीआई ने डागा और तिवारी को कल क्रमश: मुंबई और दिल्ली से गिरफ्तार किया था। मुंबई में एक मजिस्ट्रेट की अदालत के समक्ष पेश किए जाने के बाद, डागा के लिए ट्रांजिट रिमांड दिया गया, जिसमें उसे आज दिल्ली की एक अदालत में पेश करने का निर्देश दिया गया था। तदनुसार, डागा और तिवारी दोनों को आज राउज एवेन्यू कोर्ट के एक विशेष सीबीआई न्यायाधीश के समक्ष पेश किया गया, जहां सीबीआई ने उनके लिए 7 दिन की हिरासत की मांग की थी।

डागा, तिवारी और अज्ञात अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अनुचित लाभ और अवैध संतुष्टि के एवज में आनंद डागा को मामले के संवेदनशील और गोपनीय दस्तावेजों का खुलासा करने के उद्देश्य से एक आपराधिक साजिश को  अंजाम दिया। यह प्राथमिकी आईपीसी (IPC) की धारा 120बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 8 के तहत दर्ज़ की गयी है।

इसके पहले सीबीआई ने मुंबई एयरपोर्ट से एक वकील आनंद डागा को गिरफ्तार किया है। इस पर आरोप है कि उसने महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ चल रहे उगाही केस की शुरुआती जांच को प्रभावित करने की कोशिश की है। दरअसल इस मामले में सीबीआई की जांच से जुड़ी एक प्रारंभिक रिपोर्ट 29 अगस्त को लीक हो गई थी और मीडिया में पहुंची थी। इस रिपोर्ट को लेकर दावा किया गया था कि सीबीआई ने अपनी शुरुआती जांच में कहा है कि अनिल देशमुख ने कोई अपराध नहीं किया है और पूर्व गृहमंत्री को क्लीन चिट दी थी।

सीबीआई की अंदरुनी जांच में पता चला है कि देशमुख की लीगल टीम ने सीबीआई के कुछ निचले स्तर के अधिकारियों को घूस देने की कोशिश की थी। हालांकि, अब सीबीआई की तरफ से कहा गया है कि इस मामले में जो भी अधिकारी शामिल होंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। डॉक्यूमेंट के लीक होने में और कौन-कौन से लोग शामिल थे इस बात की जांच की जा रही है।

महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख वसूली केस में वकील आनंद डागा के बाद अब सीबीआई ने अपने ही ऑफिसर को गिरफ्तार किया है। सीबीआई के सब इंस्पेक्टर अभिषेक तिवारी पर रिश्वत लेकर शुरुआती जांच रिपोर्ट को लीक करने का आरोप है। अभिषेक तिवारी अब सीबीआई की गिरफ्त में है।

देशमुख को कथित तौर पर क्लीन चिट देने संबंधी प्राथमिक जांच की रिपोर्ट शनिवार रात लीक हो गई थी। अधिकारियों ने कहा कि सीबीआई ने रिपोर्ट के लीक होने की जांच शुरू की जिसमें अब तक पता चला है कि देशमुख की टीम ने एजेंसी के एक उप निरीक्षक रैंक के अधिकारी को कथित तौर पर रिश्वत देकर उनके खिलाफ प्रारंभिक जांच (पीई) को प्रभावित करने की कोशिश की। सीबीआई ने बुधवार को देशमुख के दामाद गौरव चतुर्वेदी और वकील आनंद डागा से अपनी जांच को लेकर पूछताछ की थी जिसके बाद मामला दर्ज कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया था।

सीबीआई की एक रिपोर्ट को लीक करने के आरोप में केंद्रीय जांच एजेंसी उनके वकील आनंद डागा को गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले देर रात सीबीआई ने अपने ही डिपार्टमेंट के सब इंसेक्टर अभिषेक तिवारी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि तिवारी ने ही अनिल देशमुख के वकील को कथित जांच रिपोर्ट की कॉपी रिश्वत लेकर लीक की थी।

दरअसल  पिछले हफ्ते सीबीआई की एक जांच रिपोर्ट का एक पेज मीडिया में लीक हुआ था, जिसमें अनिल देशमुख को कथित तौर पर क्लीन चिट देने की बात कही गई थी। जिसके बाद इस मामले में एक और केस दर्ज हुआ था। लीक रिपोर्ट में जांच अधिकारी ने देशमुख के खिलाफ जांच को बंद करने की सिफारिश करते हुए कहा था कि उन्होंने कोई संज्ञेय अपराध नहीं किया है। इसके बाद से दावा किया जा रहा है कि देशमुख के खेमे ने एजेंसी के अधिकारियों से संपर्क करके जांच को प्रभावित करने की कोशिश की थी।

सीबीआई की कथित रिपोर्ट के बारे में कहा गया है कि अनिल देशमुख के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर सीबीआई ने प्रारंभिक जांच में अनिल देशमुख को क्लीन चिट दे दी थी तो फिर उनके खिलाफ बाद में एफआईआर क्यों दर्ज की गई। सीबीआई की कथित लीक रिपोर्ट को डीएसपी आरएस गुंज्याल ने तैयार किया है। इस रिपोर्ट में अनिल देशमुख पर लगाए गए आरोपों के हर पहलुओं पर चर्चा की गई है।

कांग्रेस ने दावा किया था कि वसूली केस की जांच कर रही सीबीआई ने क्लीन चिट दे दी है। कांग्रेस ने रविवार को दावा किया कि सीबीआई के जांच अधिकारी (आईओ) को महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख की कोई भूमिका नहीं मिली है और जांच बंद कर दी, कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने ट्वीट कर यह जानकारी दी थी। महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने जांच अधिकारी की रिपोर्ट को अवहेलना करने के लिए सीबीआई द्वारा की गई साजिश की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की थी।

दरअसल मुंबई के पूर्व पुलिस कमीश्नर परमबीर सिंह ने देशमुख के खिलाफ रिश्वत के आरोप लगाए थे और कोर्ट ने जांच एजेंसी को इन आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया था। देशमुख ने इन आरोपों के बाद महाराष्ट्र के गृह मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि देशमुख ने इन आरोपों को खारिज किया है।

उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित आवास के बाहर एक एसयूवी से विस्फोटक सामग्री मिलने के मामले की जांच के दौरान सहायक पुलिस निरीक्षक सचिन वाजे की भूमिका सामने आई थी। इसके बाद परमबीर सिंह को उनके पद से हटा दिया गया था। वाजे को भी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। पुलिस आयुक्त के पद से हटाए जाने के बाद सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि देशमुख ने वाजे को मुंबई के बार और रेस्तरां से एक महीने में 100 करोड़ रुपये से अधिक की रकम वसूलने को कहा था।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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