Monday, December 5, 2022

ग्राउंड रिपोर्ट: पूर्वांचल में भीषण उमस और गर्मी के बीच इलाज के अभाव में बेमौत मर रहे हैं डेंगू मरीज

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मिर्जापुर। देश के बड़े शहरों, महानगरों से डेंगू बुखार होता हुआ अब नगर, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी तेजी के साथ पांव पसारने लगा है। डेंगू पीड़ितों की संख्या दिन प्रतिदिन न केवल बढ़ रही है, बल्कि कई लोग डेंगू की चपेट में आकर असमय मौत के मुंह में समा भी चुके हैं। स्वास्थ्य महकमा डेंगू पीड़ितों के बेहतर उपचार की बात तो बड़े ही दमदारी के साथ कर रहा है, लेकिन देखा जाए तो डेंगू प्रभावित अस्पताल के वार्डों की स्थिति बिल्कुल ही गंभीर बनी हुई है।

मिर्जापुर का मंडलीय अस्पताल जिसे अब मेडिकल कॉलेज का भी दर्जा प्राप्त हो चुका है, लेकिन दुखदाई है कि शासन और प्रशासन के लाख दावे के बाद भी यहां की स्वास्थ्य सेवाओं में कोई भी बदलाव देखने को नहीं मिला है। कुछ ऐसा ही हाल ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों का भी बना हुआ है जहां स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर केवल कुछ हरी, नीली, पीली टिकिया पकड़ा कर कर्तव्यों की इतिश्री कर ली जा रही है। कुछ केंद्रों पर तो चिकित्सकों का जहां अभाव बना हुआ है तो कहीं कहीं दोपहर बाद ही चिकित्सक चलते बनते हैं ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से भगवान भरोसे नजर आती हैं।

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वैश्विक महामारी कोरोना के कहर से जूझ चुके जनपद के लोगों को अब डेंगू बुखार ने डराना प्रारंभ कर दिया है। आलम यह है कि डेंगू बुखार का कहर जनपद के बाजारों, कस्बों से होता हुआ ग्रामीण क्षेत्रों में भी तेजी के साथ पैर पसार चुका है। मंडलीय जिला अस्पताल में जहां डेंगू वार्ड मरीजों से भरे पड़े हैं वहीं समीप के ट्रामा सेंटर में भी अलग से बनाए गए डेंगू वार्ड में तिल रखने तक की जगह नहीं बची है। निरंतर मरीजों की बढ़ती संख्या का आलम यह है कि मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए बेड बढ़ाना पड़ रहा है।

दूसरी ओर मौसम में तेजी के साथ बदलाव जारी है। शाम ढलने के बाद मौसम के मिजाज में जहां सिहरन का असर हो जा रहा है तो दिन में भीषण उमस का आलम बदस्तूर जारी है। ऐसे में डेंगू वार्ड में लगे पंखे की हवा न केवल नाकाफी साबित हो रही है, बल्कि उमस के मारे लोग पसीने से तरबतर हो जा रहे हैं। ऐसे में डेंगू वार्ड में भर्ती मरीजों का बुरा हाल तो हो ही रहा है उनके साथ आए  तीमारदार भी बदहाल स्थिति में नजर आ रहे हैं। गर्मी और उमस से बचने के लिए मरीज तो मरीज उनके परिजन वार्ड के अन्य हिस्सों में जमीन पर बैठने और लेटने को मजबूर हैं।

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जिले में दो सांसद (एक राज्य सभा), दो एमएलसी, पांच विधायक यहां तक कि मिर्जापुर नगर पालिका अध्यक्ष भी सत्ताधारी दल के हैं, बावजूद इसके स्वास्थ्य सेवाओं का जो हाल है वह किसी से छुपा हुआ नहीं है। यहां मरीजों को जो स्वास्थ्य सेवाएं मिलनी चाहिए, सरकार की जो मंशा है उस हिसाब से यहां बिल्कुल ही वह सब कुछ नहीं होता जो सरकार और स्वास्थ्य विभाग की गाइड लाइन में आता है। अलबत्ता इस मामले में मिर्जापुर की तेजतर्रार महिला जिलाधिकारी दिव्या मित्तल का कार्य सराहनीय कहा जा सकता है जो मानवीय और प्रशासनिक दोनों दृष्टिकोण से डेंगू और वायरल बुखार प्रभावित लोगों के बेहतर उपचार के दिशा में निरंतर नजर बनाई हुई हैं, बल्कि मंडलीय अस्पताल का निरीक्षण कर उन्होंने हर संभव व्यवस्था को बेहतर से बेहतर बनाने का कड़ा निर्देश भी दिया हुआ है। जिसका असर भी देखा जा रहा है कि उनके सख्त निर्देश के बाद डेंगू वार्ड में बेड की अतिरिक्त व्यवस्था कर दी गई है।

खतरनाक मेडिकल वेस्ट से पटा है डेंगू वार्ड का मुख्य गेट

तेजी के साथ पांव पसार रहे डेंगू से बचने के लिए सरकार और स्वास्थ्य महकमा शहरों से लेकर नगरों और गांवों कस्बों में समुचित साफ-सफाई पर जहां जोर दे रहा है, ताकि गंदगी के कारण इस बीमारी को आगे बढ़ने से रोका जा सके वहीं दूसरी ओर जिले के मंडलीय अस्पताल परिसर स्थित डेंगू वार्ड बदहाल व्यवस्था देख कर कह पाना मुश्किल होता है कि भला इन स्थितियों में कैसे यहां डेंगू प्रभावितों का इलाज कर पाना संभव होगा जब खतरनाक मेडिकल वेस्ट से डेंगू वार्ड का मुख्य गेट पटा हुआ स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोल रहा हो पोल।

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‘जनचौक’ की टीम ने डेंगू प्रभावित लोगों के उपचार की हकीकत को करीब से परखने के उद्देश्य से जब जिला मंडलीय अस्पताल के डेंगू वार्ड सहित मंडलीय अस्पताल परिसर स्थित ट्रामा सेंटर के डेंगू वार्ड का निरीक्षण किया तो घोर लापरवाही के साथ-साथ अव्यवस्थाओं का भी आलम साफ-साफ दिखलाई दिया। भीषण उमस और गर्मी में उबल रहे डेंगू प्रभावित मरीजों और उनके तीमारदारों का जहां कोई फुरसाहाल नहीं है वहीं दूसरी ओर डेंगू वार्ड का मुख्य गेट जो वार्ड से लगा हुआ है खतरनाक मेडिकल वेस्ट से पटा हुआ गंदगी को बढ़ावा देता हुआ नजर आया है। कहना गलत नहीं होगा कि यहां सफाई कर्मियों की एक लंबी चौड़ी फौज होने के बाद भी सफाई व्यवस्था बे पटरी नजर आई है।

आश्चर्य की बात है कि ना तो इस ओर किसी जनप्रतिनिधि का ध्यान जा रहा है और ना ही स्वास्थ्य महकमा सहित जिले के आला अधिकारियों का, आलम डेंगू प्रभावित मरीज गंदगी और भीषण उमस गर्मी के बीच अपना उपचार कराने के लिए बेवश हैं। नाम ना छापे जाने की शर्त पर कुछ प्रभावित लोगों और उनके परिजनों ने यहां की बदहाल व्यवस्था का जिक्र करते हुए ऐसे तैसे उपचार कहे जाने की बात बताई है। एक तीमारदार ने नाम ना छापे जाने की शर्त पर डेंगू वार्ड की बदहाल व्यवस्था का वर्णन करते हुए बताया कि यदि हम शिकायत भी करते हैं तो हमें फटकार मिलेगी क्योंकि हमारा मरीज यहां भर्ती है, ऐसे में भला हम शिकायत कर क्यों मुसीबत मोल ले? वह वार्ड में व्याप्त अव्यवस्थाओं की बात करते हुए गंदगी से लेकर पंखे की हवा की तरफ इशार करते हुए कहते हैं कि “देखिए कैसे इस पंखे की हवा में जिस पर उमस गर्मी हावी पड़ रहा है उपचार करा पाना संभव हो सकता है?

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इसी प्रकार एक अन्य मरीज गंदगी और साफ सफाई व्यवस्था की ओर इशारा करते हुए वार्ड के मुख्य गेट पर पड़े हुए अस्पताल से निकलने वाले मेडिकल कचरे से निकल रही दुर्गंध की ओर नजर इंगित कराते हैं। दूसरी ओर इस मामले में पूछे जाने पर डॉ राजेंद्र प्रसाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मिर्जापुर कहते हैं कि “वार्ड में पंखे कि व्यवस्था की गई है, साफ सफाई का ध्यान रखा जा रहा है, यदि कुछ कमियां हैं तो जल्द से जल्द दुरुस्त करा लिया जाएगा।” सीएमओ डॉ. राजेंद्र प्रसाद का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार काम कर रही है। दवा का छिड़काव और फागिंग कराई गई है। 50 नए बेड के साथ अन्य व्यवस्था भी ठीक कराई गई है और जो बुखार के रोगी हैं, उनका इलाज किया जा रहा है। इसी के साथ ही समस्याओं को दूर करने का भी प्रयास किया जा रहा है।

जिलाधिकारी के निर्देश पर हरकत में आया स्वास्थ्य महकमा

मिर्जापुर की जिलाधिकारी दिव्या मित्तल के निर्देश पर जनपद में डेंगू रोगों के प्रभावी रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु स्वास्थ्य विभाग एवं नगर पालिका के द्वारा जनपद में निरन्तर फागिंग एवं एन्टी लारवा का छिड़काव कराया तो जा रहा है, लेकिन अभी भी यह नाकाफी बताया जा रहा है। नगर के कई ऐसे इलाके हैं जहां अभी भी दवा का छिड़काव तो दूर है बेहतर साफ-सफाई तक नहीं हो पाया है। 

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जिलाधिकारी के निरीक्षण के बाद स्वास्थ्य महकमे के साथ ही साथ नगर पालिका भी जाग उठा है। जनपद में डेंगू मरीजों के लिये पहले 85 बेड संचालित थे जिसमें बढ़ोत्तरी करते हुये बेडों की संख्या को 150 करा दिया गया है। 2 हजार दवाइयों की किट उपलब्ध कराई गई है। मरीजों की देखभाल के लिए 2 डॉक्टरों की टीम लगायी गयी थी जिसमें वृद्धि करके अब 10 डाक्टरों की ड्यूटी लगायी गयी है। 6 स्टाफ नर्सों के द्वारा भर्ती मरीजों का उपचार किया जा रहा था, मरीजों की संख्या में वृद्धि को देखते हुये अब 20 नर्सों की ड्यूटी लगायी गयी है।

जिलाधिकारी दिव्या मित्तल की मानें तो 10 रैपिड रिस्पांस टीमों के द्वारा नगर में भ्रमण कर दवाओं का वितरण करने के साथ लोगों को इसके बचाव के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में जनपद के समस्त विकास खण्डों 100 से 200 दस्तक टीमों के द्वारा जागरूक किया जा रहा है, आवश्यकता पड़ने पर दवाओं का वितरण करने के साथ ही मरीजों को नजदीकी सामुदायिक, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में भेजा रहा है।

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मिर्जापुर में अब तक डेंगू से 12 से ज्यादा लोगों की हो चुकी है मौत

जिले में डेंगू और वायरल बुखार का प्रभाव गहराता जा रहा है अब से लेकर पूर्व के आंकड़ों पर नजर डालें तो 1 महीने के अंदर डेंगू और वायरल बुखार ने तकरीबन 12 लोगों को अपना शिकार बनाया है। अब यह अलग बात है कि यह जो मौतें हुई हैं जिला अस्पताल में नहीं बल्कि अन्य अस्पतालों में। इसमें कुछ वाराणसी में उपचार करा रहे थे कुछ अन्य स्थानों पर जिससे स्वास्थ्य महकमा राहत की सांस लेता हुआ देखा जा रहा है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिरकार जिले में मंडलीय अस्पताल जिसे मेडिकल कॉलेज का भी दर्जा प्राप्त हो गया है को छोड़कर आखिरकार लोग बाहर उपचार कराने के लिए क्यों विवश हो रहे हैं? ऐसे में बरबस ही शब्द फूटते हैं यहां की दुर्व्यवस्थाओं को लेकर जो किसी से छुपा हुआ नहीं है। मंडलीय अस्पताल जहां पूरी तरह से रेफर केंद्र बना हुआ है वहीं उपचार के नाम पर मची लूट खसोट, आम लोगों के बस की बात नहीं है जो यहां उपचार करा सकें।

निजी चिकित्सालय और जांच केंद्रों की कटने लगी है चांदी

जनपद में कतिपय चिकित्सालय इन दिनों पूरी तरह से लूट की मुद्रा में आ गए हैं। जिन्हें इन दिनों एक सुअवसर प्राप्त हो गया है। डेंगू वायरल बुखार उनके लिए कमाई का साधन बन गया है। जांच केंद्रों के नाम पर लूट तो मची ही है उपचार के नाम पर भी जमकर गरीब मरीजों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। हालांकि नगर में कई ऐसे निजी चिकित्सालय हैं जो आर्थिक शोषण को आधार ना मानकर मानवीय दृष्टिकोण से मरीजों का उपचार करने में विश्वास करते हैं, लेकिन कई ऐसे निजी चिकित्सालय हैं जो देखते ही देखते सुर्खियों में आए हैं और प्रचार माध्यमों के जरिए बेहतर उपचार का ढिंढोरा पीटते हुए देखे तो जा रहे हैं, लेकिन उनकी असलियत यह है कि उनके यहां उपचार के नाम पर सिर्फ और सिर्फ मरीजों का आर्थिक शोषण यहां तक कि उन्हें कुछ घंटे अपने यहां स्थान देने के बाद बनारस और चुनार का रास्ता दिखाकर रेफर कर दिया जाता है। इसके नाम पर भी भारी भरकम वसूली कर ली जाती है जिस पर न तो जिला प्रशासन की नजरें जा रही हैं और ना ही यहां के जनप्रतिनिधियों की। हद की बात तो यह है कि समाज सेवा का दंभ भरने वाले वह समाज सेवी संगठन भी ऐसे मसलों पर खामोशी का चादर ताने हुए नजर आ रहे हैं।

(मिर्जापुर से संतोष देव गिरी की रिपोर्ट।)

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