Sunday, August 14, 2022

बिरसा मुंडा का उलगुलान कंपनीराज के खिलाफ था: दीपंकर

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बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर झारखंड के रांची के बगईचा में जुटे देश भर से आये आदिवासी आन्दोलनकारी संगठनों के प्रतिनिधियों द्वारा आयोजित ‘आदिवासी अधिकार कन्वेंशन’ को संबोधित करते हुए भाकपा माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि जिस कंपनीराज के खिलाफ बिरसा मुंडा ने उलगुलान किया था, आज मोदी जी झारखण्ड समेत देश के आदिवासियों के जल-जंगल-ज़मीन और उनके खनिज व प्राकृतिक संसाधनों को अडानी-अम्बानी कॉर्पोरेट कंपनियों के हवाले कर उसी को थोप रहे हैं।

यहां तक कि बिरसा मुंडा जयंती को भी ‘जन जातीय गौरव दिवस’मनाने के नाम पर आदिवासियत की पहचान को नहीं रहने देना चाहते हैं। जल, जंगल और खनिज की कॉर्पोरेटी लूट के लिए ही आदिवासियों को निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे में तमाम मुद्दों पर जारी संघर्षों के बड़े समन्वय और बड़ी लड़ाई की ज़रूरत है। जिसे विकसित करने और आन्दोलन को बल पहुंचाने में उनकी पार्टी हर स्तर पर मजबूत सहयोगी की भूमिका निभाएगी।

बता दें कि महानायक बिरसा मुंडा की जयंती पर झारखण्ड समेत देश भर जारी आन्दोलनों के बीच समन्वय हेतु गठित ‘आदिवासी संघर्ष मोर्चा ‘द्वारा बगईचा में राष्ट्रीय स्तर पर आदिवासी अधिकार कन्वेंशन का आयोजन किया गया। जिसमें झारखण्ड, ओड़िशा, असम, कर्नाटक, गुजरात, छात्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल समेत 14 राज्यों के 150 से अधिक आदिवासी प्रातिनिधियों ने भाग लिया। बगईचा में आयोजित इस कन्वेंशन की शुरुआत बिरसा मुंडा की मूर्ति पर माल्यार्पण और झारखण्ड जन संस्कृति मंच द्वारा प्रस्तुत उलगुलान गीत से की गयी।

अवसर पर आन्दोलनकारी दयामनी बारला ने कहा कि बिरसा मुंडा उलगुलान से भी अधिक चुनौतीपूर्ण स्थिति बनायी जा रही है। मोदी जी मन की बात में बिरसा मुंडा का गुणगान और ‘जन जातीय गौरव ‘ की बात करते हैं तो दूसरी ओर, जिन आदिवासियों के जल-जंगल-ज़मीन के अधिकार के लिए बिरसा मुंडा लड़े आज उनकी ज़मीनों को डिजिटल इंडिया के नाम पर ड्रोन सर्वे के जरिये हड़पने की साजिश भी चला रहे हैं। आज आदिवासियों को फिर से अपनी ज़मीनें बचाने की लड़ाई के लिए एकजुट होना होगा। आदिवासी बुद्धिजीवी प्रेमचंद मुर्मू ने कहा कि जब संविधान की शपथ लेकर शासन करने वाले सिरे से उसे व्यवहार में खारिज कर आदिवासी अधिकारों को निरस्त कर रहे हैं तो हमें भी अपने सभी अधिकारों के प्रति जागरूकता और एकजुटता बढ़ानी होगी।

कन्वेंशन की ओर से देवकी नंदन बेदिया ने आदिवासी मुद्दों का प्रस्ताव पत्र प्रस्तुत किया। जिस पर झारखण्ड से वाल्टर कंडूलना, जेरोम जेराल्ड व गौतम सिंह मुंडा के अलावा विभिन्न राज्यों के दर्जनों प्रतिनिधियों ने विचार रखा। सम्मलेन से देशव्यापी आदिवासी आन्दोलन के 30 सूत्री मुद्दों का चार्टर पारित कर आन्दोलन की रूप रेखा तय की गयी।

कन्वेंशन संचालन के लिए प्रतिमा इन्ग्पी व रवि फान्चो ( कार्बी आन्गालंग,असम ), तिरुपति गोमंगो ( ओड़िसा ), सुमंती तिग्गा (चाय बगान, सिलीगुड़ी), देवकी नंदन बेदिया व जेवियर कुजूर को अध्यक्ष मंडल का सदस्य चुना गया। कन्वेंशन ने दयामनी बारला , देवकीनंदन बेदिया व जेवियर कुजूर समेत 19 सदस्यीय राष्ट्रीय संयोजन समिति, 41 सदसीय राष्ट्रीय परिषद् का चुनाव किया। असम के डा. जयंत रांगपी, प्रेमचंद मुर्मू व वाल्टर कंडूलना समेत 5 सदस्यीय राष्ट्रीय सलाहकार मंडल तथा सॉलीडैरिटी टीम का गठन किया गया।

इसके पूर्व 14 नवम्बर को कन्वेंशन के उद्घाटन सत्र में झारखण्ड जन संस्कृति मंच की प्रेरणा, मांदर, सेंगेल व अन्जोम संताली टीमों द्वारा आदिवासी जन गीत व नृत्य की भव्य प्रस्तुति कि गयी। इस अवसर पर चर्चित फिल्मकार श्रीप्रकाश निर्मित शहीद कामरेड महेंद्र सिंह पर आधारित डाक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन किया गया।

(झारखंड से वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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