Tuesday, January 31, 2023

कुशीनगर के जोगिया जनूबी पट्टी में लग गया लोक संस्कृतियों का मेला, उद्घाटन के साथ ही जम गया रंग

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फाजिलनगर (देवरिया)। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के जोगिया जनूबी पट्टी में 14 अप्रैल की शाम दो दिवसीय लोक रंग महोत्सव की शुरूआत हुई। महोत्सव के प्रथम दिन देश के विभिन्न हिस्सों से आए लोक कलाकारों की प्रस्तुति में हमारी लुप्त हो रही लोकसंस्कृति जहां एक बार फिर जीवंत हो उठी, वहीं लोक कलाकारों ने यह भी संदेश दिया कि जनसंस्कृति के जरिये मजहबी एकता को मजूबत किया जा सकता है।

जोगिया जनूबीपट्टी में पिछले कई दिनों से लोक कलाकारों का जमघट लगना शुरू हो गया था। यहां उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार,राजस्थान,महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों से लोक कलाकार आए हुए हैं। पूर्वांचल के भोजपुरी माटी के इस गांव के घरों से लेकर गलियां तक हमारी लोक संस्कृति की तस्वीरों से पट चुकी हैं। इन तस्वीरों में रंग भरने का काम आजमगढ़ की संभावना लोक कला की टीम ने किया है। ये तस्वीरें ही आयोजन की समृद्धि का यहां आने वाले अतिथियों को एहसास करा दे रही हैं। रात आठ बजे महोत्सव की शुरुआत अतिथियों ने लोकरंग -4 पुस्तक का लोकार्पण कर किया।

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इस पुस्तक के माध्यम से लोकरंग की परंपरा के साथ ही इसके प्रयासों की तस्वीर प्रस्तुत करने का कार्य किया गया है। कोरोना के दो वर्ष के कार्यकाल को छोड़ दें तो लगातार पंद्रह वर्षों से ये आयोजन हो रहे हैं जिसकी संकल्पना सांस्कृतिक भड़ैती व फूहड़पन के विरुद्ध जनसंस्कृति के संवर्द्धन की है। इसी लिहाज से देश की प्रगतिशील व रेडिकल ताकतों का यहां आयोजन में हिस्सा लेने का क्रम लगातार जारी है।

लोकरंग महोत्सव 2022 का उद्घाटन करते हुए बतौर मुख्य अतिथि अपने संबोधन में मुम्बई से आए देश के जाने माने सामाजिक कार्यकर्ता प्रोफेसर राम पुनियानी ने कहा कि हमारे लोकतांत्रिक व सांस्कृतिक मूल्यों पर लगातार हमले हो रहे हैं। सांप्रदायिक उन्माद की घटनाओं में यह साफ देखने को मिल रहा है। ऐसे में समाज को बांटने वाली ताकतों को बेनकाब करते हुए उनके खिलाफ हमें लड़ाई लड़ने का एक मात्र हथियार हमारे सामाजिक व सांस्कृतिक सरोकार ही हो सकते हैं। जिसे आगे बढ़ाने के लिए ऐसे आयोजनों की जरूरत है। जिसे हमें देश के विभिन्न हिस्सों में निरंतर जारी रखना होगा।

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बीएचयू वराणसी के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. चौथीराम ने कहा कि पिछले पंद्रह वर्षों से हो रहे लोकरंग महोत्सव ने एक छोटे से गांव को विश्व के नक्शे पर प्रमुखता से ला दिया है। जनता के पैसे से जनता की कलाओं को समृद्ध करने की यह कोशिश बहुत ही सराहनीय है। यह आयोजन श्रमजीवी समाज को मजबूत बनाने का काम करेगी। लोकरंग सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष व आयोजक सुभाष चंद्र कुशवाहा ने सभी के प्रति आभार प्रकट करते हुए विस्तार से अपने आयोजनों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भोजपुरी क्षेत्र में हमारे लोक कला व संस्कृति पर लगातार हमले हो रहे हैं। इस सांस्कृतिक हमले के खिलाफ व्यापक गोलबंदी के लिए हमें ऐसे आयोजनों की ओर जाना होगा। जिसमें आम आदमी की हिस्सेदारी के बदौलत ही हम अपनी खोती जा रही लोक कलाओं व संस्कृति को बचा सकते हैं।

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लोकरंग महोत्सव में प्रस्तुति की शुरुआत मतिरानी देवी व गांव की महिलाओं की ओर से प्रस्तुत झूमर गीत ‘खेतवा में लागल बा कटनिया, पिया पालटनिया में गइले..’ से हुआ। इसके बाद संकल्प संस्था बलिया की टीम ने आशीष त्रिवेदी के निर्देशन में परंपरागत भोजपुरी लोकगीत व जन गीतों की प्रस्तुति से लोकरंग को ऊंचाइयां प्रदान की। इसके बाद रामकोला क्षेत्र के फरना निवासी राजन गोबिंद राव ने बांसुरी वादन प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया। ताल नृत्य संस्थान भागलपुर बिहार की झिझियां, गोदना, जट जटिन लोकनृत्य व डोमकच नृत्य नाटिका प्रस्तुत कर लोक संस्कृतियों को जीवंत कर दिया।

इस आयोजन में पहली बार प्रस्तुति देने आए महाराष्ट्र के नागपुर की आम्रपाली लावणी डांस ग्रुप के कलाकारों ने लावणी नृत्य प्रस्तुति से सबको रोमांचित कर दिया। राजस्थानी लोकगीत एवं नृत्य, पारंपरिक मांगणियार के कलाकार इमामुद्दीन, चिरमी सपेरा, पापिया कालबेलिया, जस्सा खान, टगा राम आदि ने हारमोनियम, ढोलक, मोरचंग, ढोल आदि की जुगलबंदी से लोकरंग के आयोजन ने चार चांद लगा दिया।

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कार्यक्रम के अंत में सूत्रधार आजमगढ़ की टीम ने अभिषेक पंडित की ओर से निर्देशित नाटक ‘बोधू सिंह अहीर’ नाटक प्रस्तुत कर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को आम लोगों से परिचित कराते हुए आजादी के लिए उनके दिए योगदान को मंच पर उतारा। बोधू सिंह अहीर 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूतों में से एक थे। जिनका संघर्षों का इतिहास आमजन की नजरों से ओझल है। इसे अपने अभिनय के माध्यम से उपस्थित दर्शकों के मन मस्तिष्क पर चस्पा करने में ये कलाकार सफल होते दिखे। इस मंचन में शशिकांत, ममता पंडित, हरिकेश मौर्य, डॉ. अलका सिंह, रितेश, अंगद, संदीप, आदित्य, अभिषेक, अखिलेश, सूरज कुमार आदि ने अभिनय किया। कार्यक्रम का संचालन रीवा विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर दिनेश कुशवाहा ने किया।

(जोगिया जनूबीपट्टी से जितेंद्र उपाध्याय की रिपोर्ट।)

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