Monday, August 8, 2022

झारखंड में उड़ रही हैं खाद्य सुरक्षा कानून की धज्जियां, गढ़वा में 12 हजार लाभुकों को नहीं मिला अक्तूबर का राशन

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1 एवं 2 दिसम्बर 2021 को भोजन का अधिकार अभियान (झारखण्ड) द्वारा गढ़वा जिले के बड़गढ़ प्रखंड के 3 जन वितरण दुकानदारों, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून से आच्छादित राशन कार्ड लाभुकों तथा अनौपचारिक रूप से प्रखंड विकास पदाधिकारी सह पणन पदाधिकारी के साथ खाद्यान्न वितरण सम्बन्धी प्रशासनिक कार्यों की जानकारी हासिल की गई। इस दौरान परसवार पंचायत के तहत आने वाले कलाखजुरी में ग्रामीणों के साथ बैठक भी की गई। बैठक में यह बात खुलकर आई कि जिले में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं क्योंकि जिले के भंडारिया प्रखंड में 39 गांव एवं बड़गड के 41 गांव के गुलाबी कार्ड युक्त 10414 परिवार और पीला कार्ड युक्त 1409 परिवारों के लाभुकों को अक्टूबर माह का राशन ही वितरित नहीं किया गया है, बावजूद इसके ऑनलाइन रिकार्ड में पूरा वितरण दिखाया गया है, जबकि लाभुकों को एक छटाक अनाज नहीं दिया गया है।

इस बैठक में करीब 60 से अधिक PH एवं अन्त्योदय कार्डधारी महिला पुरुष मौजूद थे। क्षेत्र भ्रमण के क्रम में खाद्यान्न वितरण से सम्बंधित जो मामले परिलक्षित हुए हैं वो निम्नलिखित हैं।

•    ग्राम कलाखजुरी के किसी भी राशनकार्ड धारी को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के अंतर्गत वितरण किए जाने वाला खाद्यान्न अक्टूबर महीने में डीलरों द्वारा वितरण नहीं किया गया है।

•    कार्डधारकों को सिर्फ प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत दिया जाने वाला मुफ्त अनाज ही वितरित हुआ है।

•    राशन वितरण हेतु पॉश मशीन से जो पर्ची प्रिंट होती है वह भी कार्डधारकों को नहीं दी जाती है।

•    दीपक स्वयं सहायता समूह की संचालिका द्वारा अगस्त 2016 से ही अन्त्योदय कार्ड में 2 किलोग्राम प्रति कार्ड एवं 3 से अधिक सदस्यों वाले पीएच कार्ड से 2 किलो प्रति कार्ड खाद्यान्न की कटौती की जाती रही है।

•    कलाखजुरी गांव के कार्डधारी दो डीलरों के अंतर्गत आते हैं। एक अरविन्द लकड़ा जिनका अनुज्ञप्ति क्रमांक 42/2001 है तथा दूसरा दीपक स्वयं सहायता समूह जिनकी अनुज्ञप्ति 2007/11 है।

•    ग्रामीणों के कथनानुसार डीलर अरविन्द लकड़ा को प्रशासन द्वारा अगस्त 2016 से ही निलंबित किया गया है इस वजह से सभी कार्डधारकों को दीपक स्वयं सहायता समूह के द्वारा ही राशन वितरण किया जाता है।

•    इस गाँव के अधिकांश राशन कार्डों में अक्टूबर माह में मुहैया कराये जाने वाले खाद्यान्न का कॉलम रिक्त है। अर्थात् यह इस बात का सबूत है कि उनको अनाज नहीं दिया गया है।

•    कुल 56 कार्ड धारकों ने जिला शिकायत निवारण पदाधिकारी, गढ़वा को ग्राम सभा में लिए गए प्रस्ताव के आलोक में शिकायत प्रेषित की है। शिकायत की एक प्रति झारखण्ड राज्य खाद्य आयोग को प्रेषित किया गया है।

जन वितरण प्रणाली के डीलर अरविन्द लकड़ा का बयान

डीलर अरविन्द लकड़ा ने बताया कि विगत करीब 5 सालों से राशन दुकान का संचालन नहीं किया जा रहा है। क्योंकि अनुमंडल अधिकारी रंका ने उनको समय रहते पॉश मशीन आवंटन के लिए अपना आधार कार्ड जमा नहीं करने के कारण निलंबित कर दिया है। उनके अधीन 85 अन्त्योदय कार्डधारी एवं 86 प्राथमिकता वाले परिवार शामिल थे। जबकि उनके दुकान पर जन वितरण दुकान का बोर्ड अब भी टंगा हुआ है और उन्हीं के नाम पर दुकान का संचालन भी किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अनुज्ञप्ति नवीनीकरण हेतु एक बार वे अनुमण्डल कार्यालय गए हुए थे।

जन वितरण प्रणाली के डीलर दीपक स्वयं सहायता समूह की संचालिका सिल्वंती का बयान

दीपक स्वयं सहायता समूह की संचालिका डीलर सिल्वंती ने बताया कि कुल 89 पीएच एवं 39 अन्त्योदय कार्डधारक हैं। उन्हीं के द्वारा डीलर अरविन्द लकड़ा के कार्डधारी भी खाद्यान्न एवं अन्य सामग्री लेते हैं। दोनों के लिए अलग-अलग पॉश मशीनें विभागीय स्तर से ही उपलब्ध कराया गया है। अक्टूबर 2021 में राशन आपूर्ति विभाग से ही NFSA के अंतर्गत खाद्यान्न की आपूर्ति नहीं की गई है। इस कारण किसी भी कार्डधरी को राशन वितरण नहीं किया गया है। जबकि ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार अक्टूबर माह में 12.75 क्विंटल चावल एवं 8 क्विंटल गेहूं का वितरण दिखाया गया है। अर्थात् फर्जी रिकॉर्ड का संधारण किया गया है। उनके द्वारा सिर्फ प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का ही अनाज वितरित किया गया है। डीलर के द्वारा आवंटन प्राप्ति पंजीकरण का संधारण नहीं किया गया है। इसके चलते प्रति माह सामग्री वितरण के उपरांत बचत सामग्री का कोई ब्यौरा नहीं दिखाया गया। झारखण्ड लक्षित जन वितरण (नियंत्रण) आदेश 2019 में प्रावधान होने के बावजूद भी दुकान के बाहर कार्डधारकों की सूची और उनको दिए जाने वाले अधिकारों का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। इस डीलर के द्वारा कार्डधारकों को सामग्री वितरण के बाद हस्ताक्षर नहीं कराया जाता है बल्कि हस्ताक्षर के स्थान पर दीपक स्वयं सहायता समूह लिखा जाता है।

जन वितरण प्रणाली के डीलर स्वाति तिर्की का बयान

     परसवार पंचायत के ही गोठानी गाँव के कार्डधारकों की डीलर स्वाति तिर्की ने कहा की उनके अधीन कुल 112 पीएच एवं 86 अन्त्योदय कार्डधारी हैं। उसने भी यह स्वीकारा कि अक्टूबर महीने में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के अंतर्गत वितरित किया जाने वाले खाद्यान्न का आवंटन अप्राप्त है, इस कारण किसी भी कार्डधारी को राशन वितरित नहीं किया जा सका है। सिर्फ प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का ही अनाज वितरित किया गया है। इनकी दुकान के बाहर भी कार्डधारकों की सूची और उनको दिए जाने वाले अधिकारों का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। आपूर्ति विभाग से प्राप्त आवंटन  सामग्रियों से सम्बंधित पंजीकरण का संधारण भी नहीं किया गया है। जिस वजह से वितरण के उपरान्त बचत सामग्रियों का ब्यौरा उपलब्ध नहीं है। ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार डीलर स्वाति तिर्की द्वारा कुल 165 कार्डधारियों के बीच 28.73 क्विंटल चावल एवं 18.82 क्विंटल गेहूं का वितरण दिखाया गया है, जबकि लाभुकों को एक छटाक अनाज नहीं दिया गया है।

प्रखंड विकास पदाधिकारी सह पणन अधिकारी का बयान

अनौपचारिक मुलाकात एवं दूरभाष संपर्क के जरिये प्रखंड विकास पदाधिकारी बडगढ़ ने बताया कि एजीएम ने अक्टूबर महीने में वितरित किये जाने वाले खाद्यान्न के लिए पहले एसआईओ सृजित किया था, लेकिन बाद में उनके द्वारा सृजित एसआईओ को किन्हीं कारणों से रद्द कर दिया गया जिस वजह से डीलरों तक राशन नहीं पहुंचा है। यह मामला सिर्फ भंडरिया प्रखंड का नहीं है बल्कि पूरे गढ़वा जिले का है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि खाद्यान्न मिलना कार्डधारकों का क़ानूनी हक़ है, उन्हें राशन हर हाल में डीलरों द्वारा वितरित कराया जाएगा। यह उनका प्रशासनिक दायित्व है।

  भोजन का अधिकार अभियान, झारखण्ड की मांगें

•    जिला प्रशासन तत्काल वितरण प्रणाली में वृहद पैमाने पर की गई गड़बड़ी की जांच समिति गठित करते हुए ससमय जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करे।

•    राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून से आच्छादित जिन भी कार्डधारियों को खाद्यान्न से वंचित किया गया है, उन सबको क़ानूनी प्रवधानों के अनुसार खाद्य सुरक्षा भत्ता का भुगतान करे।

•    इस गड़बड़ी के लिए जो भी डीलर जिम्मेवार हैं उनकी अनुज्ञप्ति सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार तत्काल रद्द किये जाएँ।

•    झारखण्ड राज्य खाद्य आयोग इस गंभीर मुद्दे पर तत्काल स्वत: संज्ञान ले।

•    झारखण्ड लक्षित जन वितरण (नियंत्रण) आदेश 2019 के तहत उचित मूल्य की दुकानें अहस्तांतरणीय हैं और उनके निलंबन की अधिकतम अवधि 90 दिनों की हैं। किस परिस्थिति में डीलर अरविन्द लकड़ा की दुकान पिछले 5 सालों से दीपक स्वयं सहायता समूह के द्वारा चलाया जा रहा है? इसकी भी विस्तृत जांच कराई जाए।

क्षेत्र भ्रमण में शामिल सदस्यगण

(1)  जेम्स हेरेंज (सदस्य, भोजन का अधिकार अभियान)।

(2)  मिथिलेश कुमार (सदस्य, भोजन का अधिकार अभियान)।

(3)  सुनील मिंज ((AAFIRTS)। 

(4)  फिलिप कुजूर (AAFIRTS)।

(5)  दीपक बाड़ा, फिल्मकार।

(6)  विश्राम कुजूर (ग्राम प्रधान, कला खजुरी)

(7)  राजेंद्र कच्छप (अध्यक्ष, वन अधिकार समिति, कला खजुरी)।

(8)  संजय कुजूर, सचिव, ग्राम सभा गोठानी।

(9)  आगरेन केरकेट्टा, नरेगा सहायता केंद्र, बडगढ़।

(10) फिरोज लकड़ा।

(11) विश्वनाथ बखला, उप ग्राम प्रधान कला खजुरी।

(झारखंड से वरिष्ठ पत्रकरा विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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