Tuesday, November 29, 2022

पटना: 18 मार्च को विधानसभा मार्च की जगह अब माले करेगा किसान-मजदूर महापंचायत

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पटना। बिहार में भाकपा-माले, अखिल भारतीय किसान महासभा व खेग्रामस के संयुक्त बैनर से 18 मार्च को पटना में प्रस्तावित विधानसभा मार्च की जगह किसान-मजदूरों की महापंचायत का आयोजन होगा। यह महापंचायत गेट पब्लिक लाइब्रेरी, गर्दनीबाग में 12 बजे से आरंभ होगी। जिसमें माले महासचिव कॉ. दीपंकर भट्टाचार्य सहित दिल्ली बॉर्डर पर विगत 100 दिनों से लगातार चल रहे किसान आंदोलन के नेता गुरनाम सिंह भक्खी व युवा महिला नेता नवकिरण भी शामिल होंगे।

यह जानकारी आज पटना में तीनों संगठनों के नेताओं ने संवाददाता सम्मेलन में दी। संवाददाता सम्मेलन को भाकपा-माले के राज्य सचिव कुणाल, अखिल भारतीय किसान महासभा के महासचिव व अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के बिहार-झारखंड प्रभारी राजाराम सिंह और खेग्रामस के राष्ट्रीय अध्यक्ष धीरेन्द्र झा ने संयुक्त रूप से संबोधित किया।

नेताओं ने कहा कि महापंचायत में महागठबंधन के सभी दलों को शामिल होने का आमंत्रण दिया गया है। राजद, कांग्रेस, सीपीआई व सीपीआइएम को पत्र लिखकर आमंत्रित किया गया है। इन दलों ने कार्यक्रम में अपनी भागीदारी पर सहमति भी दी है। महागठबंधन के दलों के अलावा किसान आंदोलन से जुड़े बौद्धिक हस्तियों को भी आमंत्रित किया गया है।

सभी 7 यात्रायें बिहार के तकरीबन 35 जिलों का दौरा करके पटना वापस लौट आई हैं। इस क्रम में उन्होंने 300 से अधिक छोटी-बड़ी नुक्कड़, आम व ग्राम किसान सभायें आयोजित की और किसान-मजदूरों को महापंचायत में शामिल होने का आमंत्रण दिया। इसने बिहार में लगभग 5000 किलोमीटर की यात्रा तय की और 2 हजार गांवों व तकरीबन 1 लाख किसानों से सीधा संवाद स्थापित किया। किसान यात्रा के दौरान तीनों कृषि कानूनों की हकीकत से किसानों को वाकिफ कराया गया। संवाददाता सम्मेलन में सभी 7 यात्राओं के टीम लीडर भी उपस्थित थे। इसमें किसान महासभा के राज्य सचिव रामाधार सिंह, राज्य अध्यक्ष विशेश्वर प्रसाद यादव, नवल किशोर, विजय सिंह आदि प्रमुख रूप से शामिल थे।

किसान यात्राओं के दौरान किसानों की विभिन्न मांगें उभरकर सामने आईं, जिस पर वे तत्काल हस्तक्षेप चाहते हैं। शाहाबाद व मगध क्षेत्र में सोन नहर प्रणाली को ठीक करने, नहरों के निचले छोर तक पानी पहुंचाने और बहुप्रतीक्षित इंद्रपुरी जलाशय परियोजना को पूरा करने आदि मांगें प्रमुखता से उभर कर सामने आईं। पूर्वी बिहार में मक्का उत्पादक किसानों ने एमएसपी पर मक्का न खरीदने व खाद्य पदार्थों से इथेनॉल बनाने पर गहरी चिंता व्यक्त की। सीमांचल-मिथिलिांचल के किसान बाढ़ समस्या का स्थायी समाधान चाहते हैं। चंपारण में ईख उत्पादक किसानों ने बकाया का सवाल उठाया। इन किसानों का लाखों रुपया बकाया है। चीनी मिलों को चालू करने की भी मांग उठी। किसानों ने मोदी सरकार द्वारा लाए गए तीनों कृषि कानूनों पर गहरी चिंता व्यक्त की और मोदी सरकार के अड़ियल रवैये की आलोचना की।

किसान यात्रा में भूमिहीन-बटाईदार किसानों व गरीबों की भी भागीदारी हुई। उन्होंने चिंता जाहिर की कि यदि सरकार अनाज खरीदेगी नहीं तो जनवितरण प्रणाली कहां से चलेगी? गरीबों को अनाज कहां से मिलेगा? वे इस बात को बखूबी समझ रहे थे कि मंडियों की व्यवस्था खत्म कर देने से न केवल किसान बल्कि गरीबों पर उसका सबसे खराब असर पड़ेगा। वे जनवितरण प्रणाली के खत्म हो जाने की आशंकाओं से घिरे दिखे।

नेताओं ने कहा कि तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की केंद्रीय मांग के साथ-साथ एमएसपी को कानूनी दर्जा, एपीएमसी एक्ट की पुनर्बहाली और छोटे-बटाईदार किसानों को प्रधानमंत्री किसान योजना का लाभ प्रदान करना आदि मुद्दों के इर्द-गिर्द यहां के किसानों की गोलबंदी आरंभ हो गई है। 18 मार्च को एक बार फिर पटना की सड़क पर यह गोलबंदी दिखेगी।

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित।)

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