Sunday, December 4, 2022

हसदेव आंदोलन का समर्थन करने सरगुजा पहुंचीं लिसिप्रिया कंगुजम

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के हसदेव में चल रहे पर्यावरण संरक्षण आंदोलन का समर्थन करने मणिपुर से लिसिप्रिया कंगुजम पहुंची हैं। लिसिप्रिया ने ग्राम हरिहरपुर में आंदोलनकारियों को संबोधित किया है। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण आंदोलन स्थल पर मौजूद हैं। हसदेव अरण्य क्षेत्र में जंगल काटने के खिलाफ ग्रामीण आंदोलित हैं। एक लंबे आंदोलन के बाद कई तरह के गतिरोध और सियासी रंग इस आंदोलन ने देखे हैं। अब एक 11 वर्षीय बच्ची मणिपुर से ग्राम हरिहरपुर पहुंची है। यहां आंदोलन से जुड़े आलोक शुक्ला भी उनके साथ पहुंचे हैं। मणिपुर की लिसिप्रिया कंगुजम महज 11 वर्ष की हैं।

लिसिप्रिया एक भारतीय बाल पर्यावरण कार्यकर्ता हैं। 2019 में उन्हें डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम चिल्ड्रन अवार्ड, अंतरराष्ट्रीय बाल शांति पुरस्कार और इंडिया पीस प्राइज से सम्मानित किया गया है। छह साल की उम्र से पर्यावरण संरक्षण के लिए आंदोलन चला रहीं लिसिप्रिया को 2019 में स्पेन में हुई यूनाइटेड नेशन कॉन्फ्रेंस में आमंत्रित किया गया। उन्हें संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम में ग्रेटा थनबर्ग और जेमी मार्गोलिन के साथ एक विशेष पर्यावरण कार्यकर्ता के रूप में चुना गया था। इंडिया टाइम्स ने उन्हें भारत की सबसे कम उम्र की जलवायु कार्यकर्ता का दर्जा दिया है। इसके अलावा वह 32 देशों के 400 संस्थानों में भ्रमण कर चुकी हैं।

पिछले वर्ष 2 अक्तूबर से 14 अक्तूबर तक हसदेव बचाओ पदयात्रा निकालकर  14 अक्तूबर को हसदेव के सैकड़ों आदिवासी रायपुर पहुंच कर राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मिले थे। एक वर्ष बाद पुनः हसदेव की वन संपदा को बचाने और आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने का वादा याद दिलाते हुए ग्राम हरिहरपुर में विशाल सम्मेलन का आयोजन किया गया।

सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संरक्षण कार्यकर्ता 11वर्षीय लिसिप्रिया कंजूगम शामिल हुई। उन्होंने कहा कि आज जंगलों का विनाश करके पूरी धरती को खत्म किया जा रहा है। हसदेव की लड़ाई सिर्फ आपका नहीं बल्कि हम सब का है और वो पूरी तरह से इसमें शामिल है। उन्होंने कहा कि वो हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर हसदेव को बचाने की बात उठाएंगी।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के आलोक शुक्ला ने कहा कि हसदेव अरण्य के कोल ब्लॉक को निरस्त करने विधानसभा के सर्व सम्मति से हुए प्रस्ताव को छत्तीसगढ़ सरकार ने भेजा था लेकिन केंद्रीय कोयला मंत्री ने कोल ब्लॉक निरस्त करने से मना कर दिया।

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दरअसल आदिवासियों के विस्थापन और जंगल के विनाश की कीमत पर अडानी के मुनाफे के लिए दोनों दल सहमत है। और यदि ऐसा नहीं है तो।

हसदेव में पेड़ कटाई का विरोध करने वाली छत्तीसगढ़ भाजपा दिल्ली जाकर कोल ब्लॉक निरस्त करने की मांग क्यों नही करती? छत्तीसगढ़ सरकार भी अपने हिस्से की कार्यवाही करते हुए वन स्वीकृति और कंसेंट टू आपरेट की अनुमति निरस्त क्यों नहीं करती?

उन्होंने कहा कि हसदेव की लड़ाई अब सिर्फ धरना स्थल पर नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ के प्रत्येक विधानसभा के गांव और शहर तक लेकर जाएंगे।

एक प्रतिनिधिमंडल भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होकर राहुल गांधी से मुलाकात कर उनका वादा याद दिलाएंगे। राहुल गांधी स्पष्ट करें कि वो छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के साथ हैं या अडानी के साथ स्पष्ट करें।

हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति के उमेश्वर सिंह आर्मो ने कहा कि राज्यपाल ने पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र की प्रशासक होने के दायित्व को निभाते हुए कहा था कि हसदेव के आदिवासियों के साथ अन्याय होने नहीं दिया जायेगा। मुख्यमंत्री ने भी फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव की निष्पक्ष जांच का वादा किया था लेकिन दुखद रूप से कहना पढ़ रहा है कि दोनों ने हमारे साथ न्याय नहीं किया।

जयसिंह खुसरो ने कहा कि हमारे आंदोलन को कुचलने की लगातार कोशिश हो रही है। आंदोलन का नेतृत्व करने वाले साथियों पर फर्जी मामले पंजीबद्ध किए जा रहे हैं लेकिन हम डरने वाले नहीं है। आंदोलन और तेज व व्यापक होगा।

घाटबर्रा सरपंच जयनंदन पोर्ते और पूर्व जनपद सदस्य बालसाय कोर्राम ने कहा कि 27 सितंबर को फोर्स लगाकर जबरन पेड़ काटे गए। सुबह लोगों को गांव के बाहर निस्तार, खेतों तक जाने नहीं दिया। ऐसी स्थिति बनाई गई जैसे हम आजाद नहीं गुलाम हैं। जयमंदन ने कहा कि घाटबर्रा गांव की ग्रामसभा ने कभी भी खनन की सहमति नहीं दी। तानाशाही तरीके से जबरन हमारे जंगल की कटाई की गई है। हम पूरे सरगुजा संभाग को एकजुट कर आंदोलन को व्यापक करेंगे सभा को बिलासपुर हसदेव बचाओ आंदोलन के चंद्रप्रताप वाजपेयी, श्रेयांश बुधिया, साकेत तिवारी सर्व आदिवासी समाज के चंद्रभान सिंह नेटी, छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के सोनू राठौर सहित क्षेत्र के बड़ी संख्या में सरपंच शामिल हुए।

(छत्तीसगढ़ से जनचौक संवाददाता तामेश्वर सिन्हा की रिपोर्ट।)

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