Friday, August 12, 2022

भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र का चुनावी खेल

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भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के घास फूल जर्सी वाली टीम के 11 खिलाड़ी  प्रैक्टिस करने में लग गए हैं। दूसरी तरफ भगवा जर्सी वाली टीम के खिलाड़ी अभी तक मैदान के बाहर बैठकर कप्तान के नाम का ऐलान किए जाने का इंतजार कर रहे थे। घास फूल जर्सी वाली टीम की कप्तान ममता बनर्जी के नाम का ऐलान पहले ही हो चुका था। अब भगवा जर्सी वाली टीम का कप्तान प्रियंका टिब्रेवाल को बनाने का ऐलान किया गया है।

ममता बनर्जी ने फुटबॉल में किक लगा कर ऐलान कर दिया है कि भवानीपुर में पूरे दमखम के साथ खेलेंगे। पर भगवा जर्सी वाली टीम के मैनेजर दिलीप घोष अपनी टीम के कप्तान के नाम को लेकर अभी तक पसोपेश में थे। उन्होंने खुलेआम कबूल भी किया है कि उनकी टीम में कप्तानी के सवाल पर कोई आगे नहीं आ रहा है। पूर्व राज्यपाल तथागत राय से भी कप्तान बनने का अनुरोध किया गया था पर उन्होंने इनकार कर दिया। पिछली बार उम्मीदवार रहे रूद्रनिल घोष को सोभान देव चट्टोपाध्याय ने 28 हजार मतों से हराकर बोल्ड आउट कर दिया था। लिहाजा वे दोबारा हाथ जलाने को तैयार नहीं हुए। भगवा टीम के एक और खिलाड़ी प्रताप चटर्जी का भी नाम आया था पर उन्होंने भी किनारा कर लिया। भगवा टीम के नए खिलाड़ी शुभेंदु अधिकारी मैदान में उतरने को बेताब थे पर दिलीप घोष को इससे एतराज था। इसकी वजह यह है कि भाजपा में इन दिनों चल रहे सियासी खेल में शुभेंदु अधिकारी के सामने दिलीप घोष का कद बौना पड़ने लगा है। शुभेंदु को मोदी और शाह जिस तरह दुलारते हैं वह दिलीप घोष को रास नहीं आता है। अलबत्ता इसमें कोई शक नहीं है कि अगर शुभेंदु अधिकारी कप्तान होते तो मैच जानदार हो जाता। भगवा टीम के मैनेजर दिलीप घोष का मैच शुरू होने से पहले ही हार मान लेने का अंदाज बाकी भगवाधारियों को रास नहीं आया है। उनका कहना है कि इस हाल में वे भला ममता बनर्जी को क्या चुनौती देंगे।

दूसरी तरफ ममता बनर्जी ने अपनी टीम को किस तरह सजाया है जरा इसका एक नजारा देखिए। सामने की कतार में मंत्री सुब्रत मुखर्जी, मंत्री फिरहाद हकीम और मंत्री अरूप विश्वास को खड़ा किया है। उन्हें इस विधानसभा क्षेत्र में अलग-अलग वार्डों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पीछे की कतार में मंत्री सोभन देव चट्टोपाध्याय, मंत्री पार्थो चटर्जी, अरूप राय और मदन मित्रा जैसे भारी-भरकम नेता मोर्चा संभाल रहे हैं। ममता बनर्जी ने इसी क्षेत्र के निवासी पूर्व पार्षद और एक ख्याति प्राप्त एडवोकेट को इलेक्शन एजेंट बनाया है। दूसरी तरफ भगवा टीम की कप्तान प्रियंका टिब्रेवाल शनिवार को काली मंदिर में पूजा करने के बाद रविवार से भवानीपुर विधानसभा के चुनावी मैदान में अपने खिलाड़ियों को सजाना शुरू किया है। प्रियंका टिब्रेवाल ने सांसद अर्जुन सिंह को अपना इलेक्शन एजेंट बनाया है। अर्जुन सिंह भवानीपुर से करीब 50 किलोमीटर दूर जगदल में रहते हैं। इससे एहसास हो जाता है कि भगवा टीम के खिलाड़ी कितना मजबूत हैं। भगवा टीम के प्रचारकों की सूची में बाबुल सुप्रियो का भी नाम है। अब कहने को तो बाबुल सुप्रियो राजनीति छोड़ चुके हैं पर सांसद बने रहेंगे।

आइए अब जरा दोनों कप्तानों के ट्रैक रिकॉर्ड पर गौर करें। ममता बनर्जी दक्षिण कोलकाता संसदीय क्षेत्र से माकपा के भारी-भरकम कद के नेता सोमनाथ चटर्जी को हराकर पहली बार सांसद बनी थीं। इसके बाद से वह 6 बार संसद में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। पहली बार 2011 में और दूसरी बार 2016 में वे भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुनी गई थीं। अब एक नजर भगवा टीम की कप्तान प्रियंका टिब्रेवाल के चुनावी रिकॉर्ड पर डाल लें। वे  पहली बार 2014 में भाजपा में शामिल हुई थीं और 2015 में कोलकाता नगर निगम के एक वार्ड से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने इंटाली केंद्र से चुनाव लड़ा था। वे तृणमूल कांग्रेस के स्वर्ण कमल साहा के मुकाबले 50 हजार मतों से चुनाव हार गई थीं। अब वे भवानीपुर विधानसभा केंद्र से ममता बनर्जी को चुनौती दे रही हैं।

दरअसल भगवा नेता भवानीपुर विधान सभा केंद्र के चुनाव को लेकर शुरू से ही असमंजस में रहे हैं। पहले उन्होंने सवाल उठाया कि कोविड के इस दौर में चुनाव क्यों कराया जा रहा है। इसके बाद उनका दूसरा सवाल था कि पहले नगर निगम और नगर पालिका के चुनाव क्यों नहीं कराए जा रहे हैं। उनकी मंशा थी कि किसी तरह चुनाव टल जाए और ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़े। पर निर्वाचन आयोग ने भवानीपुर केंद्र के साथ ही दो और विधानसभाओं के चुनाव कराए जाने की घोषणा कर दी। इस घोषणा के बाद पहली बार भगवा नेताओं को लगा कि निर्वाचन आयोग उनके इशारे पर कभी कभी काम नहीं भी करता है। इसके बाद भगवा नेता कहने लगे कि वकीलों से परामर्श करके अदालत जाएंगे। पर किसी भी भारी-भरकम भगवा नेता ने अदालत का रुख नहीं किया। अलबत्ता एक एडवोकेट साइन बनर्जी ने भवानीपुर विधान सभा केंद्र में चुनाव कराए जाने के विरोध में एक पीआईएल दायर की है। इसकी सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस राजर्षि भारद्वाज की डिवीजन बेंच करेगी। दूसरी तरफ कानूनविदों के मुताबिक एक बार चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद अदालत उसमें दखल नहीं दे सकती है।

लिहाजा अब यह तय है कि चुनाव होगा। कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा विरोधी मोर्चा के लिहाज से ममता बनर्जी के खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं दिया है। वाममोर्चा ने एडवोकेट श्रीजीव विश्वास को अपना उम्मीदवार बनाया है। हालांकि वाम मोर्चा 1972 के बाद से कभी भी भवानीपुर विधानसभा केंद्र में अपनी मजबूत उपस्थिति का एहसास नहीं करा पाया है।

 अब भगवा टीम को अगर टीएन सिंह जैसे चमत्कार की उम्मीद है तो खुदा खैर करे। जहां तक जानकारी है उत्तर भारत में अभी तक इस तरह की एक ही घटना घटी है। उत्तर प्रदेश में त्रिभुवन नारायण सिंह को मुख्यमंत्री चुना गया था इसके बाद जब उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ा तो हार गए और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। इसीलिए पूरे देश की निगाहें भवानीपुर विधानसभा के चुनाव परिणाम पर टिकी हैं।

(कोलकाता से वरिष्ठ पत्रकार जेके सिंह की रिपोर्ट।)

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