Sunday, December 4, 2022

बिहार के नवादा में कर्ज से परेशान परिवार ने की सामूहिक आत्महत्या

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रजौली प्रखंड के मूलतः अमावां गांव के रहने वाले केदारनाथ अपने परिवार के साथ करीब तीस साल से गढ़पर न्यू एरिया नवादा मुहल्ले में अरूणेश शर्मा के घर में किराये पर रह रहे थे। उन्होंने फल व डोसा की एक छोटी सी दुकान खोल रखी थी। परिवार में पांच बेटियों तथा दो बेटों में से दो बेटियों व एक बेटे की शादी हो चुकी है। बड़ी बेटी व बड़ा बेटा फिलहाल दिल्ली में रह रहे हैं। वहीं दूसरे नंबर की बेटी अपने ससुराल में है।

अपनी दूसरी बेटी की ही शादी में उन्होंने मनीष सिंह, विकास सिंह, टुनटुन सिंह खटाल, पंकज सिन्हा व रंजीत सिंह से कर्ज ले रखा था। जिसका भुगतान वे प्रति महीना कर रहे थे। 4-5 सालों से लगातार कर्ज की राशि का भुगतान करने के बावजूद ब्याज की दर इतनी थी कि कर्ज का कई गुना दे देने के बावजूद भी सूदखोर उन पर दबाव बनाए हुए थे। मनीष सिंह समेत सभी सूदखोरों द्वारा उनके घर पर चढ़कर गाली-गलौज किया जाता था। उनकी बेटियों पर भी सूदखोरों की नजर रहती थी और उनके साथ अभद्र व्यवहार व बलात्कार करने तक की धमकी दे चुके थे। केदारनाथ अपने परिवार को सुरक्षित नहीं पा रहे थे। उन्हें लग रहा था कि बेटियों की इज्जत बचा पाना मुश्किल है। लिहाजा, उन्होंने अपने परिवार की जिंदगी खत्म करने का निर्णय लिया।

केदारनाथ गुप्ता (65) ने पत्नी अनीता देवी (62) और यहां रह रहे अपनी तीन बेटियों व एक बेटा क्रमशः गुड़िया कुमारी (20 वर्ष), शबनम कुमारी (18 वर्ष), साक्षी कुमारी (16 वर्ष) एवं बेटा ध्रुव उर्फ प्रिंस कुमार उम्र (22 वर्ष) ने सल्फास की गोली खाकर आत्महत्या कर ली।

उन्होंने पिछले 9 नवंबर, 2022 को शहर से दो किलोमीटर दूर शोभिया कृषि फार्म के पास अवस्थित एक मजार के पास जाकर जहर खाया।

इसमें कोई दो मत नहीं कि यह घटना सूदखोरों के आतंक के कारण ही घटी। पत्नी व दो बेटी की लाश नवादा शहर से करीब दो किलोमीटर दूर मजार शरीफ के पास मिली। बाकी बेटी, बेटा तथा केदारनाथ गुप्ता को किसी तरह से पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अस्पताल जाने के दौरान ही केदारनाथ गुप्ता ने रास्ते में दम तोड़ दिया। दो बेटियों की मौत पावापुरी अस्पताल ले जाने के दौरान बीच रास्ते में हो गई। जबकि बाकी की मौत इलाज के दौरान हो गई। वैसे भी सल्फास की गोली खाने वालों का बचना मुमकिन नहीं होता।

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मौत से पहले केदारनाथ गुप्ता ने पुलिस को दिए गए अपने बयान कहा कि उसके परिवार के ऊपर 10-12 लाख रुपये का कर्ज था। जिसके कारण वो परेशान थे, इसलिए सुसाइड करना ही एकमात्र रास्ता बचा।

बता दें कि नवादा के केदारनाथ गुप्ता और उनके परिवार के 5 सदस्यों द्वारा आत्महत्या की घटना की फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट के सिलसिले में भाकपा-माले की एक राज्यस्तरीय टीम 11 नवंबर को नवादा पहुंची।

इस टीम में भाकपा-माले राज्य स्थायी समिति सदस्य और अरवल विधायक महानन्द सिंह, ऐपवा नेत्री रीता वर्णवाल, नवादा जिला सचिव भोला राम, राज्य कमेटी सदस्य नरेंद्र सिंह, सावित्री गुप्ता, किसान महासभा के राज्य सह सचिव राजेन्द्र पटेल, माले नेता मिथिलेश यादव और नवादा के कई नेता/कार्यकर्ता शामिल थे।

इस तरह की घटना पर भाकपा माले टीम के सदस्यों ने पाया कि गढ़पर न्यू एरिया में मनीष सिंह सरीखे सूदखोरों द्वारा गरीबों की पिटाई, सामान उठा ले जाने, छेड़छाड़ की लगातार घटनाएं घटती रही हैं, लेकिन किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं होने से दबंगों व सूदखोरों का मनोबल बढ़ा हुआ है। अभी उस मुहल्ले में भय और आतंक का माहौल बना हुआ है।

माले ने बिहार सरकार से मांग की है कि आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाले सभी सूदखोरों को गिरफ्तार कर उन पर हत्या का मुकदमा चलाया जाए और फास्ट ट्रैक कोर्ट में इसकी सुनवाई की जाए।

पीड़ित परिवार को कम से कम 50 लाख का मुआवजा दिया जाए व परिवार के बचे सदस्यों की सुरक्षा की गारंटी की जाए।

इस मामले की उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए ताकि यह तथ्य खुलकर सामने आ सके कि केदारनाथ गुप्ता के परिवार के साथ सूदखोर आखिर ऐसा कौन सा व्यवहार कर रहे थे कि पूरा परिवार आत्महत्या को मजबूर हुआ और महाजनी सूदखोरी समाप्त की जाए।

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बताते चलें कि बिहार में सामूहिक आत्‍महत्‍या की यह पहली घटना नहीं है, इस तरह की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। पिछले 5 जून 2022 की सुबह बिहार के समस्‍तीपुर में एक ही परिवार के पांच सदस्‍यों की फंदे से लटकती लाशें मिलीं जिससे इलाके में सनसनी फैल गई थी। दिल दहला देने वाली वह घटना समस्‍तीपुर के विद्यापतिनगर थाना के मऊ गांव में 4 जून की रात में हुई थी। परिवार के मुखिया मनोज झा भारी कर्ज के बोझ से दबे थे। कर्ज चुकाने का दबाव वे झेल नहीं सके। अंतत: उन्‍होंने परिवार समेत आत्‍महत्‍या कर ली।

वहीं बिहार में ही सामूहिक आत्‍महत्‍या की ऐसी एक और घटना साल 2021 के मार्च महीने में सुपौल जिले के राघोपुर थाना क्षेत्र के गद्दी गांव में घटित हुई थी। वहां एक परिवार के पांच सदस्‍यों मिश्रीलाल साह (52 वर्ष) उनकी पत्नी रेणु देवी (44 वर्ष) बेटी रोशन कुमारी (15 वर्ष), बेटा ललन कुमार (14 वर्ष), बेटी फूल कुमारी (08 वर्ष) के शव फंदे से झूलते मिले थे। इस घटना में भी माना गया था कि बड़ों ने आत्‍महत्‍या के पहले बच्‍चों की हत्‍या कर दी थी।

समस्‍तीपुर की घटना के बारे में बता दें कि मृतकों में मनोज झा के 10 व 7 साल के दो मासूम बेटे सत्यम व शिवम भी शामिल थे। ग्रामीणों के अनुसार संभवत: बच्‍चों की हत्‍या कर बड़ों ने आत्‍महत्‍या कर ली थी। मृतकों में मनोज झा (45 साल), उनकी मां सीता देवी (65 साल), बेटे सत्यम कुमार (10 साल) व शिवम कुमार (07 साल) एवं पत्‍नी सुंदरमणि देवी (38 साल) शामिल थीं। परिवार में केवल दो शादीशुदा बेटियां ही बच सकीं। मनोज झा ऑटो चलाकर व खैनी बेचकर अपना व परिवार का गुजरा करते थे।

वहीं सुपौल की घटना के पीछे का कारण मिश्रीलाल साह की एक बेटी की अपनी मर्जी से भागकर शादी करने से उपजा अवसाद बताया गया था। घटना के बाद परिवार समाज से कटकर रहने लगा था। मिश्रीलाल का अपने भाइयों से भी संपर्क नहीं था। परिवार आर्थिक रूप से कमजोर भी था।

भाकपा-माले के बिहार राज्य सचिव कुणाल ने राज्य में महाजनी कर्ज के दबाव के कारण आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं पर कहा है कि नवादा में केदारनाथ गुप्ता सहित उनके परिवार के अन्य 5 सदस्यों द्वारा आत्महत्या की अत्यंत दुखद घटना के पहले भी राज्य में ऐसी कई घटनाएं घट चुकी हैं। हमने राज्य सरकार से इन मामलों को गंभीरता से देखने का कई बार अनुरोध भी किया है, लेकिन कोई भी सुधार नजर नहीं आ रहा है। महाजनी सूदखोरी ऐसा जाल है जिससे गरीब कभी नहीं उबर पाते और अंत में अपनी जिंदगी समाप्त कर देने का निर्णय ले रहे हैं। यदि व्यवसाय आदि के लिए यह कर्ज महाजनों की बजाए सीधे सरकार द्वारा मिलते, तब ऐसी दुखद घटनाएं घटित नहीं होती। हमारी मांग है कि सरकार महाजनी सूदखोरी पर तत्काल रोक लगाए और जरूरत मंदों को सरकार के स्तर से कर्ज मुहैया कराए।

अगर हम आत्महत्या को लेकर वैश्विक स्तर पर बात करें, तो आत्महत्या दुनिया में मौत का दसवां सबसे बड़ा कारण है। इतना ही नहीं 1958 में अमेरिका में हुए एक शोध के अनुसार किशोर और 35 साल से कम उम्र के युवा सबसे अधिक आत्महत्या करते हैं। दुनिया भर में 2021 में करीब दो करोड़ लोगों ने आत्महत्या की और यह संख्या साल-दर-साल बढ़ती ही जा रही है। अकेले भारत में 2021 में कुल 33 हजार लोगों ने आत्महत्या की है, यानी हर दिन करीब 10 लोगों ने अपना जीवन खत्म किया।

(वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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