Saturday, October 1, 2022

मुख्तार अंसारी को हाईकोर्ट ने जेलर को धमकाने में दी सात साल की सजा

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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 2003 में जिला जेल, लखनऊ के जेलर को धमकाने के मामले में माफिया मुख्तार अंसारी को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने उसे सात साल की सजा और 37 हजार रुपये जुर्माने की सजा से दंडित किया है। यह पहली बार है कि मुख्तार को किसी आपराधिक मामले में दोषी करार दिया गया है।

यह निर्णय जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की एकल पीठ ने राज्य सरकार की याचिका पर दिया। अपील में सरकार ने विशेष न्यायालय, एमपी-एमएलए कोर्ट के 23 दिसंबर, 2020 के मुख्तार को इस मामले में बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी। विशेष न्यायालय ने अपने फैसले में गवाहों के मुकरने के आधार पर मुख्तार के खिलाफ लगे आरोप सिद्ध न हो पाने की बात कही थी।

हाईकोर्ट ने बुधवार को अपने फैसले में सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियों का उल्लेख किया, जिनमें शीर्ष अदालत यह स्पष्ट कर चुकी है कि गवाहों के होस्टाइल होने का यह आशय नहीं है कि उनके पूरे बयान को ही खारिज कर दिया जाए, बल्कि यदि होस्टाइल होने से पूर्व उसने अभियोजन कथानक का समर्थन किया है तो उसका महत्व है।

जेलर को धमकी देने के मामले में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में सरकार की ओर से पेश वकीलों का तर्क था कि मुख्तार प्रदेश में सबसे बड़ा बाहुबली है। उसके नाम से आम लोगों के साथ सरकारी लोग भी भय खाते हैं। जेलर एस के अवस्थी से पहले रहे जेलर आरके तिवारी की हत्या भी कथित रूप से इसी वजह से हुई थी, क्योंकि वहां जेल में मुख्तार को रोक-टोक पसंद नहीं थी। वहीं, हाईकोर्ट ने पाया कि वादी तत्कालीन जेलर एसके अवस्थी ने अपने पहले बयान में मुख्तार द्वारा उन्हें धमकी देने और उनके सिर पर रिवॉल्वर लगाने की बात कही, लेकिन बाद के बयान में वह मुकर गए।

न्यायालय ने कहा कि गवाह के पहले बयान के दस साल बाद दूसरा बयान दर्ज कराया गया था। तब जब वह रिटायर हो चुका था और तब उसके मुकरने का कारण मुख्तार के आपराधिक इतिहास से समझा जा सकता है।

दरअसल 2003 में मुख्तार लखनऊ की जिला जेल में निरुद्ध था। उससे मिलने तमाम लोग आया करते थे। 23 अप्रैल, 2003 को मुख्तार के कुछ लोग सुबह उससे मिलने आए, तब जेलर एसके अवस्थी जेल के अंदर ही अपने ऑफिस में मौजूद थे। उन्हें पता चला कि मुख्तार से कुछ लोग मिलने आए हैं तो उन्होंने सभी के तलाशी का आदेश दिया। इस पर मुख्तार नाराज हो गया और धमकाते हुए जेलर को कहा कि आज तुम जेल से बाहर निकलो तुम्हें मरवा दूंगा। उसने जेलर को गाली भी दी और मिलने आए लोगों में से एक की रिवॉल्वर जेलर पर तान दी।

माफिया मुख्तार को पिछले साल बांदा जेल में सिफ्ट किया गया। इससे पहले वह पंजाब के रोपड़ जेल में बंद था। पंजाब से यहां लाने के लिए प्रदेश सरकार ने 40 बार प्रयास किया था, लेकिन किसी न किसी बहाने से वह बच जाता था। बाद में कोर्ट के निर्देश पर उसे बांदा जेल लाया गया। उस पर 55 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें 40 उसके गृह जनपद गाजीपुर के एक ही थाने में दर्ज है। मुख्तार पर भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के अलावा दंगा भड़काने, हत्या, डकैती, रंगदारी, अपहरण जैसे कई संगीन मामले दर्ज हैं। अधिकांश मुकदमों में ट्रायल चल रहा है।

मुख्तार अंसारी के खिलाफ प्रयागराज के एमपी/एमएलए कोर्ट में कुल 10 मुकदमे का ट्रायल चल रहा है। मुख्तार के ऊपर चल रहे मुकदमों में कई गंभीर भी मुकदमे शामिल हैं। इसमें डबल मर्डर का एक मामला फाइनल स्टेज पर है। करीब 5 मुकदमे में फैसले भी आ चुके हैं।

मुख्तार के खिलाफ सबसे बड़ा मुकदमा मऊ के दक्षिण टोला थाने में दर्ज डबल मर्डर केस का है। पूर्वांचल के मऊ जिले में साल 2009 में ठेकेदार अजय प्रकाश सिंह उर्फ मन्ना की दिन दहाड़े बाइक सवार हमलावरों ने AK-47 का इस्तेमाल कर हत्या कर दी थी। हत्या का आरोप बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी पर लगा था। इस मर्डर केस में मन्ना का मुनीम राम सिंह मौर्य चश्मदीद गवाह था।

गवाह होने के चलते राम सिंह मौर्य को सतीश नाम का एक गनर भी दिया गया था। साल भर के अंदर ही आरटीओ ऑफिस के पास राम सिंह मौर्य और गनर सतीश को भी मौत के घाट उतार दिया गया था। इस मामले में भी मुख्तार अंसारी और उसके करीबियों के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। इस मुकदमे का ट्रायल अब आखिरी दौर में है। तीन -चार सुनवाई के बाद महीने-डेढ़ महीने बाद फैसला आ सकता है। इस मामले में मुख़्तार पर जेल में रहते हुए हत्या की साजिश रचने का आरोप है।

हत्या का एक और मुकदमा वाराणसी में दर्ज है। यह मामला कांग्रेस के नेता अजय राय के भाई की हत्या से जुड़ा हुआ है। इस मामले में चेतगंज थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। यह मुकदमा इस वक्त गवाही में चल रहा है। मामले से जुड़ी तमाम फाइल अभी वाराणसी कोर्ट से स्पेशल MP/MLA कोर्ट में नहीं आ सकी है। कांग्रेस नेता अजय राय इस मामले में वादी और गवाह दोनों हैं। इस मामले में भी तेजी से सुनवाई चल रही है।

तीसरा मुकदमा आजमगढ़ जिले में हुई हत्या से जुड़ा हुआ है। मुख्तार पर इस मामले में भी आईपीसी की धारा 302 यानी हत्या और 120 B यानी साजिश रचने का है। इस मामले की एफआईआर आजमगढ़ के तरवा थाने में दर्ज हुई थी।मुकदमा यूपी सरकार बनाम राजेंद्र पासी व अन्य के नाम से चल रहा है। इस मामले में अभी मुख्तार पर आरोप तय नहीं हुए हैं।

मुख्तार के खिलाफ चौथा मुकदमा हत्या के प्रयास से जुड़ा हुआ है। यह मामला गाजीपुर के मोहम्मदाबाद थाने में केस दर्ज है। मुकदमे की प्रक्रिया साल 2010 में ही शुरू हो गई थी। इसमें मुख्य आरोपी सोनू यादव केस से बरी हो चुका है। मुख्तार का मामला अभी ट्रायल की स्टेज पर है।

मुख्तार के खिलाफ पांचवां मामला फर्जी शस्त्र लाइसेंस हासिल करने से जुड़ा हुआ है। यह मुकदमा गाज़ीपुर के मोहम्मदाबाद थाने में दर्ज हुआ था। इसमें मुख्तार के खिलाफ दो केस दर्ज हुए हैं। पहला आईपीसी की धारा 419-420 और 467 यानी धोखाधड़ी व फर्जीवाड़े का है तो दूसरा आर्म्स एक्ट से जुड़ा हुआ है। इस मामले में अभी मुख्तार पर अदालत से आरोप तय होना बाकी है। आरोप तय होने के बाद ही ट्रायल यानी मुकदमा शुरू होगा।

मुख्तार के खिलाफ दसवां और आखिरी मुकदमा भी गैंगस्टर एक्ट का ही है। इस मामले में मऊ के दक्षिण टोला थाने में केस दर्ज है। मुकदमे का ट्रायल साल 2012 में शुरू हुआ था। इस मामले में अदालत से मुख्तार पर आरोप तय हो चुके हैं।

दस मुकदमों में से अकेले 4 गैंगस्टर के हैं। गैंगस्टर के 3 मुकदमे गाजीपुर के हैं। एक मऊ जिले का है। इसके अलावा मुख्तार पर हत्या और जानलेवा हमले के भी मुकदमे चल रहे हैं। मऊ के दक्षिण टोला थाने में दर्ज एफआईआर में तो मुख्तार को उम्र कैद से लेकर फांसी तक की सजा हो सकती है।

एमपी एमएलए कोर्ट में मुख्तार के खिलाफ 10 मुकदमे चल रहे हैं। एक मुकदमा खुद मुख्तार ने वारणसी जेल में बंद माफिया बृजेश सिंह के खिलाफ दाखिल कर रखा है। मुख्तार ने इस मामले में गवाही शुरू कराने के लिए फरवरी में कोर्ट से गुहार भी लगाई है। 20 साल पुराने इस मुकदमे में ट्रॉयल फिलहाल रुका हुआ है।बाहुबली मुख्तार के खिलाफ एक चर्चित मुकदमा फर्जी तरीके से शस्त्र लाइसेंस हासिल करने का भी है।

 (जनचौक ब्यूरो की रिपोर्ट।)

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