Wednesday, August 17, 2022

शाहीन बाग की दूसरी बरसी पर अहमदाबाद में भी हुआ आयोजन

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अहमदाबाद। 15-16 दिसंबर 2019 को दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में CAA/NRC का विरोध कर रहे छात्रों को दिल्ली पुलिस ने कैंपस में घुस कर पिटाई की थी। दिल्ली और उत्तर प्रदेश में प्रदर्शन कर रहे दर्जनों प्रदर्शनकारियों की पुलिस फायरिंग में मौतें हुईं। 15-16 दिसंबर को जामिया नगर के शाहीन बाग़ में सरकारी बर्बरता और नागरिकता कानून के विरोध में मुस्लिम महिलाएं अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गई थीं। शाहीन बाग़ आन्दोलन एक ऐसा आन्दोलन बन गया जिसे इतिहास के पन्नों में दर्ज कर लिया गया। इस आन्दोलन का प्रभाव अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पड़ा। शाहीन बाग़ आन्दोलन के समर्थन में लखनऊ, मुंबई, कोलकाता, अहमदाबाद इत्यादि शहरों में महिलाओं का शाहीन बाग़ बना।

आज शाहीन बाग़ को दो वर्ष पूरा होने पर देश भर में पब्लिक मीटिंग, धरना, आवेदन देने जैसे कार्यक्रम किये गए। अहमदाबाद में भी आईआईएम अहमदाबाद के बाहर फुटपाथ पर बैनर पोस्टर के साथ प्रदर्शन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम अनहद की ओर से आयोजित किया गया था। लेकिन COVID का बहाना बनाकर पुलिस ने अनुमति नहीं दी। जिसके चलते शहर के Anti CAA Activists खेत भवन में एकत्र हुए और उन्होंने Citizenship (Amendment) Act 2019 को वापस लेने का प्रस्ताव पास किया। साथ ही देश भर में डेमोक्रेटिक प्रदर्शन करने वाले तथा Anti CAA प्रदर्शकारी कैदियों को जेल से रिहा करने की मांग की गई।

मीटिंग का आयोजन देव देसाई ने किया था और मीटिंग के मुख्य वक्ता प्रोफेसर हेमंत शाह ने कहा कि “ शाहीन बाग़ आन्दोलन देश को एक और संगठित करने वाला आन्दोलन था। आन्दोलन मुस्लिमों का आन्दोलन स्थापित होने तथा कोरोना महामारी आ जाने की वजह से नागरिकता संशोधन कानून पर सरकार पीछे नहीं हटी। इस देश में सेकुलरिज्म खतरे में है। मानवता को बचाने के लिए सेकुलरिज्म को बचाना ज़रूरी है।” अहमदाबाद यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रघु रंजन ने कहा, “ गुजरात में अन्य राज्यों की तुलना में डेमोक्रेसी थोड़ा कम दिखती है। डेमोक्रेसी और सेक्युलर वैल्यूज को बचाने के लिए हमें सोशल मीडिया का उपयोग सही ढंग से करना चाहिए। मेरे पास नफरत बांटने वालों के संदेश आते हैं। क्या सेकुलरिज्म को बचाने वाले हमारे सन्देश हमारे उलट विचारधारा वालों के पास पहुँचते हैं या नहीं? हमें देखना पड़ेगा।”

दिल्ली इनकम टैक्स विभाग में नौकरी कर रहे वाम विचारधारा के तुषार परमार ने कहा कि गुजरात में आम आदमी पार्टी के बढ़ते कदम सेकुलरिज्म के लिए चिंताजनक हैं। मैंने दिल्ली में उसी पोस्ट से अपनी नौकरी शुरू की है। जिस पोस्ट पर अरविन्द केजरीवाल ने इस्तीफा दिया था। मैं अरविन्द केजरीवाल को सेक्युलर नहीं मानता क्योंकि CAA प्रदर्शन के समय तथा दिल्ली दंगे में आम आदमी पार्टी सरकार का रवैया निराशाजनक था। हम लोग दंगे के बाद मुस्लिम बस्तियों में अपने सीमित संसाधनों से सेवा कर रहे थे। सेवा के काम में भी केजरीवाल की सरकार ने बाधा पैदा की। गुजरात में भाजपा का बेस उतना नहीं है जितना हम सोचते हैं। लेकिन कांग्रेस उन मोहल्लों और कालोनियों तक नहीं पहुंच पाई है। भाजपा की मजबूती का कारण कांग्रेस है।”

कार्यक्रम में उपरोक्त वक्ताओं के अलावा नूर जहाँ दीवान, कलीम सिद्दीकी, कौशर अली सैय्यद, भार्गव, इकराम मिर्ज़ा, हुजैफा उज्जैनी, औज़ेफ़ त्रिमिज़ी इत्यादि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत CAA के खिलाफ गुजरात में संघर्ष की रणनीति तय की गई। और यह सामूहिक संकल्प लिया गया कि NPR के माध्यम से NRC या किसी भी माध्यम से NRC का प्रयत्न हुआ तो विरोध किया जायेगा।

(अहमदाबाद से जनचौक संवाददाता कलीम सिद्दीकी की रिपोर्ट।)

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