Monday, August 8, 2022

कश्मीर के हैदरपोरा एनकाउंटर पर उठने लगे हैं सवाल

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गौरतलब है कि सोमवार की रात सुरक्षा बलों और दो संदिग्ध आतंकवादियों के बीच आमने-सामने के मुठभेड़ में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के मालिक अल्ताफ़ अहमद और उसी मकान में किराए पर रह रहे मुदासिर गुल भी मारे गए थे। पुलिस ने दोनों मारे गए नागरिकों को आतंकवादी का सहयोगी करार दिया है। श्रीनगर के हैदरपोरा में अभियान के दौरान दो नागरिकों के अलावा दो संदिग्ध आतंकवादी भी मारे गए। पुलिस ने दावा किया है कि आतंकवादी गुल द्वारा किराए पर लिए गए एक कमरे में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के अंदर छिपे हुए थे। कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक विजय कुमार ने मारे गए दो आतंकवादियों में से एक की पहचान बिलाल भाई उर्फ़ ​​हैदर के रूप में की है, जो पाकिस्तान का बताया जा रहा है। दूसरा संदिग्ध आतंकी जम्मू क्षेत्र के रामबन का रहने वाला है और उसके परिवार को पहचान के लिए बुलाया गया है।

वहीं मालिक अल्ताफ अहमद के परिवार ने आरोप लगाया है कि उन्हें “मानव ढाल” के रूप में इस्तेमाल किया गया था। और वे निर्दोष हैं।

परिजनों के आरोप के बाद प्रदेश के तमाम विपक्षी दलों के नेताओं ने  इस कथित हत्या की न्यायिक जांच की मांग की है।   

पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन के प्रवक्ता और माकपा के वरिष्ठ नेता एमवाई तारिगामी ने नागरिकों की हत्याओं की न्यायिक जांच की मांग की है। साथ ही प्रशासन से अंतिम संस्कार के लिए उनके शवों को संबंधित परिवारों को तुरंत सौंपने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा है कि “कल एक और त्रासदी हैदरपोरा मुठभेड़ के दौरान हुई जिसमें दो नागरिकों की जान चली गई। हम एक भयानक दौर से गुजर रहे हैं। अब क्या कहानी सामने आएगी और सरकार इसकी क्या व्याख्या करेगी? उनके परिजन रो रहे हैं कि वे बेक़सूर हैं। हम सच्चाई की जांच के लिए न्यायिक जांच की मांग करते हैं। मारे गए लोग वापस नहीं आएंगे लेकिन कम से कम उनके परिवारों को पता चल जाएगा कि क्या हुआ था।”

पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन ने हैदरपोरा में घटनाओं के पारदर्शी विवरण की मांग करते हुए कहा है कि “हैदरपोरा मुठभेड़ को लेकर कई दावे किए जा रहे हैं। एक तटस्थ संस्था द्वारा इसकी जांच होनी चाहिए। यह न तो पहली बार है और न ही आखिरी बार। मनोज सिन्हा आपके पास यह कहने का अवसर है कि मानव जीवन मायने रखता है।”

वहीं नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट करके हैदरपोरा में हुई मुठभेड़ की निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि  “मुठभेड़ और मारे गए लोगों के बारे में बहुत सारे सवाल उठाए जा रहे हैं। अतीत में फर्जी मुठभेड़ों के कई उदाहरण सामने आए हैं। इस एनकाउंटर के बारे में उठाए गए सवालों का तेजी से और विश्वसनीय तरीके से जवाब देने की ज़रूरत है।”

वहीं पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने इस एनकाउंटर के लिये केंद्र की मोदी सरकार को निशाने पर लेते हुये ट्वीट करके कहा है कि, “निर्दोष नागरिकों को मानव ढाल के रूप में उपयोग करना, उन्हें क्रॉस फायरिंग में मारना और फिर उन्हें आसानी से ओवर ग्राउंड वर्कर्स करार देना अब भारत सरकार की नियम पुस्तिका का हिस्सा है”।

उन्होंने न्यायिक जांच की ज़रूरत पर बल देते हुये कहा है कि “यह ज़रूरी है कि सच्चाई को सामने लाने के लिए एक विश्वसनीय न्यायिक जांच की जाए और दण्ड से मुक्ति की इस प्रचलित संस्कृति को समाप्त किया जाए।”

उन्होंने आगे कहा कि “यह देखकर दुख होता है कि आपने उग्रवादियों से लड़ने के दौरान नागरिकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।”

जम्मू के पांच दिवसीय दौरे पर आई पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ़्ती ने पार्टी कार्यालय में युवाओं के एक समूह को संबोधित करते हुए कहा कि “मुझे हैदरपोरा में एक मुठभेड़ की खबर मिली। आतंकवादी मारे गए, समझा जाता है, लेकिन परिवार का आरोप है कि घर के मालिक को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल किया गया था। वह एक एक युवा डॉक्टर के साथ मारा गया। मुझे नहीं पता कि उन्हें (मकान मालिक और डॉक्टर) किस श्रेणी में रखा जाएगा, लेकिन यह देखकर दुख होता है कि आपने आतंकवादियों से लड़ते हुए नागरिकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। यह ग़लत है।”

उन्होंने हाल के दिनों में त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में सांप्रदायिक तनाव का हवाला देते हुए कहा, “उनके पास केवल एक मशीन और केवल एक कारक है। वह है यूपी चुनावों में राजनीतिक लाभ के लिए समाज का ध्रुवीकरण करना।” 

 उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र देश का ध्रुवीकरण करने का आरोप भाजपा पर लगाते हुये कहा उन्होंने कहा कि – “पहले, सरकारें अपनी उपलब्धियों पर वोट मांगती थीं जैसे कि कितने पुल बनाए गए हैं, कितने रोज़गार के अवसर पैदा हुए हैं और कितने युवाओं को रोज़गार दिया गया है। उनके (बीजेपी) के पास वोट हासिल करने के लिए हिंदुओं और मुसलमानों को एक-दूसरे से लड़ाने के अलावा लोगों को दिखाने के लिए कुछ भी नहीं है।”

 पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने जम्मू के युवाओं से सतर्क रहने की हिदायत देते हुए कहा कि यहां भी समाज में जहर घोलने की कोशिश की जा रही है। युवा बेरोज़गारी की सबसे बड़ी समस्या का सामना कर रहे हैं। उनके (सरकार) पास इसका कोई जवाब नहीं है। पिछले क़रीब एक साल से सड़कों पर उतरे किसानों की समस्या का उनके पास कोई जवाब नहीं है।”

पीडीपी चीफ ने देश के सांप्रदायिक सौहार्द्र और परस्पर प्रेम व भाईचारा की गंगा-जमुनी तहजीब को याद करते हुये कहा कि वह जम्मू में एक कृष्ण देव सेठी के घर पली-बढ़ी हैं, लेकिन उन्हें कभी भी हिंदू और मुस्लिम में कोई अंतर महसूस नहीं हुआ। यह जम्मू का भाईचारा है जो देश की उन जगहों में से एक है जहां धर्मनिरपेक्षता जिंदा है और हिंदू, मुस्लिम और सिख भाई की तरह रह रहे हैं, लेकिन वे यहां के समाज को भी जहर देना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, “आपको उनके जाल में नहीं पड़ना चाहिए। आपको उनसे हिसाब लेना होगा और पूछना होगा कि यहां स्थापित बिजली परियोजनाओं और कारखानों में कितने स्थानीय लोगों को रोजगार मिला है। अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद, जम्मू-कश्मीर में कितने स्थानीय और गैर-स्थानीय लोगों को नौकरी मिली।”

अपनी पार्टी के नेता और श्रीनगर नगर निगम के मेयर जुनैद अजीम मट्टू ने कहा, “हैदरपोरा मुठभेड़ को लेकर गंभीर आरोप लग रहे रहे हैं। माननीय एलजी मनोज सिन्हा साहब सच्चाई का पता लगाने के लिए निष्पक्ष और समयबद्ध जांच का आदेश देने का अनुरोध करें। आशा है कि सच्चाई की जीत होगी। दो नागरिकों के परिवारों को निष्पक्ष रूप से सुना जाना चाहिए।”

हुर्रियत कांफ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक़ ने भी एक बयान जारी करके इसकी कड़ी निंदा की है। और घटना में मारे गए लोगों को न्याय दिलाने और मृतकों के शवों को अंतिम संस्कार के लिए उनके परिवारों को तुरंत वापस करने की मांग की है। और एक बयान में कहा है कि “राज्य द्वारा मानवाधिकारों के तीव्र उल्लंघन के ख़िलाफ़ भारत में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय और नागरिक समाज की चुप्पी ने कश्मीर में रहने वाले लोगों के जीवन को नरक बना दिया है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।) 

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