Wednesday, December 7, 2022

सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है गृहमंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग

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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के शाहीन बाग इलाके में एक हफ्ते के भीतर लगातार तीसरी बार गोली चलने की घटना पर सोशल मीडिया पर उबाल आ गया है। सोशल मीडिया के माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफार्म ट्विटर पर इस समय हैशटैग #AmitShahMustResign ट्रेंड कर रहा है। दरअसल इन घटनाओं के लिए सभी लोग केंद्रीय गृहमंत्री को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। क्योंकि राजधानी दिल्ली की कानून और व्यवस्था गृहमंत्रालय के पास है। और ज्यादातर लोग अमित शाह को इस मामले में नाकाम करार दे रहे हैं।

दीपक शर्मा नाम के एक शख्स ने अपने ट्विटर पोस्ट पर गृहमंत्रालय और जामिया मिलिया इस्लामिया के बीच की दूरी का नक्शा पेश किया है और उसने कहा है कि मैं केवल अमित शाह को यह याद दिलाना चाहता हूं कि आपका दफ्तर जामिया विश्वविद्यालय से महज 11 किमी दूर है। लेकिन आप दफ्तर के इलाके को भी संभाल पाने में अक्षम हैं। ऐसे में आप पूरा देश कैसे संभालेंगे? जो दिल्ली नहीं संभाल सकता वह देश कैसे संभालेगा। और फिर शाह के इस्तीफे का हैशटैग उसने लगाया है।

एक दूसरी पोस्ट में कहा गया है कि अमित शाह गोली मारो गैंग के मुखिया हैं। उन्होंने कानून और व्यवस्था को बनाए रखने की जिम्मेदारी छोड़ दी है। और अपना पूरा प्रयास और ऊर्जा घृणा और नफऱत को फैलाने में लगा रहे हैं। वह किसी भी रूप में गृहमंत्री बने रहने के काबिल नहीं हैं।

अमित शाह की नाकामी को केवल शाहीन बाग और जामिया से नहीं बल्कि जेएनयू में हुई घटना से भी जोड़ा जा रहा है। कांग्रेस नेता सुष्मिता देव ने अपनी पोस्ट में कहा है कि 5 जनवरी को हुई हिंसा के दौरान जेएनयू की प्रोफेसर सुचित्रा सेन को 16 टांके लगे थे। आईपीसी के तहत यह हत्या के प्रयास के बराबर है। दिल्ली पुलिस ने अब तक क्या कार्रवाई की है?

एक भी गिरफ्तारी अभी तक नहीं हुई है। वो किसकी रक्षा कर रहे हैं। इसके साथ ही अमित शाह के इस्तीफे की मांग का हैशटैग लगा हुआ है।

एक हैंडल में लिखा गया है कि वह राष्ट्र पर धब्बा है। जामिया में एक और फायरिंग।

वैभव राय ने कहा है कि जामिया में एक और शूटिंग की घटना। दिल्ली का अपनी कानून और व्यवस्था पर कोई नियंत्रण नहीं है। अमित शाह के नेतृत्व में दिल्ली पुलिस ने दिल्ली के लोगों को निराश किया है।

एक हैंडल में सीधे मीडिया की भूमिका पर सवाल उठाया गया है। इसमें कहा गया है कि क्या राष्ट्रीय राजधानी में कानून और व्यवस्था के संकट को संभालने में गृहमंत्री की अक्षमता पर किसी मीडिया या न्यूज चैनल ने सवाल उठाया है। या फिर वो किसी की हत्या की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

एक ट्विटर पोस्ट में सीधे गृहमंत्रालय और दिल्ली पुलिस को कठघरे में खड़ा किया गया है। कहा गया है कि यह सब कुछ दिल्ली पुलिस की मदद से गृहमंत्रालय करवा रहा है।

दिलचस्प बात यह है कि इन सारी घटनाओं की जिम्मेदारी खुद लेने की जगह राजधानी की गली-गली और नुक्कड़-नुक्कड़ घूम रहे अमित शाह ने इशारे में इसके लिए केजरीवाल को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की है। उन्होंने एक सभा में कहा कि दिल्ली में दो दिनों से दंगा हो रहा है। और केजरीवाल पूरे गर्व से कहते हैं कि वह शाहीन बाग के साथ खड़े हैं। वह दिल्ली की रक्षा नहीं कर सकते लेकिन केवल देश को विभाजित कर सकते हैं।

इस पर चटुकी लेते हुए एक शख्स ने कहा है कि यह गृहमंत्री का बयान है जिसका दिल्ली पुलिस पर नियंत्रण है। आप क्या कर रहे हैं?

हालांकि एक फरवरी को केजरीवाल ने भी इसका जवाब दिया था। उन्होंने अमित शाह से पूछा था कि अमित शाह जी, ये आपने क्या हाल बना रखा है हमारी दिल्ली का। दिनदहाड़े गोलियां चल रहीं हैं। कानून व्यवस्था की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। चुनाव आते जाते रहेंगे, राजनीति भी चलती रहेगी, लेकिन दिल्ली के लोगों की ख़ातिर, कृपया कानून व्यवस्था ठीक करने पर ध्यान दीजिए। 

मशहूर पत्रकार निखिल वागले ने भी अमित शाह से इस्तीफा मांगा है। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा है कि दिल्ली में कानून और व्यवस्था की स्थिति खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है। जब गृहमंत्री और उनके सहयोगी रोजाना के स्तर पर हिंसा को उकसा रहे हैं तो यह होना स्वाभाविक है। गृहमंत्री बने रहने के लिए अमित शाह के पास कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्हें तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। उन्हें इसलिए नहीं बने रहना चाहिए क्योंकि वह अपराध में सहयोगी हैं।

अजय नाम के एक शख्स ने एनडीटीवी में यूपी के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह के बयान का हवाला देते हुए जिसमें उन्होंने कहा है कि दिल्ली पुलिस से और की अपेक्षा की जाती है…यह कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता है, कहा है कि बिल्कुल, लेकिन हमें गृहमंत्री की पूरी भूमिका पर सवाल उठाना चाहिए जो पुलिस को रीढ़विहीन और कायर बनाने के लिए सीधे जिम्मेदार हैं। और उसे एक राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। साथ ही अपराधियों को सहयोग कर रहे हैं। हम सभी को गुजरात माडल दोहराए जाने का पुरजोर विरोध करना चाहिए।

शाहिद पठान नाम के एक शख्स ने कहा है कि अगर हम एक अपराधी को गृहमंत्री बनाएंगे तो निश्चित तौर पर हमारा देश अराजकता की तरफ जाएगा।

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