Wednesday, July 6, 2022

सिविल सोसाइटी सदस्यों ने कहा- हरिद्वार हेट कॉन्क्लेव का सुप्रीम कोर्ट ले संज्ञान

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सिविल सोसायटी और वरिष्ठ एक्टिविस्ट और वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह हरिद्वार के हेट कॉन्क्लेव का संज्ञान लेकर यूएपीए के तहत भड़काऊ भाषण देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करे। हरिद्वार हेट कॉन्क्लेव के वीडियो वायरल होने और देश-दुनिया में इसकी निंदा-आलोचना के बीच वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह इस घटना का संज्ञान लेकर कार्रवाई करे। इस कॉन्क्लेव में कथित हिंदू संतों ने बेहद आपत्तिजनक और भड़काऊ भाषण दिए, जिसमें समुदाय विशेष के खिलाफ हथियार उठाने और उन पर हमले करने का आह्वान किया गया। साथ ही इस कार्यक्रम में वक्ताओँ ने मुस्लमों के जनसंहार का ऐलान किया और लोगों से कॉपी-किताब के बजाए हथियार उठाने को कहा।

दिल्ली में हुए एक कार्यक्रम में प्रशांत भूषण ने कहा कि इस आयोजन में जिस तरह की सांप्रदायिक और भड़काऊ भाषा का प्रयोग किया गया उससे पूरा देश भौंचक है। उन्होंने धर्म संसद के नाम पर हुए इस आयोजन को ‘अधर्म संसद’ की संज्ञा दी। प्रशांत भूषण ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि सिविल सोसायटी के लोग सामने आएं और ऐसे आयोजन के खिलाफ एकजुट होकर अभियान शुरु कर दें, जिससे इन विकृत लोगों पर अंकुश लगाया जा सके। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि वे नफरत फैलाने वाले ऐसे लोगों के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि हरिद्वार आयोजन में जो कुछ हुआ उसमें तो यूएपीए और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सिविल सोसायटी के लोगों को पुलिस और न्यायपालिका पर दबाव बनाना चाहिए ताकि ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो जो खुलेआम मुसलमानों की हत्या के लिए लोगों को उकसा रहे हैं। प्रशांत भूषण ने कहा, “आखिर इन लोगों को पुलिस या अदालत का खौफ क्यों नहीं है? क्योंकि सरकार और पुलिस उनके साथ है। दरअसल ये लोग तो सरकार के बढ़ावे पर ही ऐसी हरकतें कर रहे हैं। इनके खिलाफ हर किसी को खुलकर बोलना चाहिए।” उन्होंने कहा कि सेलिब्रिटीज को इस बारे में सामने आकर इन सबकी निंदा करनी चाहिए। प्रशांत भूषण ने देश के हर जिले में सौहार्द परिषद यानी हार्मनी काउंसिल बनाने का प्रस्ताव सामने रखा, जिसमें सभी धर्मों के लोग और विशिष्ट लोगों को शामिल होना चाहिए, ताकि देश में शांति का संदेश फैलाया जा सके।

इस आयोजन में राज्यसभा की पूर्व सदस्य सय्यदा हमीद ने कहा कि हरिद्वार में जो कुछ हुआ वह उस प्रोजेक्ट का हिस्सा है जो देश के धर्मनिरपेक्ष ताने बाने को ध्वंस करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में विवादास्पद बीजेपी नेता अश्निवनी उपाध्याय ने संविधान की भगवा प्रति सामने रखी, जो कि संविधान का अपमान है, ये लोग देश के संविधान पर भगवा थोपना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अब सरकार और पुलिस से कोई उम्मीद नहीं है, ऐसे में सभी संगठनों और लोगों को एकजुट होकर नफरत के खिलाफ खड़ा होना होगा।

इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार राम पुनियानी ने आरएसएस और इससे जुड़े संगठनों के धर्म की व्याख्या पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि आरएसएस और इससे जुड़े संगठन भ्रामक तथ्यों को सामने रखकर नफरत फैला रहे हैं। नफरत धीरे-धीरे गुस्से में बदलती है जिसकी परिणति दंगों के रूप में सामने आती है।

आरटीआई अक्टिविस्ट अंजलि भारद्वाज ने पूरे मामले में पुलिस के ढुलमुल रवैये पर सवाल उठाया। उन्होंने मुख्यधारा के कथित मीडिया की भूमिका पर भी उंगली उठाई। उन्होंने पूछा कि क्या इस कार्यक्रम को लेकर पुलिस को कोई जानकारी नहीं थी।

हरिद्वार के इस हेट कॉन्क्लेव को लेकर देशभर में गुस्सा है। उत्तराखंड पुलिस ने कहा है कि वह हालात पर नजर रखे हुए है और शांति और व्यवस्था सुनिश्चित करेगी। ध्यान रहे इस कार्यक्रम के आयोजकों में से एक यति नरसिंहानंद सांप्रदायिक और भड़काऊ बयानों के लिए कुख्यात हैं। उन्होंने इस कार्यक्रम में कहां था कि हिंदू ब्रिगेड को बड़े और अच्छे हथियार जमा करने चाहिए ताकि मुसलमानों को सबक सिखाया जा सके।

नरसिंहानंद ने फरवरी 2020 में दिल्ली विधानसभा चुनाव के आसपास भी इसी किस्म का कार्यक्रम दिल्ली में किया था, जिसके बाद उत्तर पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़क उठे थे।

(जनचौक ब्यूरो की रिपोर्ट।)

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