Friday, October 7, 2022

क्यों नहीं की गयी थी रैपिड टेस्टिंग किट की जाँच?

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चीन ने कोरोना संकट के दौरान बेहद ही घटिया पीपीई किट भेजी थी। इसके बावजूद भारत ने एक बार फिर चीन पर भरोसा किया और रैपिड टेस्टिंग किट मंगा ली। अब सामने आया है चीन से आई रैपिड टेस्टिंग किट फेल हो गयी है। ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि जिस चीन ने खराब पीपीई किट भेजी थी, आखिर उसी चीन पर रैपिड टेस्टिंग किट के लिए भरोसा क्यों किया गया? अगर इसके अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं था तो टेस्टिंग से पहले रैपिड टेस्टिंग किट की जांच क्यों नहीं की गई? इसका जवाब अभी तक भारत सरकार ने नहीं दिया है।

इस बीच कोरोना वायरस की रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट किट के इस्तेमाल पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई है। इससे पहले मंगलवार को इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने सभी राज्यों से कहा था कि वे 2 दिन तक नई रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट किट का इस्तेमाल न करें। क्योंकि राजस्थान, पश्चिम बंगाल और कई अन्य राज्यों ने कहा था कि किट से किए गए अधिकांश टेस्ट के नतीजे ग़लत आ रहे हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट से केंद्र सरकार ने कहा है कि सैंपल जाँच के परिणामों में विविधता के कारण रैपिड ऐंटीबॉडी टेस्ट किट के प्रयोग पर पाबंदी लगा दी गई है।

केंद्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस एनडब्ल्यू की पीठ से कहा है कि रैपिड टेस्ट किट से मिलने वाले परिणामों में बहुत अंतर आने के कारण ही अभी इसके प्रयोग पर पाबंदी लगाई गई है। इसका प्रयोग सर्विलेंस जाँच के लिए किया जा सकता है और वीआरडीएल (वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी) केंद्र अभी इसका प्रयोग नहीं कर सकता। जस्टिस सम्ब्रे कोरोना वायरस से लड़ने के बारे में विभिन्न मदों में अदालत के निर्देशों के लिए दायर की गई कई याचिकाओं के साथ टैग की गई सीएच शर्मा की याचिका और सुभाष जंवर की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहे थे।

इससे पहले 20 अप्रैल को इस मामले की सुनवाई में एकल पीठ ने आईसीएमआर और राज्य सरकार से यह बताने को कहा था कि वीआरडीएल सुविधाएँ यवतमाल, चंद्रपुर, गढ़चिरौली और गोंदिया के सरकारी अस्पतालों में कब तक उपलब्ध हो जाएँगी। एकल पीठ ने संबंधित अधिकारियों से कहा कि वे आरटी-पीसीआर मशीनों की डिलीवरी जल्द लेने का प्रयास करें। रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट किट में रक्त के नमूने का प्रयोग होता है जबकि आरटी-पीसीआर मशीन से होने वाली जाँच में नाक या अगले से लिए गए स्वैब का प्रयोग होता है।

भारत सरकार के एसएसजी यूएम औरंगबादकर ने एकलपीठ से कहा कि रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट किट के एक हिस्से की ख़रीद केंद्र सरकार के स्तर पर पूरी हो चुकी है हालाँकि इसके प्रयोग पर रोक लगा दी गई है क्योंकि जाँच के परिणाम भ्रामक आ रहे थे। एकल पीठ  ने कहा कि मुझे बताया गया है कि ये किट सिर्फ़ सर्विलेंस के उद्देश्य से प्रयोग किए जा रहे हैं और वीआरडीएल केंद्रों पर इनका प्रयोग नहीं हो सकता।

देश में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। जहां एक ओर कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या 25 हजार के करीब पहुंच गई है वहीं अब तक 779 लोग इससे अपनी जान गंवा चुके हैं। सरकार ने अगले आदेश तक कोरोना वायरस की जांच के लिए मंगाई गई रैपिड एंटीबॉडी टेस्टिंग किट पर रोक लगा दी है। चीन से मंगाई गई इन किटों पर शुरुआत से ही सवालिया निशान उठ रहे थे। शुरुआत में कुछ किट क्वालिटी टेस्ट में पास नहीं हो सकी थीं, जिसके बाद सरकार ने साफ किया था कि वह खराब क्वालिटी की किट को चीन को वापस करेगी।  इसमें पीपीई किट भी शामिल थीं।

इसके कुछ दिन बाद राजस्थान और पश्चिम बंगाल सरकार ने रैपिड एंटी बॉडी टेस्ट किट के नतीजों पर संशय जाहिर किया था। इसके बाद देश की शीर्ष चिकित्सा अनुसंधान इकाई ‘भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद’ (आईसीएमआर) ने मंगलवार को राज्यों को सलाह दी थी कि दो दिन के लिए इसका इस्तेमाल रोक दिया जाए।  उसने रैपिड जांच किटों के परिणाम सही नहीं आने की शिकायतों के बाद इस संबंध में जांच की बात कही थी। अब सरकार ने इन टेस्ट किट का इस्तेमाल पूरी तरह से रोकने के निर्देश दिए हैं।

आईसीएमआर के महामारी एवं संचारी रोग विभाग प्रमुख डॉ. रमन आर गंगाखेडकर के अनुसार त्वरित जांच और आरटी-पीसीआर जांच के नतीजों में अत्यधिक अंतर देखा जा रहा है जो कुछ राज्यों में छह से 71 प्रतिशत तक दर्ज किया गया है। चीन से 5.5 लाख त्वरित एंटीबॉडी जांच किट खरीदी थीं। इन्हें कई राज्यों में वितरित किया गया था।

दरअसल कोरोना वायरस से निपटने की कोशिशों में रैपिड टेस्ट को गेम चेंजर के तौर पर देखा गया था, लेकिन अब रैपिड टेस्ट किट के नतीजों पर सवाल उठ रहे हैं। रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट से ये कंफर्म नहीं होता कि किसी शख्स में कोरोना वायरस है या नहीं। बस ये पता चलता है कि उसमें कोरोना वायरस से लड़ने वाली एंटीबॉडी बन रही हैं या नहीं।

यानी ये कोरोना मरीजों की संभावित पहचान करने में मददगार है। इस टेस्ट से पता चलता है कि क्या शरीर में कोरोना वायरस आया था या नहीं। एंटीबॉडी पॉजिटिव आती है तो पीसीआर करवाने की सलाह दी जाती है। अगर वह भी पॉजिटिव आई तो यानी कोरोना है। अगर नहीं तो यानी पुराना इंफेक्शन हो सकता है। ऐसे में अलग रहने की सलाह दी जाती है। अगर दोबारा रिपोर्ट नेगेटिव आई तो शख्स घर जा सकता है।

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