Thursday, July 7, 2022

मणिपुर चुनाव-बढ़त के बावजूद विद्रोहियों का इस्तेमाल

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मणिपुर विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को ‘केन्द्र में सत्ताधारी पार्टी होने’ से शुरुआती बढ़त हासिल है, फिर भी वह भूमिगत विद्रोही जमातों का चुनावी लाभ लेने की कोशिश में है। मणिपुर में दो चरणों में मतदान होना है। पहले चरण का मतदान 28 फरवरी को संपन्न हो चुका है, दूसरे चरण का मतदान कल 5 मार्च को होना है। कल ही 12 मतदान-केन्द्रों पर पुनर्मतदान भी होगा जहां 28 फरवरी को हुए मतदान को बूथ-कब्जा, लूटपाट व धांधली के आरोप की वजह से रद्द कर दिया गया है।

इस बार भूमिगत विद्रोही जमातों ने चुनाव बहिष्कार का एलान करके राजनीतिक दलों के खिलाफ मुखर विरोध नहीं किया है। इसलिए चुनावों में पहले की तरह ले कठोर सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए हैं। वैसे नगा-विद्रोहियों से केन्द्र की वार्ता जारी रहने से विद्रोही तबकों में एक उम्मीद बंधी लगती है। नगा शांति वार्ता वाजपेयी सरकार के दिनों शुरू हुई थी। इस स्थिति का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश में चुनाव प्रचार के दौरान भी भाजपा का शीर्ष नेतृत्व विद्रोही गुटों से बातचीत के लिए सामने आने की अपील कर रहा है।

मणिपुर में अनेक विद्रोही गुट सक्रिय रहे हैं। उनका आधार क्षेत्र आबादी के अनुसार अलग-अलग इलाकों में रहा है। मणिपुर घाटी में मैतई लोगों की सघन आबादी निवास करती है, उनके बीच 1964 से ही सक्रिय यूटीएनएल व पीएलए सहित अन्य विद्रोही गुट सक्रिय रहे हैं। इन चुनावों में वे आमतौर पर खामोश नजर आए हैं। नगा व कूकी आदिवासियों के बीच उनके अपने विद्रोही गुट रहे हैं। इन चुनावों में नगा विद्रोहियों ने एनपीएफ को समर्थन देने का ऐलान किया है, पर दूसरी पार्टियों का विरोध नहीं करने का ऐलान किया है। उल्लेखनीय है कि इसका लाभ भाजपा को मिलने वाला है। तो कूकी विद्रोहियों को केन्द्र सरकार से चुनावों से ऐन पहले बड़ी रकम दिए जाने का आरोप कांग्रेस ने लगाया है, और कहा है कि कूकी विद्रोही मतदान के दिन सक्रिय रहे और चुडाचांदपुर व आसपास के जिलों में मतदाताओं को धमकाते हुए देखे गए। पहले चरण में करीब 90 प्रतिशत मतदान हुआ था।

मणिपुर में क्षेत्रीय दल मणिपुर पीपुल्स पार्टी (एमपीपी) कभी काफी मजबूत हुआ करती थी। पर अब उसका विलोप हो जाने से राजनीति मोटे तौर पर राष्ट्रीय राजनीतिक दलों-भाजपा व कांग्रेस के बीच में सिमटी हुई है। मणिपुर को पूर्ण राज्य का दर्जा 1972 में मिला, उस समय एमपीपी एक मजबूत राजनीतिक पार्टी थी और पहली सरकार उसके नेतृत्व में ही बनी थी। बाद में भी उसकी सरकारें बनी या वह सरकार में शामिल रही। पर पुराने नेताओं के दूसरी पार्टियों में चले जाने से इस पार्टी का कोई नामलेवा नहीं रह गया है। राष्ट्रीय पार्टियों से टिकट नहीं मिल पाने पर छिटके लोग पड़ोसी राज्यों की क्षेत्रीय दलों की अलख जगाने लगे हैं। यहां मेघालय की पार्टी एनपीपी, नगालैंड की पार्टी एनपीएफ और बिहार की पार्टी जदयू चुनावी मैदान में डटी हुई हैं। इनके अलावा लोजपा, शिवसेना व आठवाले की पार्टी आरपीआई के उम्मीदवार भी मैदान में हैं। ऐसे में तृणमूल कांग्रेस का चुनाव मैदान में नहीं दिखने पर आश्चर्य होता है। वैसे मेघालय व नगालैंड के मुख्यमंत्री अपनी पार्टी के उम्मीदवारों का प्रचार करने भी आए, जबकि जदयू का कोई बड़ा नेता चुनाव प्रचार करने नहीं आया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पहले चरण के मतदान के बाद 1 मार्च को एक वर्चुअल रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर विद्रोहियों को प्रोत्साहन देने का आरोप लगाया और विद्रोहियों से हथियार छोड़कर सरकार से बातचीत करने के लिए आगे आने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस को मणिपुर की राजनीतिक अस्थिरता, भ्रष्टाचार व पिछड़ेपन के लिए भी जिम्मेवार ठहराया। लेकिन भाजपा सरकार के कार्यों की फेहरिश्त गिनाते हुए वे उन सभी निर्माणाधीन योजनाओं का श्रेय लेने की कोशिश करते दिखे, जिन्हें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने निजी दिलचस्पी लेकर शुरू कराई थी।

उल्लेखनीय है कि भाजपा के नेतृत्व वाली पिछली सरकार में एनपीपी व एनपीएफ भी शामिल थी। हालांकि चुनावों में उन्होंने भाजपा से अलग रास्ता अपनाया है। उधर कांग्रेस के नेतृत्व में सीपीआई व कुछ छोटी पार्टियों ने मणिपुर प्रोग्रेसिव सेक्यूलर एलायंस बनाया है। सीपीआई तीन सीटों पर चुनाव लड़ रही है। सीपीआई नेता व राज्य में कई बार मंत्री रहे एम नारा सिंह ने कहा कि कुछ नकाबपोशों को कई चुनाव क्षेत्रों में लोगों को धमकाते हुए देखा गया है। वे लोगों से भाजपा के अलावा किसी को वोट नहीं देने के लिए कह रहे हैं। पार्टी ने इस बारे में चुनाव आयोग से शिकायत की है और समुचित सुरक्षा इंतजाम करने की मांग की है।

मालूम हो कि मणिपुर विधानसभा में 60 चुनाव क्षेत्र हैं। इस बार बारहवीं विधानसभा को चुनने के लिए मतदान हो रहे हैं। 

(अमरनाथ झा वरिष्ठ पत्रकार होने के साथ पर्यावरण मामलों के जानकार भी हैं। आप आजकल पटना में रहते हैं।)

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