Wednesday, July 6, 2022

उत्तराखंड: सत्ता पर भारी पड़ी किशोर ह्यूमन की पत्रकारिता, फर्जी मुकदमे में किया गया गिरफ्तार

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उत्तराखंड हाल के दिनों में दलितों के जातीय उत्पीड़न की घटनाओं के कारण लगातार चर्चा में रहा है, कुछ समय पहले ही चंपावत जिले में कथित रूप से सवर्णों के विवाह समारोह में खाना निकालने के चलते एक दलित व्यक्ति रमेश राम की हत्या कर दी गई। इसके बाद इसी जिले के सूखीडांग में दलित भोजन माता सुनीता देवी का जातीय उत्पीड़न किया गया। यह दोनों मुद्दे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों का हिस्सा बने, इसके बाद पिथौरागढ़ जिले के डीडीहाट में विधानसभा चुनाव के दौरान एक दलित व्यक्ति रामी राम की हत्या कर दी गई जिसमें आरोपी सवर्ण हैं।

शांत माने जाने वाले उत्तराखंड में दलितों के जातीय उत्पीड़न के मसले लगातार प्रकाश में आने का एक कारण यह भी है कि वर्तमान में जातीय उत्पीड़न के विरुद्ध दलितों के कई समूह सक्रिय हुए हैं और कुछ जुझारू कार्यकर्ता इन मुद्दों को प्रमुखता से सोशल मीडिया एवं वेब पोर्टल्स के माध्यम से ना केवल जनता के सामने ला रहे हैं बल्कि पीड़ितों के साथ खड़े होकर उन्हें कानूनी एवं आर्थिक मदद भी पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। भीम आर्मी इन नये अंबेडकरवादी संगठनों में बहुत सक्रिय है साथ ही कुछ स्वतंत्र  आंबेडकरवादी पत्रकार और कार्यकर्ता भी जातीय उत्पीड़न की अब तक बाहरी दुनिया से छुपाई गई सच्चाइयों को उजागर कर रहे हैं, जिसका उन्हें खामियाजा भी भुगतना पड़ रहा है।

दलितों के संस्थागत जातीय उत्पीड़न की घटनाओं को सामने लाने के कारण अप्रिय कार्यवाही का शिकार बने ताजा उदाहरण युवा दलित पत्रकार किशोर कुमार उर्फ किशोर ह्यूमन हैं।

24 फरवरी 2022 को पिथौरागढ़ पुलिस के द्वारा किशोर ह्यूमन को भारतीय दंड संहिता की धारा 153 ए के तहत दो समुदायों के बीच वैमनस्य भड़काने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया, और उसी दिन असाधारण तत्परता  दिखाते हुए उन्हें सीजीएम कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया।

पुलिस द्वारा जारी की गई विज्ञप्ति के अनुसार पत्रकार किशोर ह्यूमन पर आरोप है कि उन्होंने वेब पोर्टल जनज्वार के लिए की गई अपनी दो वीडियो रिपोर्ट्स में बार-बार अनुसूचित जाति शब्द का इस्तेमाल कर समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने का प्रयास किया है।

गौरतलब है कि 18 फरवरी 2022 एवं 21 फरवरी 2022 को वेब पोर्टल जन ज्वार के माध्यम से किशोर द्वारा तैयार की गई जिन वीडियो रिपोर्टस के आधार पर पुलिस द्वारा किशोर को गिरफ्तार किया गया है। उनमें से एक 13 फरवरी 2022 को पिथौरागढ़ जिले के डीडीहाट में एक दलित व्यक्ति रानी राम की हत्या के संबंध में है जिसकी शुरुआत में किशोर यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि एक अनुसूचित जाति के व्यक्ति की हत्या स्वर्ण समुदाय के लोगों के द्वारा कर दी गई है, यह बात एक तथ्य है जिसकी तस्दीक पीड़ित पक्ष से संबंधित एक व्यक्ति उसी वीडियो इंटरव्यू में कर रहे हैं।

इसी तरह 21 फरवरी को प्रसारित एक अन्य वीडियो जिसका संदर्भ में पुलिस ने लिया है, में किशोर के द्वारा कहीं भी कथित दुष्कर्म की पीड़िता के पिता द्वारा कही गई बात के इतर अपनी तरफ से कोई बात नहीं जोड़ी गई है।

‘अनुसूचित जाति’ एक संवैधानिक शब्दावली है और किशोर के द्वारा एक तथ्य के रूप में इसका जिक्र किया जा रहा है लेकिन कथित देवभूमि के वर्चस्व शाली अपर कास्ट को उत्पीड़न की घटनाओं के इस तरह के खुलासे से काफी दिक्कत होती हुई दिखाई दे रही है, जिसके चलते ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ ताकतवर और प्रभावशाली लोगों के दबाव में पुलिस प्रशासन ने किशोर के खिलाफ बेहद अतार्किक और गैरजरूरी कार्यवाही की है।

गौरतलब है कि किशोर ह्यूमन पिथौरागढ़ जिले के नेपाल से लगे हुए सीमांत गांव से आते हैं और उनके पिता एक बेहद गरीब दलित व्यक्ति हैं जो दर्जी का काम करते हैं, किशोर छात्र जीवन से ही काफी संघर्षशील और जुझारू रहे हैं, उन्होंने अंबेडकर हॉस्पिटल पिथौरागढ़ में रहते हुए अराइजनवीस का कार्य कर अपनी पढ़ाई पूरी की है और हॉस्टल के संगठन का अध्यक्ष रहते हुए उनके द्वारा किताब छात्रवृत्ति भोजन आदि विषयों पर लगातार संघर्ष किया गया है। जिसके कारण पूर्व में भी उन पर हमले हो चुके हैं।

इसके अलावा किशोर एक आरटीआई एक्टिविस्ट के बतौर  विशेष रुप से दलित हितों से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं और उन्होंने अपने स्वयं के संघर्षों से एक निर्भीक स्वतंत्र और  शोषित वर्ग के पक्षधर कार्यकर्ता की छवि हासिल की है। कुछ समय पहले तक वे भीम आर्मी के संगठन में भी सक्रिय दिखाई दिए थे।

दलित मुद्दों पर अपनी लगातार सक्रियता के चलते यह बेहद युवा पत्रकार काफी समय से स्थानीय वर्चस्वशाली वर्गों- तबकों और व्यक्तियों के निशाने पर था।

चर्चा यह है कि इस सक्रियता के चलते ही किशोर और उन के माध्यम से पहाड़ी इलाकों में उठ रहे अंबेडकरवादी आंदोलन को दबाव में लेने के लिए ही अतार्किक रूप से किशोर को गिरफ्तार किया गया है।

हालांकि उनकी इस गिरफ्तारी का पूरे प्रदेश भर में अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्गों के तमाम संगठनों के साथ साथ पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, और जनपक्षीय सरोकारों के लिए जाने जाने वाले राजनीतिक कार्यकर्ताओं ओर से जबरदस्त विरोध किया गया है।

पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय सहित अलग-अलग जगहों में ज्ञापन दिए जा रहे हैं और धरना प्रदर्शन इत्यादि की तैयारियां भी संगठनों के माध्यम से की जा रही हैं। सोशल मीडिया में किशोर कुमार की गिरफ्तारी के विरुद्ध जोरदार प्रतिक्रिया दिखाई दी है।

असल बात यह है कि वर्तमान में पढ़े-लिखे दलित युवाओं में आंबेडकरवादी चेतना का प्रसार हुआ है जिसके चलते पहाड़ों में भी जातिगत अन्याय शोषण के विरुद्ध आवाजें उठने लगी हैं और सामाजिक अंतर्विरोध खुलकर ज़ाहिर हो रहे हैं सोशल मीडिया ने इस प्रक्रिया को और तेज़ किया है।

यह देखने वाली बात होगी कि अब तक छुपाकर और दबाकर रख दी जाने वाली घटनाएं दलित पृष्ठभूमि के कार्यकर्ताओं की सक्रियता के चलते जब जगज़ाहिर हो रही हैं तो दलित कार्यकर्ताओं के दमन के प्रति आम नागरिक समाज का क्या रवैया रहता है, और यह परिदृश्य आगे किस रूप में सामने आता हुआ दिखाई देता है।

(जनचौक ब्यूरो की रिपोर्ट )

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